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रक्षाबंधन पर दो करोड़ की मिठाइयों का कारोबार
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शाहजहांपुर। शासन ने रविवार को बाजार खुलने की छूट दी तो बाजार में जबरदस्त उछाल आ गया। इस बार रक्षा बंधन पर लगभग दो करोड़ रुपये की मिठाइयां बिक गईं। मिठाई विक्रेताओं के अनुसार रविवार को बाजार खुलने की घोषणा तीन-चार दिन पहले हुई होती तो बिक्री का आंकड़ा 2.50 से तीन करोड़ तक पहुंच सकता था।
जनपद में मिठाइयों की लगभग एक हजार दुकानें हैं। ऐसे लगभग 150 मिठाई विक्रेता हैं, जिनका सालाना कारोबार 12 लाख रुपये से अधिक होने के कारण खाद्य सुरक्षा विभाग ने उन्हें लाइसेंस जारी किए हैं। इनके अलावा ऐसे अधिकांश मिठाई विक्रेता हैं, जिनका वार्षिक टर्नओवर 12 लाख रुपये से कम है, लेकिन त्योहारी सीजन मेें जमकर बिक्री करते हैं। होली, दिवाली से लेकर भाई दूज और रक्षाबंधन जैसे मौकों पर गली-मोहल्ले तक की दुकानों पर भी मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। रविवार को बंदी होने से मिठाई कारोबारी असमंजस में थे। रक्षाबंधन से दो दिन पहले सरकार ने रविवार को बंदी खत्म करने का एलान किया। इस कारण तमाम दुकानदार पर्याप्त मात्रा में मिठाई तैयार नहीं करा सके। इसलिए बाजारों में कई कंपनियों की ब्रांडेड सोन पापड़ी, डिब्बाबंद चमचम, रसगुल्ला आदि मिठाइयां खूब बिकीं।
रविवार को बाजार खोलने की अनुुमति देकर सरकार ने बड़ा मिठाई कारोबारियों का नुकसान होने से बचा लिया। दुकानें नहीं खुलतीं तो 50 फीसदी मिठाई रखी रह जाती, जिसे बाद में फेंकना पड़ सकता था। - पंकज गुप्ता, खिरनीबाग
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इस बार त्योहार पर मिठाई की बिक्री को लेकर दो दिन पहले तक दुविधा का माहौल बना रहा। इसीलिए इस बार मिठाई सीमित मात्रा में सिर्फ इतनी बनाई कि त्योहार में उसकी खपत हो जाए। इससे मिठाइयां जल्द खत्म हो गईं। - अंशु गुप्ता, पंखी चौराहा
रक्षाबंधन पर मिठाई की बिक्री पिछले वर्ष की अपेक्षा कम रही। दोपहर तक सारी मिठाई बिक जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मिठाई की दुकानें अधिक हो जाने से भी बिक्री प्रभावित हुई। -विनोद कुमार गुप्ता, तिलहर
इस बार रक्षाबंधन पर मिठाई की बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई। जिस हिसाब से माल बनाने की तैयारी की, उस अनुपात में ग्राहक नहीं मिले। पिछले वर्ष लॉकडाउन में रक्षाबंधन पर बिक्री ठीक रही थी। - सुरेंद्र राठौर, तिलहर
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जनपद में मिठाइयों की लगभग एक हजार दुकानें हैं। ऐसे लगभग 150 मिठाई विक्रेता हैं, जिनका सालाना कारोबार 12 लाख रुपये से अधिक होने के कारण खाद्य सुरक्षा विभाग ने उन्हें लाइसेंस जारी किए हैं। इनके अलावा ऐसे अधिकांश मिठाई विक्रेता हैं, जिनका वार्षिक टर्नओवर 12 लाख रुपये से कम है, लेकिन त्योहारी सीजन मेें जमकर बिक्री करते हैं। होली, दिवाली से लेकर भाई दूज और रक्षाबंधन जैसे मौकों पर गली-मोहल्ले तक की दुकानों पर भी मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। रविवार को बंदी होने से मिठाई कारोबारी असमंजस में थे। रक्षाबंधन से दो दिन पहले सरकार ने रविवार को बंदी खत्म करने का एलान किया। इस कारण तमाम दुकानदार पर्याप्त मात्रा में मिठाई तैयार नहीं करा सके। इसलिए बाजारों में कई कंपनियों की ब्रांडेड सोन पापड़ी, डिब्बाबंद चमचम, रसगुल्ला आदि मिठाइयां खूब बिकीं।
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रविवार को बाजार खोलने की अनुुमति देकर सरकार ने बड़ा मिठाई कारोबारियों का नुकसान होने से बचा लिया। दुकानें नहीं खुलतीं तो 50 फीसदी मिठाई रखी रह जाती, जिसे बाद में फेंकना पड़ सकता था। - पंकज गुप्ता, खिरनीबाग
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इस बार त्योहार पर मिठाई की बिक्री को लेकर दो दिन पहले तक दुविधा का माहौल बना रहा। इसीलिए इस बार मिठाई सीमित मात्रा में सिर्फ इतनी बनाई कि त्योहार में उसकी खपत हो जाए। इससे मिठाइयां जल्द खत्म हो गईं। - अंशु गुप्ता, पंखी चौराहा
रक्षाबंधन पर मिठाई की बिक्री पिछले वर्ष की अपेक्षा कम रही। दोपहर तक सारी मिठाई बिक जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मिठाई की दुकानें अधिक हो जाने से भी बिक्री प्रभावित हुई। -विनोद कुमार गुप्ता, तिलहर
इस बार रक्षाबंधन पर मिठाई की बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई। जिस हिसाब से माल बनाने की तैयारी की, उस अनुपात में ग्राहक नहीं मिले। पिछले वर्ष लॉकडाउन में रक्षाबंधन पर बिक्री ठीक रही थी। - सुरेंद्र राठौर, तिलहर