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भवन निर्माण में नवीनता व प्राचीनता का करें समन्वय
शाहजहांपुर।
Updated Sun, 27 Dec 2015 11:32 PM IST
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आरके एसोसिएट्स के डायरेक्टर इंजीनियर आरके अग्रवाल ने कहा है कि समय के साथ भवन निर्माण की शैलियां बदलती रही हैं, लेकिन इस क्षेत्र से जुड़े अभियंताओं और मान चित्रकारों को वास्तुकला में नवीनता के साथ प्राचीनता का समन्वय करना चाहिए। उन्होंने नोएडा की एमिटी यूनिवर्सिटी में आयोजित काउंसिल ऑफ आर्किटैक्ट्स में यह सुझाव दिया।
आर्किटैक्ट काउंसिल ने सेमिनार मेें भाग लेने के लिए विभिन्न राज्यों से तमाम इंजीनियर आमंत्रित किए थे। इसी कड़ी में आयोजकों ने इंजीनियर अग्रवाल को रोल ऑफ माडर्न आर्किटैक्ट्स विषय पर व्याख्यान देने को निमंत्रित किया था। उन्होंने कहा कि किसी भी कांस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट पर काम शुरू करते वक्त यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि निर्माण कार्य माडर्न लुक के साथ एथनिक टच लिए हुए दिखे।
इंडियन इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स के फेलो अग्रवाल ने कहा कि प्राचीन मुगल और यूरोपियन वास्तु शैली में भव्यता के साथ दैनिक जीवन में आराम से जुड़ी सुविधाएं भी निहित हैं। उन्होंने घरों में बुजुर्गों के लिए ऐसे कमरे डिजाइन किए जाने पर जोर दिया जिनमें वाश, बाथ, किचन आदि सुविधाएं भी निहित हों। उन्होंने नोएडा से लौटकर बताया कि उद्योग मंत्रालय के निमंत्रण पर उन्होंने नई दिल्ली में उद्योग परिसंघ द्वारा आयोजित फ्यूचर बिल्डिंग ऑफ इंडिया कांफ्रेंस में भी उन्होंने वर्तमान इमारतों को कालजयी पहचान दिलाने के लिए उनमें आधुनिकता के साथ प्राचीनता का समावेश करने पर जोर दिया।
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आर्किटैक्ट काउंसिल ने सेमिनार मेें भाग लेने के लिए विभिन्न राज्यों से तमाम इंजीनियर आमंत्रित किए थे। इसी कड़ी में आयोजकों ने इंजीनियर अग्रवाल को रोल ऑफ माडर्न आर्किटैक्ट्स विषय पर व्याख्यान देने को निमंत्रित किया था। उन्होंने कहा कि किसी भी कांस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट पर काम शुरू करते वक्त यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि निर्माण कार्य माडर्न लुक के साथ एथनिक टच लिए हुए दिखे।
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इंडियन इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स के फेलो अग्रवाल ने कहा कि प्राचीन मुगल और यूरोपियन वास्तु शैली में भव्यता के साथ दैनिक जीवन में आराम से जुड़ी सुविधाएं भी निहित हैं। उन्होंने घरों में बुजुर्गों के लिए ऐसे कमरे डिजाइन किए जाने पर जोर दिया जिनमें वाश, बाथ, किचन आदि सुविधाएं भी निहित हों। उन्होंने नोएडा से लौटकर बताया कि उद्योग मंत्रालय के निमंत्रण पर उन्होंने नई दिल्ली में उद्योग परिसंघ द्वारा आयोजित फ्यूचर बिल्डिंग ऑफ इंडिया कांफ्रेंस में भी उन्होंने वर्तमान इमारतों को कालजयी पहचान दिलाने के लिए उनमें आधुनिकता के साथ प्राचीनता का समावेश करने पर जोर दिया।
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