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कैश खत्म होने पर भिड़े सर्विस मैनेजर और कैशियर
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
Updated Thu, 22 Dec 2016 12:09 AM IST
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कैश की कमी से जूझ रही बैंक शाखाओं को छोटे नोटों मिलने के साथ अधिकारियों ने भुगतान की जाने वाली धनराशि में भी बढ़ोत्तरी कर दी है। खातेदारों ने भी अधिकतम धनराशि निकालनी शुरू कर दी। एसबीआई की चौक घंटाघर ब्रांच में बुधवार दोपहर कैश खत्म होने पर खातेदारों ने हंगामा करना शुरू किया तो वहां के सर्विस मैनेजर और कैशियर में भी खासी नोकझोंक हो गई। सुबह दस बजे एसबीआई की इस शाखा में कुछ लोगों ने 24 हजार रुपये के विड्राल फॉर्म आगे बढ़ाए। चूंकि, उस वक्त बैंकिंग शुरू हो पाई थी और कैश भी पर्याप्त था। इसलिए कैशियर ने उनका भुगतान कर दिया। फिर लाइन में लगे बाकी लोगों ने भी अधिक रकम वाले विड्रॉल फॉर्म भरकर जमा करने शुरू कर दिए। नतीजा यह हुआ कि लगातार भुगतान से बैंक में नकदी खत्म हो गई। दोपहर एक बजे के बाद नो कैश की स्थिति पर खातेदारों ने हंगामा काटना शुरू कर दिया। शाखा प्रबंधक उस वक्त कैश का प्रबंध करने के लिए एक अन्य बैंक शाखा पर गए थे। लिहाजा खातेदारों ने वहां मौजूद सर्विस मैनेजर पर सवालों की झड़ी लगा दी।
सर्विस मैनेजर ने कैश की कमी के बावजूद 24-24 हजार रुपये के विड्राल स्वीकृत किए जाने पर सख्त तेवर दिखाए तो उनकी कैशियर से नोकझोंक हो गई। हालांकि, कुछ देर बाद शाखा प्रबंधक अपूर्व गुप्ता अतिरिक्त कैश लेकर पहुंचे और भुगतान की रुकी हुई प्रक्र्रिया फिर से शुरू कराई। बैंक अधिकारियोें का कहना है कि दो हजार और पांच सौ के नए नोटों की चेस्ट में वापसी के साथ भुगतान की धनराशि बढ़ाने का लोग गलत फायदा उठा रहे हैं। जिनकी दस हजार रुपये से तात्कालिक जरूरतें पूरी हो सकती हैं, वे भी 24 हजार रुपये मांग रहे हैं। एसबीआई की टाउनहाल और बॉब की गोविंदगंज मेन ब्रांच समेत इंडियन बैंक की आंख अस्पताल के पास स्थित शाखा, इलाहाबाद बैंक की गोविंदगंज ब्रांच, सदर बाजार की यूनियन बैंक, बॉब की मंडी चौक आदि बैंक शाखाओं मेें कैश की उपलब्धता से शाम तक भुगतान काउंटर चालू रहे।
बचत खाता से व्यापारी कर रहे कारोबार
नोटबंदी के बाद प्रचलन से बाहर हो चुके पांच सौ के पुराने नोट खपाने के लिए व्यापारी वर्ग द्वारा बैंक प्रबंधकों की साठगांठ से बोगस करंट खाते खोले जाने के मामले कई जनपदों में पकड़े जा चुके हैं, लेकिन जिले में ऐसा एक मामला एसबीआई की चौक घंटाघर ब्रांच में बुधवार को प्रकाश में आया। एक बचत खाता धारक ने आरटीजीएस के माध्यम से एक फर्म को पांच लाख रुपये का भुगतान करने के लिए चेक जारी किया। जांच करने पर सर्विस मैनेजर ने पाया कि आठ नवंबर को नोटबंदी लागू होने के बाद खाताधारक के बचत खाता में नौ लाख रुपये की धनराशि जमा हुई। अब उसी खाते से एक अन्य फर्म को पांच लाख रुपये ट्रांसफर किए जा रहे हैं। सर्विस मैनेजर ने खाताधारक को तलब किया तो उसने सफाई दी कि उनके बचत खाते से जिस फर्म को धनराशि दी जा रही है, वह उनकी पत्नी के नाम है। बैंक अधिकारी मामले की पड़ताल करने में जुटे हैं।
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पुराने नोट जमा करने को कम पड़े फॉर्म-60
आरबीआई के निर्देशानुसार जो लोग पांच हजार रुपये से अधिक से पांच सौ वाले पुराने नोट बैंक खातों में जमा रहे हैं, उन्हेें अब तक यह धानराशि जमा नहीं कराने का स्पष्टीकरण देने के साथ पेनकार्ड की फोटोकॉपी भी देनी अनिवार्य है। जो खातेदार अभी तक पेनकार्ड नहीं बनवा सके हैं, उनसे जमा होने वाले नोटों के नंबर और स्पष्टीकरण के साथ फॉर्म-60 प्रपत्र भी भरवाया जा रहा है। पुराने नोट जमा करने वाले अधिकांश लोगों के पास पैन कार्ड नहीं होने पर फॉर्म-60 की बुधवार को इतनी मांग बढ़ी कि कई बैंक शाखाओं में उनकी कमी हो गई और ग्राहक इधर-उधर भटकते दिखे।
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सर्विस मैनेजर ने कैश की कमी के बावजूद 24-24 हजार रुपये के विड्राल स्वीकृत किए जाने पर सख्त तेवर दिखाए तो उनकी कैशियर से नोकझोंक हो गई। हालांकि, कुछ देर बाद शाखा प्रबंधक अपूर्व गुप्ता अतिरिक्त कैश लेकर पहुंचे और भुगतान की रुकी हुई प्रक्र्रिया फिर से शुरू कराई। बैंक अधिकारियोें का कहना है कि दो हजार और पांच सौ के नए नोटों की चेस्ट में वापसी के साथ भुगतान की धनराशि बढ़ाने का लोग गलत फायदा उठा रहे हैं। जिनकी दस हजार रुपये से तात्कालिक जरूरतें पूरी हो सकती हैं, वे भी 24 हजार रुपये मांग रहे हैं। एसबीआई की टाउनहाल और बॉब की गोविंदगंज मेन ब्रांच समेत इंडियन बैंक की आंख अस्पताल के पास स्थित शाखा, इलाहाबाद बैंक की गोविंदगंज ब्रांच, सदर बाजार की यूनियन बैंक, बॉब की मंडी चौक आदि बैंक शाखाओं मेें कैश की उपलब्धता से शाम तक भुगतान काउंटर चालू रहे।
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बचत खाता से व्यापारी कर रहे कारोबार
नोटबंदी के बाद प्रचलन से बाहर हो चुके पांच सौ के पुराने नोट खपाने के लिए व्यापारी वर्ग द्वारा बैंक प्रबंधकों की साठगांठ से बोगस करंट खाते खोले जाने के मामले कई जनपदों में पकड़े जा चुके हैं, लेकिन जिले में ऐसा एक मामला एसबीआई की चौक घंटाघर ब्रांच में बुधवार को प्रकाश में आया। एक बचत खाता धारक ने आरटीजीएस के माध्यम से एक फर्म को पांच लाख रुपये का भुगतान करने के लिए चेक जारी किया। जांच करने पर सर्विस मैनेजर ने पाया कि आठ नवंबर को नोटबंदी लागू होने के बाद खाताधारक के बचत खाता में नौ लाख रुपये की धनराशि जमा हुई। अब उसी खाते से एक अन्य फर्म को पांच लाख रुपये ट्रांसफर किए जा रहे हैं। सर्विस मैनेजर ने खाताधारक को तलब किया तो उसने सफाई दी कि उनके बचत खाते से जिस फर्म को धनराशि दी जा रही है, वह उनकी पत्नी के नाम है। बैंक अधिकारी मामले की पड़ताल करने में जुटे हैं।
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पुराने नोट जमा करने को कम पड़े फॉर्म-60
आरबीआई के निर्देशानुसार जो लोग पांच हजार रुपये से अधिक से पांच सौ वाले पुराने नोट बैंक खातों में जमा रहे हैं, उन्हेें अब तक यह धानराशि जमा नहीं कराने का स्पष्टीकरण देने के साथ पेनकार्ड की फोटोकॉपी भी देनी अनिवार्य है। जो खातेदार अभी तक पेनकार्ड नहीं बनवा सके हैं, उनसे जमा होने वाले नोटों के नंबर और स्पष्टीकरण के साथ फॉर्म-60 प्रपत्र भी भरवाया जा रहा है। पुराने नोट जमा करने वाले अधिकांश लोगों के पास पैन कार्ड नहीं होने पर फॉर्म-60 की बुधवार को इतनी मांग बढ़ी कि कई बैंक शाखाओं में उनकी कमी हो गई और ग्राहक इधर-उधर भटकते दिखे।