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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   Bansar of Ganga dam Level stable, Ramganga reduced

भैंसार बांध पर गंगा का स्तर स्थिर, रामगंगा घटी

Sat, 18 Jul 2015 11:54 PM IST
शाहजहांपुर
शाहजहांपुर Updated Sat, 18 Jul 2015 11:54 PM IST
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पहाड़ और मैदानी क्षेत्रों में दो दिन से बारिश का दौर धीमा पड़ने के कारण उत्तराखंड और पश्चिम यूपी के बैराजों से पानी की अतिरिक्त निकासी भी कम हो गई है। जिले से होकर बहने वाली गंगा, रामगंगा, बहगुल आदि सभी नदियों पर इसका असर जलस्तर में कमी के तौर पर दिखने लगा है। शनिवार को कलान क्षेत्र के भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर पिछले 24 घंटे से 142.45 मीटर पर स्थिर पाया गया। सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष को मिली सूचनाओं के अनुसार नरौरा बैराज से गंगा में 35300 क्यूसेक और अन्य बैराजों से रामगंगा में 11488 क्यूसेक पानी की निकासी हुई। शहर में गर्रा और खन्नौत का जल स्तर भी लगातार कम हो रहा है।
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खास यह है कि बैराजों से शनिवार को सुबह रिलीज हुए पानी की मात्रा एक दिन पहले की तुलना में कुछ अधिक होने के बावजूद पानी से चढ़ी नदियां तेजी से अपने पेटे की ओर जा रही हैं। सिंचाई विभाग के सूत्रों ने बताया कि पांच दिन पहले हुई बरसात से बैराजों के ओवर फ्लो होने की नौबत आ गई थी, लेकिन अब पानी घट जाने से उसकी निकासी भी सामान्य स्थिति में आ गई है। नदियों के जल स्तर में भी इसलिए कमी आ गई है।
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बाढ़ नियंत्रण कक्ष से तार बाबू गिरिजा किशोर मिश्र ने बताया कि रामगंगा में रामनगर, हरेली, खो, किच्छा आदि बैराजों से बीते दिन की तुलना में शनिवार को पांच हजार क्यूसेक पानी कम बहाया गया। इसलिए बरेली के चौबारी से लेकर फर्रुखाबाद के घटिया घाट तक नदी का बहाव सामान्य स्थिति में आने लगा है। उन्होंने बताया कि ड्यूनी डाम से शनिवार को पानी रिलीज नहीं होने से गर्रा में पानी और घटने का संकेत है। फिलहाल गर्रा 45 सेमी घटकर 144.80 मीटर पर बह रही है जबकि खन्नौत एक मीटर घटकर 142.00 मीटर के निशान पर आ गई है।
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हरिहरपुर गांव पर रामगंगा का कहर जारी
मिर्जापुर। रामगंगा का जलस्तर लगातार घट रहा है, लेकिन हरिहरपुर गांव में भू कटाव कम नहीं हो रहा है। रामगंगा लगातार कटाव करती हुई मकानों की ओर बढ़ रही है, जबकि पहरूआ, कनिया और मौजमपुर में कटाव रुका हुआ है।

नदी के लगातार घटने के बाद भी हरिहरपुर के बाशिंदों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। गांव में भू-कटाव की गति इतनी तेज हैैैै किनारे पर आ गये मकानों को तोड़ते हुए नदी मलबा बहा ले जाती है। कई पेड़ नदी में बह गए हैं। इस गांव के लोगों को इस बात का मलाल है कि गरीबों के मसीहा होने को दावा करने वाले नेता और अधिकारी संकट की इस घड़ी में उनकी मदद करना तो दूर इधर आने तक की जहमत नहीं उठा रहे हैं, जबकि उनकी मांग किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं बल्कि बसने के लिए सिर्फ जगह की है।
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