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परिषदीय विद्यालयों में खोले जाएंगे बालमित्र पुस्तकालय
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शाहजहांपुर। परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों में किताबें पढ़ने (बुक रीडिंग) में रुचि पैदा करने के उद्देश्य से अब प्रत्येक विद्यालय में पुस्तकालय की स्थापना की जाएगी। जहां पुस्तकालय पहले से ही स्थापित हैं, उन्हें क्रियाशील बनाया जाएगा। इतना ही नहीं, जिन विद्यालयों में पुस्तकालय के लिए कोई अतिरिक्त कक्ष नहीं है, वहां प्रत्येक कक्षा के रीडिंग कार्नर बनाया जाएगा, ताकि बच्चों को पाठ्यक्रम के अलावा भी कहानियों तथा अन्य प्रेरक किताबें पढ़ने का मौका मिल सके।
विभाग ने परिषदीय विद्यालयों में स्थापित होने वाले पुस्तकालयों को बालमित्र पुस्तकालय का नाम दिया है, जिनके माध्यम से बच्चों में कोर्स के अलावा तनावमुक्त होने के लिए प्रेरक पुस्तकें पढ़ने को मिल सकें। पुस्तकालय में यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि बच्चों को बिना किसी भेदभाव के पुस्तकें पढ़ने का समान और पर्याप्त समय दिया जाए। पुस्तकालयों के सदुपयोग के लिए प्रतिदिन दो क्लास यानी दो पीरियड बच्चों को उपलब्ध कराए जाएंगे। इसमें सुविधा यह भी दी जाएगी कि जो बच्चा पुस्तकालय के अलावा किताबें घर ले जाकर पढ़ना चाहता है, तो उसे यह छूट भी दी जाए। पुस्तकालय केवल बच्चों के लिए ही नहीं होंगे, बल्कि शिक्षक भी किताबों का उपयोग कर सकते हैं।
पुस्तकालय की देखरेख के लिए विद्यालय के एक शिक्षक को नियुक्त किया जाएगा, जो किताबों को व्यवस्थित कर बच्चों को भी किताबें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेगा। विभागीय अधिकारी समय-समय पर यह सुनिश्चित करेंगे कि पुस्तकालय का सदुपयोग हो रहा है अथवा नहीं। विद्यालयों में पुस्तकालय स्थापना का मुख्य उद्देश्य बच्चों में पठन कौशल, वाचन, निबंध लेखन, वाद-विवाद आदि प्रतियोगिताओं के लिए छात्र-छात्राओं को तैयार करना है।
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पुस्तकालय प्रबंधन को बनाया जाएगा बुक क्लब
परिषदीय विद्यालयों में पुस्तकालय की स्थापना के बाद इसकी देखभाल करने और किताबों को व्यवस्थित रखने की जिम्मेदारी शिक्षकों के अलावा बच्चों को भी दी जाएगी। इसके लिए बच्चों की समिति बनाई जाएगी, जिसे बुक क्लब नाम दिया जाएगा। बुक क्लब प्रत्येक कक्षा के लिए अलग-अलग बनाया जाएगा। समिति में दो छात्र और दो छात्राएं शामिल किए जा सकेंगे। यह समिति तीन माह के लिए तैयार की जाएगी, इसके बाद नए सदस्यों का चयन किया जाएगा, जिससे बच्चों में कार्य अनुभव के साथ नेतृत्व क्षमता भी पैदा होगी।
पुस्तकालय के लिए किताबें खरीदने को प्रथम चरण में प्राथमिक विद्यालयों के पांच हजार और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के दस हजार रुपये आया था, जिनसे किताबें खरीदी जा चुकी हैं। अब इन पुस्तकालयों को क्रियाशील तथा और बेहतर बनाने की योजना है, जिसके लिए एनसीईआरटी की किताबें भेजी जाएंगी, जिससे बच्चों को उपयोगी शिक्षा मिल सके। किताबों के लिए अलमारियों की व्यवस्था कंपोजिट ग्रांट से की जाएगी। - राकेश कुमार, बीएसए
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विभाग ने परिषदीय विद्यालयों में स्थापित होने वाले पुस्तकालयों को बालमित्र पुस्तकालय का नाम दिया है, जिनके माध्यम से बच्चों में कोर्स के अलावा तनावमुक्त होने के लिए प्रेरक पुस्तकें पढ़ने को मिल सकें। पुस्तकालय में यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि बच्चों को बिना किसी भेदभाव के पुस्तकें पढ़ने का समान और पर्याप्त समय दिया जाए। पुस्तकालयों के सदुपयोग के लिए प्रतिदिन दो क्लास यानी दो पीरियड बच्चों को उपलब्ध कराए जाएंगे। इसमें सुविधा यह भी दी जाएगी कि जो बच्चा पुस्तकालय के अलावा किताबें घर ले जाकर पढ़ना चाहता है, तो उसे यह छूट भी दी जाए। पुस्तकालय केवल बच्चों के लिए ही नहीं होंगे, बल्कि शिक्षक भी किताबों का उपयोग कर सकते हैं।
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पुस्तकालय की देखरेख के लिए विद्यालय के एक शिक्षक को नियुक्त किया जाएगा, जो किताबों को व्यवस्थित कर बच्चों को भी किताबें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेगा। विभागीय अधिकारी समय-समय पर यह सुनिश्चित करेंगे कि पुस्तकालय का सदुपयोग हो रहा है अथवा नहीं। विद्यालयों में पुस्तकालय स्थापना का मुख्य उद्देश्य बच्चों में पठन कौशल, वाचन, निबंध लेखन, वाद-विवाद आदि प्रतियोगिताओं के लिए छात्र-छात्राओं को तैयार करना है।
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पुस्तकालय प्रबंधन को बनाया जाएगा बुक क्लब
परिषदीय विद्यालयों में पुस्तकालय की स्थापना के बाद इसकी देखभाल करने और किताबों को व्यवस्थित रखने की जिम्मेदारी शिक्षकों के अलावा बच्चों को भी दी जाएगी। इसके लिए बच्चों की समिति बनाई जाएगी, जिसे बुक क्लब नाम दिया जाएगा। बुक क्लब प्रत्येक कक्षा के लिए अलग-अलग बनाया जाएगा। समिति में दो छात्र और दो छात्राएं शामिल किए जा सकेंगे। यह समिति तीन माह के लिए तैयार की जाएगी, इसके बाद नए सदस्यों का चयन किया जाएगा, जिससे बच्चों में कार्य अनुभव के साथ नेतृत्व क्षमता भी पैदा होगी।
पुस्तकालय के लिए किताबें खरीदने को प्रथम चरण में प्राथमिक विद्यालयों के पांच हजार और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के दस हजार रुपये आया था, जिनसे किताबें खरीदी जा चुकी हैं। अब इन पुस्तकालयों को क्रियाशील तथा और बेहतर बनाने की योजना है, जिसके लिए एनसीईआरटी की किताबें भेजी जाएंगी, जिससे बच्चों को उपयोगी शिक्षा मिल सके। किताबों के लिए अलमारियों की व्यवस्था कंपोजिट ग्रांट से की जाएगी। - राकेश कुमार, बीएसए