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Shahjahanpur News: मंजिल पर पहुंचाने वाली बसें बेबस
Fri, 20 Feb 2026 11:30 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Fri, 20 Feb 2026 11:30 PM IST
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बस की इंजन के आगे लगी बोरी व रोकने के लिए लगा टेप। संवाद
शाहजहांपुर। सर्दी के बाद होली पर परिवहन निगम यात्रियों को बेहतर सुविधा देने का दावा कर रहा है, लेकिन तस्वीर बिल्कुल विपरीत है। बसें धूल से पटी पड़ी हैं। इमरजेंसी खिड़की तक जाम है। कुछ बसों में शीशे तक नहीं हैं। बसों के हुक तक गायब हैं। यह स्थिति शुक्रवार को पड़ताल के दौरान सामने आई।
शाहजहांपुर डिपो के बेड़े से 251 बसों का संचालन होता है। इसमें 74 अनुबंधित बसें शामिल हैं। डग्गामार वाहनों की वजह से आमतौर पर राजस्व के लक्ष्य से दूर रहने वाले परिवहन निगम को होली से काफी उम्मीद है। यात्रियों के घर आने से निगम की झोली भर जाती है। अफसरों ने होली के लिए बसों के संचालन का खाका भी तैयार कर लिया लेकिन, बसों की हालत दयनीय है।
बरेली जाने वाली बस के आगे इंजन के पास धूल-मिट्टी रोकने के लिए बोरी लगी मिली। उसे रोकने के लिए टेप का उपयोग किया था। बस ट्रिप पर जाने को तैयार थी, लेकिन पायदान पर कूड़ा-करकट पड़ा था। सीटें भी धूल से पटी मिली। इस पर बैठने से यात्रियों के कपड़े खराब हो जाते हैं। इसी बस की इमरजेंसी खिड़की तक जाम थी। एक अन्य बस में चालक की सीट के पास तारों का जाल बिछा था। तारों को कवर्ड नहीं किया गया। इससे शाॅर्ट सर्किट होने से आग लगने का खतरा है। इसी बस में अग्निशमन यंत्र लगा था, लेकिन आग लगने पर उसे निकालना दूभर है। बस का पायदान भी नीचे की ओर धंसने लगा है।
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बसों में ढोया जा रहा सामान
-परिवहन निगम के चालक-परिचालक निगम को चपत लगा रहे हैं। वे बसों से सामान को ढो रहे हैं। बसों से ढोए जाने वाले सामानों की जांच तक नहीं की जाती है। बिना जानकारी किए सामान को बस में रखवा लेते हैं। शुक्रवार को सीतापुर रूट की बस पर चालक ने बड़े नग को रखवा लिया। 100 रुपये मांगने पर 80 रुपये नकद व 20 रुपये ऑनलाइन लिए गए। इसी तरह अन्य बसों में भी बिना जांच के सामान ले जाया जा रहा है।
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बसों की खिड़की टूटी, बांधकर चलाया जा रहा काम
-निगम की बसों की खिड़कियों के हालत काफी ज्यादा खराब है। अधिकतर बसों की खिड़की में हुक नहीं हैं। इसके चलते इन बसों को बंद करना मुश्किल हैं। कुछ बसों के बीच के शीशे ही गायब हैं। अब भी सुबह-शाम ठंड पड़ रही है। गर्मियों में गर्म हवा के थपेड़े सीधे यात्रियों के चेहरे को झुलसाएंगे। वहीं दूसरी ओर अधिकारी सभी बसें सही होने का दावा कर रहे हैं।
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बसों से वाइपर भी गायब
-परिवहन निगम की स्थानीय मार्ग पर चलने वालीं बसों की स्थिति काफी ज्यादा खराब है। बसों के शीशे बंद नहीं होने के साथ ही वाइपर भी नहीं लगे हैं। इसी तरह प्राथमिक उपचार के इंतजाम भी नहीं हैं। अधिकतर पुरानी बसों में फर्स्ट एड बॉक्स की पेटी तो लगी है, लेकिन उसमें दवा नहीं है। ऐसे में किसी यात्री को चोट लगने पर उपचार तक की व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा कई बसों से अग्निशमन यंत्र भी गायब हैं।
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-होली को लेकर तैयारी चल रही है। अधिकतर बसों की व्यवस्था ठीक है। जहां कोई कमी है, उसे दिखवाकर दुरुस्त कराया जाएगा। सुखद और सुरक्षित सफर ही हमारी प्राथमिकता है।
- अरुण कुमार, एआरएम
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शाहजहांपुर डिपो के बेड़े से 251 बसों का संचालन होता है। इसमें 74 अनुबंधित बसें शामिल हैं। डग्गामार वाहनों की वजह से आमतौर पर राजस्व के लक्ष्य से दूर रहने वाले परिवहन निगम को होली से काफी उम्मीद है। यात्रियों के घर आने से निगम की झोली भर जाती है। अफसरों ने होली के लिए बसों के संचालन का खाका भी तैयार कर लिया लेकिन, बसों की हालत दयनीय है।
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बरेली जाने वाली बस के आगे इंजन के पास धूल-मिट्टी रोकने के लिए बोरी लगी मिली। उसे रोकने के लिए टेप का उपयोग किया था। बस ट्रिप पर जाने को तैयार थी, लेकिन पायदान पर कूड़ा-करकट पड़ा था। सीटें भी धूल से पटी मिली। इस पर बैठने से यात्रियों के कपड़े खराब हो जाते हैं। इसी बस की इमरजेंसी खिड़की तक जाम थी। एक अन्य बस में चालक की सीट के पास तारों का जाल बिछा था। तारों को कवर्ड नहीं किया गया। इससे शाॅर्ट सर्किट होने से आग लगने का खतरा है। इसी बस में अग्निशमन यंत्र लगा था, लेकिन आग लगने पर उसे निकालना दूभर है। बस का पायदान भी नीचे की ओर धंसने लगा है।
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बसों में ढोया जा रहा सामान
-परिवहन निगम के चालक-परिचालक निगम को चपत लगा रहे हैं। वे बसों से सामान को ढो रहे हैं। बसों से ढोए जाने वाले सामानों की जांच तक नहीं की जाती है। बिना जानकारी किए सामान को बस में रखवा लेते हैं। शुक्रवार को सीतापुर रूट की बस पर चालक ने बड़े नग को रखवा लिया। 100 रुपये मांगने पर 80 रुपये नकद व 20 रुपये ऑनलाइन लिए गए। इसी तरह अन्य बसों में भी बिना जांच के सामान ले जाया जा रहा है।
बसों की खिड़की टूटी, बांधकर चलाया जा रहा काम
-निगम की बसों की खिड़कियों के हालत काफी ज्यादा खराब है। अधिकतर बसों की खिड़की में हुक नहीं हैं। इसके चलते इन बसों को बंद करना मुश्किल हैं। कुछ बसों के बीच के शीशे ही गायब हैं। अब भी सुबह-शाम ठंड पड़ रही है। गर्मियों में गर्म हवा के थपेड़े सीधे यात्रियों के चेहरे को झुलसाएंगे। वहीं दूसरी ओर अधिकारी सभी बसें सही होने का दावा कर रहे हैं।
बसों से वाइपर भी गायब
-परिवहन निगम की स्थानीय मार्ग पर चलने वालीं बसों की स्थिति काफी ज्यादा खराब है। बसों के शीशे बंद नहीं होने के साथ ही वाइपर भी नहीं लगे हैं। इसी तरह प्राथमिक उपचार के इंतजाम भी नहीं हैं। अधिकतर पुरानी बसों में फर्स्ट एड बॉक्स की पेटी तो लगी है, लेकिन उसमें दवा नहीं है। ऐसे में किसी यात्री को चोट लगने पर उपचार तक की व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा कई बसों से अग्निशमन यंत्र भी गायब हैं।
-होली को लेकर तैयारी चल रही है। अधिकतर बसों की व्यवस्था ठीक है। जहां कोई कमी है, उसे दिखवाकर दुरुस्त कराया जाएगा। सुखद और सुरक्षित सफर ही हमारी प्राथमिकता है।
- अरुण कुमार, एआरएम

बस की इंजन के आगे लगी बोरी व रोकने के लिए लगा टेप। संवाद

बस की इंजन के आगे लगी बोरी व रोकने के लिए लगा टेप। संवाद

बस की इंजन के आगे लगी बोरी व रोकने के लिए लगा टेप। संवाद

बस की इंजन के आगे लगी बोरी व रोकने के लिए लगा टेप। संवाद