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भाकियू ने कलक्ट्रेट में किया प्रदर्शन
शाहजहांपुर, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 22 Mar 2017 12:00 AM IST
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प्रदशऱ्न
- फोटो : शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश
सामान्य धान से तीन गुना अधिक पानी से तैयार होने वाला साठा धान की खेती पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। इसके बाद भाकियू के शिष्टमंडल ने सिटी मजिस्ट्रेट विजय शंकर दुबे से मुलाकात कर उन्हें मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन दिया।
बता दें कि भाकियू के विभिन्न गुट साठा धान की खेती पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर पहले भी कई बार प्रदर्शन करके अफसरों को ज्ञापन दे चुके हैं। इस मांग का संज्ञान लेते हुए सीडीओ ने साठा धान की नर्सरी डालने वाले किसानों को नोटिस भी जारी किए, लेकिन इसी बीच, साठा के पक्षधर किसानों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की शरण लेकर वहां से प्रशासनिक रोक के विरुद्ध स्थगनादेश हासिल कर लिया। लिहाजा साठा की रोपाई पर रोक नहीं लग सकी। इसी के विरोध में भाकियू कार्यकर्ता सड़क पर फिर से उतरने को बाध्य हो गए। ज्ञापन में साठा को अप्राकृतिक फसल बताते हुए कहा गया है कि जून में कटने वाले साठा धान को कृषि विभाग कोई फसल नहीं मानता और न ही सरकार की ओर से इसकी खरीद की कोई व्यवस्था है। साठा के कारण जायद की दलहनी फसलों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। प्रदर्शन में रंजीत सिंह, शिशुपाल सिंह यादव, बालकराम वर्मा, रामचंद्र गंगवार, अखंड प्रताप सिंह, कुलदीप सिंह, उदयवीर सिंह, छुट्टन अंसारी, सुखवीर सिंह, राजवीर सिंह पाल आदि शामिल रहे।
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बता दें कि भाकियू के विभिन्न गुट साठा धान की खेती पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर पहले भी कई बार प्रदर्शन करके अफसरों को ज्ञापन दे चुके हैं। इस मांग का संज्ञान लेते हुए सीडीओ ने साठा धान की नर्सरी डालने वाले किसानों को नोटिस भी जारी किए, लेकिन इसी बीच, साठा के पक्षधर किसानों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की शरण लेकर वहां से प्रशासनिक रोक के विरुद्ध स्थगनादेश हासिल कर लिया। लिहाजा साठा की रोपाई पर रोक नहीं लग सकी। इसी के विरोध में भाकियू कार्यकर्ता सड़क पर फिर से उतरने को बाध्य हो गए। ज्ञापन में साठा को अप्राकृतिक फसल बताते हुए कहा गया है कि जून में कटने वाले साठा धान को कृषि विभाग कोई फसल नहीं मानता और न ही सरकार की ओर से इसकी खरीद की कोई व्यवस्था है। साठा के कारण जायद की दलहनी फसलों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। प्रदर्शन में रंजीत सिंह, शिशुपाल सिंह यादव, बालकराम वर्मा, रामचंद्र गंगवार, अखंड प्रताप सिंह, कुलदीप सिंह, उदयवीर सिंह, छुट्टन अंसारी, सुखवीर सिंह, राजवीर सिंह पाल आदि शामिल रहे।
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