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रक्त का कोई दूसरा विकल्प नहीं होता, रक्तदान कर जरूरतमंदों की बचाएं जान
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डाक्टर शबाहत हुसैन । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। रक्त की आवश्यकता पड़ने पर उसका कोई दूसरा विकल्प नहीं होता है। रक्त देकर ही जरूरतमंद की जान बचाई जा सकती है। कुछ समय से देखा गया है कि स्वैच्छिक रक्तदाताओं की संख्या में काफी कमी आई है। दूसरी तरफ ऐसे भी लोग हैं जो कई साल से लगने वाले शिविरों और आवश्यकता पड़ने पर हर समय रक्तदान करने के लिए तैयार रहते हैं।
कुछ ऐसे हैं जो रक्तदान के समय कोरोना काल को मजबूरी बनाकर रक्तदान करने से पैर खींच लेते हैं। जबकि जो लोग रक्तदान के लिए हर समय तैयार रहते हैं उनके अनुसार जब किसी को रक्तदान करते हैं। उस रक्त से किसी की जान बच जाती है। तब जो अहसास होता है वह दिल को काफी सुकून देता है।
अरशी अंसारी कई बार जरूरतमंदों को रक्तदान कर चुकी हैं। अरशी एक अहसास वेलफेयर सोसाइटी की सदस्य हैं। इसमें करीब 25-30 सदस्य सक्रिय रहते हैं। जरूरतमंद को रक्त की आवश्यकता पड़ने पर सोसाइटी के सदस्य हर समय तैयार रहते हैं। ऐसे कई लोग हैं, जिनकी सोसाइटी के सदस्यों ने रक्तदान कर उनकी जान बचाई है। इस सोसायटी के सदस्य जरूरत पड़ने पर बगैर दिन-रात देखे रक्तदान के लिए हाजिर रहते हैं।
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डॉक्टर अमित सिंह का ब्लड ग्रुप बी-निगेटिव है। निगेटिव ग्रुप का रक्त काफी दुर्लभ होता है। डॉ. अमित बताते हैं कि पिछले करीब 19 साल से लगातार रक्तदान कर रहे हैँ । एक साल में दो बार करते हैँ लेकिन जरूरत पड़ने पर तीन-चार बार रक्तदान करते हैँ । कई बार उन्होनें निगेटिव ग्रुप ब्लड की आवश्यकता वालों की लखनऊ जाकर मदद की है। अपना रक्तदान कर जब किसी की जान बचती है तो बहुत सुकून मिलता है। क्योंकि रक्त का कोई दूसरा विकल्प नहीं होता है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. शबाहत हुसैन अपने जन्मदिन पर रक्तदान जरूर करते हैं। ब्लड बैँक प्रभारी बनने के बाद उन्होंने चार बार रक्तदान किया। इससे पहले वह लखनऊ के केजीएमसी में एमडी की पढ़ाई कर रहे थे। तब ब्लड कैंसर पीड़ित बच्चे को ब्लड दिया था। रक्तदान करने से मेडिकल से जुड़े कई फायदे तो हैँ ही साथ में रक्तदान कर जो कार्ड मिलता है। उस कार्ड को दिखाकर किसी समय भी जरूरतमंद को तत्काल मदद मिल जाती है। एक बार रक्तदान करने के तीन महीने के बाद फिर से रक्तदान किया जा सकता है ।
रक्तदान शिविर आज
शुक्रवार को विश्व रक्तदान दिवस है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से रक्तदान शिविर लगाया जाएगा। इसमें कोई भी व्यक्ति स्वेच्छा से रक्तदान कर दूसरों का जीवन बचा सकता है। कैंप सुबह दस बजे से आयोजित किया जाएगा।
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कुछ ऐसे हैं जो रक्तदान के समय कोरोना काल को मजबूरी बनाकर रक्तदान करने से पैर खींच लेते हैं। जबकि जो लोग रक्तदान के लिए हर समय तैयार रहते हैं उनके अनुसार जब किसी को रक्तदान करते हैं। उस रक्त से किसी की जान बच जाती है। तब जो अहसास होता है वह दिल को काफी सुकून देता है।
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अरशी अंसारी कई बार जरूरतमंदों को रक्तदान कर चुकी हैं। अरशी एक अहसास वेलफेयर सोसाइटी की सदस्य हैं। इसमें करीब 25-30 सदस्य सक्रिय रहते हैं। जरूरतमंद को रक्त की आवश्यकता पड़ने पर सोसाइटी के सदस्य हर समय तैयार रहते हैं। ऐसे कई लोग हैं, जिनकी सोसाइटी के सदस्यों ने रक्तदान कर उनकी जान बचाई है। इस सोसायटी के सदस्य जरूरत पड़ने पर बगैर दिन-रात देखे रक्तदान के लिए हाजिर रहते हैं।
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डॉक्टर अमित सिंह का ब्लड ग्रुप बी-निगेटिव है। निगेटिव ग्रुप का रक्त काफी दुर्लभ होता है। डॉ. अमित बताते हैं कि पिछले करीब 19 साल से लगातार रक्तदान कर रहे हैँ । एक साल में दो बार करते हैँ लेकिन जरूरत पड़ने पर तीन-चार बार रक्तदान करते हैँ । कई बार उन्होनें निगेटिव ग्रुप ब्लड की आवश्यकता वालों की लखनऊ जाकर मदद की है। अपना रक्तदान कर जब किसी की जान बचती है तो बहुत सुकून मिलता है। क्योंकि रक्त का कोई दूसरा विकल्प नहीं होता है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. शबाहत हुसैन अपने जन्मदिन पर रक्तदान जरूर करते हैं। ब्लड बैँक प्रभारी बनने के बाद उन्होंने चार बार रक्तदान किया। इससे पहले वह लखनऊ के केजीएमसी में एमडी की पढ़ाई कर रहे थे। तब ब्लड कैंसर पीड़ित बच्चे को ब्लड दिया था। रक्तदान करने से मेडिकल से जुड़े कई फायदे तो हैँ ही साथ में रक्तदान कर जो कार्ड मिलता है। उस कार्ड को दिखाकर किसी समय भी जरूरतमंद को तत्काल मदद मिल जाती है। एक बार रक्तदान करने के तीन महीने के बाद फिर से रक्तदान किया जा सकता है ।
रक्तदान शिविर आज
शुक्रवार को विश्व रक्तदान दिवस है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से रक्तदान शिविर लगाया जाएगा। इसमें कोई भी व्यक्ति स्वेच्छा से रक्तदान कर दूसरों का जीवन बचा सकता है। कैंप सुबह दस बजे से आयोजित किया जाएगा।

अहसास वेल्फेयर सोसायटी की सदस्य अरशी अंसारी। संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR

डाक्टर अमित सिंह । संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR