UP: शाहजहांपुर में जीएसटी टीम का छापा, 25 करोड़ रुपये की कर चोरी पकड़ी; बोगस फर्म बनाकर किया फर्जीवाड़ा
शाहजहांपुर में बोगस फर्म से फर्जी बिल बेचकर करोड़ों रुपये की कर चोरी का मामला सामने आया है। जीएसटी टीम ने शनिवार को यहां एक फर्म पर छापा मारा। जांच के बाद कर चोरी का खुलासा किया।
विस्तार
शनिवार को बरेली के जीएसटी की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन ब्रांच के डिप्टी कमिश्नर अनिरुद्ध सिंह, असिस्टेंट कमिश्नर वेदप्रकाश शुक्ला और विकास मिश्रा के साथ कांट के मरैना गांव पहुंचे। यहां पर सूरजपाल सिंह के नाम पंजीकृत फर्म सर्वश्री महादेव इंटरप्राइजेज की जांच की।
अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि जांच में सामने आया है कि व्यापारी कोई व्यापार नहीं करता है। केवल बिल बेचने का काम करता है। इन फर्जी बिलों के माध्यम से दिल्ली की फर्में माल एक्सपोर्ट दिखाकर आईटीसी रिफंड कराती हैं। सूरजपाल ने 15 अप्रैल को सिक्योरिटी और आईटी फर्म का पंजीकरण कराया था। डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि इस मामले में कांट थाने में तहरीर दी जाएगी।
कार्रवाई से बचने के लिए आईटी सर्विस के नाम पर बनाई बोगस फर्म
कर चोरी करने वाला गिरोह आईटी सर्विस के नाम पर बोगस फर्म बनाकर जीएसटी अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश कर रहा था। आईटी सर्विस उपलब्ध कराने के लिए ट्रांसपोर्टेशन आदि के ई-वे बिल आदि की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसे में करोड़ों रुपये का व्यापार केवल बिल बनाकर दिखा दिया जाता है। माना जा रहा है कि कर चोरी करने में कई लोग शामिल हैं।
बरेली के जीएसटी की एसआईबी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन ब्रांच) के डिप्टी कमिश्नर अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि कांट के मरैना गांव में सूरजपाल सिंह के नाम पंजीकृत फर्म सर्वश्री महादेव इंटरप्राइजेज की जांच में सामने आया कि व्यापारी कोई व्यापार नहीं करता है। 2021 में उसने बिल्डिंग मैटीरियल की फर्म का रजिस्ट्रेशन कराया था। 2024 में फर्म बंद हो गई। इसके बाद 2025 में उसने सर्वश्री महादेव इंटरप्राइजेज नाम से फर्म पंजीकृत करा ली।
सूरजपाल की उम्र करीब 65 वर्ष है और वह बीमार रहते हैं। उनके पास एक शटर लगी दुकान है। सूरजपाल ने जीएसटी टीम को बताया कि उन्हें जानकारी नहीं है कि उनके जीएसटी नंबर से 150 करोड़ रुपये के बिल बेचे गए हैं। उनका एक बेटा और दामाद दिल्ली में रहते हैं। बेटा वकालत की पढ़ाई कर रहा है और दामाद नौकरी करता है। वे ही फर्म का संचालन करते हैं। उनके आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि फर्म का पंजीकरण सिक्योरिटी और आईटी सर्विसेज के लिए कराया गया था। वर्तमान में बोगस फर्म बनाकर करने वाले आईटी से जुड़े साफ्टवेयर आदि की खरीद-फरोख्त दिखाते हैं।
हवाला के तहत लेनदेन की भी आशंका
जीएसटी अधिकारियों का मानना है कि दिल्ली की बोगस फर्म सामान को एक्सपोर्ट करना दिखाती हैं और आईटीसी रिफंड करा लेती हैं। इसके तार हवाला कारोबार से जुड़े हो सकते हैं। जीएसटी विभाग बोगस फर्मों की पूरी जांच कर रहा है।
प्रतिशत का खेल
डिप्टी कमिश्नर अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि करोड़ों की कर चोरी के लिए पूरा नेटवर्क तैयार किया जाता है। अधिकतर मामलों में सामने आया है कि कागजी खरीद-फरोख्त करने वालीं फर्में कर चोरी के रुपये में प्रतिशत तय कर लेतीं हैं। बोगस फर्मों की पूरी चेन तैयार की जाती है। कमीशन पर बिल बेचे जाते हैं। इसमें असली खिलाड़ी पूरा खेल करते हैं जबकि बाकी सिर्फ दो से पांच प्रतिशत के लालच में कर चोरी के धंधे में शामिल हो जाते हैं।