{"_id":"5e9c824c8ebc3e72bc034f69","slug":"buisnessman-againts-e-commerce-shahjahanpur-news-bly4031810120","type":"story","status":"publish","title_hn":"ई-कॉमर्स कंपनियों के ऑनलाइन व्यापार पर रोक महज छलावा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ई-कॉमर्स कंपनियों के ऑनलाइन व्यापार पर रोक महज छलावा
विज्ञापन
शाहजहांपुर। लॉकडाउन के दूसरे चरण में केंद्र सरकार ने उद्योग क्षेत्र के अतिरिक्त ई-कॉमर्स कंपनियों को सोमवार से ऑनलाइन व्यापार शुरू करने की दी गई अनुमति व्यापार संगठनों के कड़े विरोध को देखते आंशिक तौर पर वापस ले ली है, लेकिन कारोबार जगत से जुड़े लोग सरकार के इस कदम को महज छलावा मानते हैं। उन्होंने ई-कॉमर्स कंपनियों पर केवल मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को अपर्याप्त और खुदरा व्यापारियों के हितों के विपरीत बताया है।
राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन ने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर पूछा है कि एक माह से दुकानें बंद होने केे कारण जिन व्यापारियों का कारोबार ठप है, उन्हें सरकार क्या सहूलियतें दे रही हैं। ऑनलाइन ट्रेडिंग में आंशिक परिवर्तन से जिलाध्यक्ष पंकज वर्मा सराफ और महामंत्री रमेश चंद्र शुक्ला समेत व्यापार संगठन सरकार के इस कदम से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। वहीं, जन उद्योग व्यापार संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष/जिलाध्यक्ष किशोर कुमार गुप्ता ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि सरकार ने 14 अप्रैल तक प्रस्तावित लॉकडाउन को बढ़ाकर तीन मई तक प्रभावी कर दिया। कर्मचारियों को पूरी तनख्वाह देने पर जोर दिया, लेकिन यह नहीं बताया कि दुकानें बंद होने से घर बैठकर अपनी जमा-पूंजी खा रहे देश के छोटे एवं मध्यम व्यापारियों के लिए कौन सी प्लानिंग की है। सरकार यह भी सोचे कि बंदी लागू होने पर व्यापारी कैसे जिंदा रहेंगे। उन्होंने महामारी में कोई सहयोग नहीं करने वाली कंपनियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने, बिजली बिलों, संपत्ति कर भुगतान में 50 प्रतिशत छूट देने, छह माह तक सभी ब्याज माफ करने के साथ किराना, दवा, फल, सब्जी विक्रे ताओं को कर्मयोगी सूची में शामिल कर उन्हें 50 लाख रुपये का बीमा कवच प्रदान किए जाने का अनुरोध किया है।
व्यापारियों की बात
ई-कॉमर्स कंपनियों के ऑनलाइन कारोबार पर मामूली प्रतिबंध लगाकर सरकार ने खुदरा व्यापारियों की मांग मानने का केवल नाटक किया है। प्रशासन की अनुमति से जिन वस्तुओं की दुकानें खुल रही हैं, ई-कॉमर्स कंपनियां उनकी आपूर्ति करेंगी तो शहर में कल से दुकानों के शटर गिरने शुरू हो जाएंगे। रिटेल सेक्टर को धोखा देने के बजाय सरकार उसकी बेहतरी के बारे मेें सोचेे।
विज्ञापन
- मनीष गुप्ता, जिलाध्यक्ष, प्रतिनिधि उद्योग व्यापार मंडल
दवा, किराना सामान, फल, सब्जी, दूध जैसी रोजमर्रा की घरेलू जरूरत वाली चीजों की इस समय ज्यादा जरूरत है और यह सभी वस्तुएं जिले के व्यापारी उपलब्ध कराने में जुटे हैं। बड़ी कंपनियों को इन चीजों के कारोबार की छूट दिए जाने से खुदरा व्यापारियों की रीढ़ टूट जाएगी क्योंकि उनके गोदामों और दुकानों में भरा किराना सामान और खाद्यान्न एक्सपायरी होकर नष्ट हो जाएगा।
-उमेश चंद्र पाठक, जिलाध्यक्ष, पश्चिमी उप्र उद्योग व्यापार मंडल
विज्ञापन
राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन ने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर पूछा है कि एक माह से दुकानें बंद होने केे कारण जिन व्यापारियों का कारोबार ठप है, उन्हें सरकार क्या सहूलियतें दे रही हैं। ऑनलाइन ट्रेडिंग में आंशिक परिवर्तन से जिलाध्यक्ष पंकज वर्मा सराफ और महामंत्री रमेश चंद्र शुक्ला समेत व्यापार संगठन सरकार के इस कदम से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। वहीं, जन उद्योग व्यापार संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष/जिलाध्यक्ष किशोर कुमार गुप्ता ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि सरकार ने 14 अप्रैल तक प्रस्तावित लॉकडाउन को बढ़ाकर तीन मई तक प्रभावी कर दिया। कर्मचारियों को पूरी तनख्वाह देने पर जोर दिया, लेकिन यह नहीं बताया कि दुकानें बंद होने से घर बैठकर अपनी जमा-पूंजी खा रहे देश के छोटे एवं मध्यम व्यापारियों के लिए कौन सी प्लानिंग की है। सरकार यह भी सोचे कि बंदी लागू होने पर व्यापारी कैसे जिंदा रहेंगे। उन्होंने महामारी में कोई सहयोग नहीं करने वाली कंपनियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने, बिजली बिलों, संपत्ति कर भुगतान में 50 प्रतिशत छूट देने, छह माह तक सभी ब्याज माफ करने के साथ किराना, दवा, फल, सब्जी विक्रे ताओं को कर्मयोगी सूची में शामिल कर उन्हें 50 लाख रुपये का बीमा कवच प्रदान किए जाने का अनुरोध किया है।
विज्ञापन
व्यापारियों की बात
ई-कॉमर्स कंपनियों के ऑनलाइन कारोबार पर मामूली प्रतिबंध लगाकर सरकार ने खुदरा व्यापारियों की मांग मानने का केवल नाटक किया है। प्रशासन की अनुमति से जिन वस्तुओं की दुकानें खुल रही हैं, ई-कॉमर्स कंपनियां उनकी आपूर्ति करेंगी तो शहर में कल से दुकानों के शटर गिरने शुरू हो जाएंगे। रिटेल सेक्टर को धोखा देने के बजाय सरकार उसकी बेहतरी के बारे मेें सोचेे।
विज्ञापन
- मनीष गुप्ता, जिलाध्यक्ष, प्रतिनिधि उद्योग व्यापार मंडल
दवा, किराना सामान, फल, सब्जी, दूध जैसी रोजमर्रा की घरेलू जरूरत वाली चीजों की इस समय ज्यादा जरूरत है और यह सभी वस्तुएं जिले के व्यापारी उपलब्ध कराने में जुटे हैं। बड़ी कंपनियों को इन चीजों के कारोबार की छूट दिए जाने से खुदरा व्यापारियों की रीढ़ टूट जाएगी क्योंकि उनके गोदामों और दुकानों में भरा किराना सामान और खाद्यान्न एक्सपायरी होकर नष्ट हो जाएगा।
-उमेश चंद्र पाठक, जिलाध्यक्ष, पश्चिमी उप्र उद्योग व्यापार मंडल