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Shahjahanpur News: एबी रिच कॉलेज में पढ़ते थे अशफाक और बिस्मिल....वहीं जगी आजादी के प्रति दीवानगी
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हर गोविंद मोदी। स्रोत: स्वयं
शाहजहांपुर। शहर का एबी रिच इंटर कॉलेज राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को समेटे हुए है। कॉलेज में काकोरी एक्शन केस के अमर बलिदानी अशफाक उल्ला खां और पं. रामप्रसाद बिस्मिल पढ़ते थे। यहीं उनके अंदर भारत माता को गुलामी की बेड़ियों से आजाद कराने का जुनून सवार हुआ था। कॉलेज के गेट पर अशफाक और बिस्मिल की प्रतिमाएं लगी हैं। साथ ही रजिस्टरों पर नाम अंकित हैं।
इतिहासकार डॉ. विकास खुराना ने बताया कि शहर के लोधीपुर में बड़ा अमेरिकन सेटलमेंट आने पर जूनियर हाईस्कूल को शुरू किया गया था। वर्ष 1857 की क्रांति के समय इसे बंद करना पड़ा। वर्ष 1867 में दोबारा किराये के भवन में स्कूल को शुरू किया गया। अनेक वर्षों तक स्कूल का संचालन खपरैल के नीचे होता रहा।
इसके बाद वर्ष 1915 में मिशनरी अधिकारी एबे लियोनार्ड रिच की अगुवाई में जिला प्रशासन ने स्थानीय नवाब की दिलवाई गई खाली जमीन पर स्कूल की भव्य इमारत का निर्माण शुरू कराया। वर्ष 1916 में नई इमारत में शिक्षण कार्य शुरू हुआ। काकोरी एक्शन केस के अमर नायक पंडित रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खां कक्षा आठ व कक्षा सात बी में पढ़ते थे।
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प्रधानाचार्य मिहिर फिलिप्स ने बताया कि वर्ष 1919 तक के दोनों रजिस्टर स्कूल में उपलब्ध हैं, जिनमें अशफाक और बिस्मिल के नाम अंकित हैं। अशफाक नियमित स्कूल आते थे। 1918 में पुलिस कर्मी दोनों को पकड़ने स्कूल आए तो प्रधानाचार्य रूफस चरन ने उन्हें गेट पर रोक दिया। तब तक अशफाक और बिस्मिल इमारत की छत से कूदकर निकल गए।
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158 वर्ष पुरानी संस्था को सरकारी मरहम की दरकार
जिस स्कूल में काकोरी कांड के अमर नायकाें ने शिक्षा ग्रहण की, वह 158 वर्ष पुरानी संस्था बदहाली के दौर से गुजर रही है। इमारत काफी ज्यादा जर्जर हो गई है। मरम्मत के अभाव में छत से पानी टपकता है। दीवारों की स्थिति भी ठीक नहीं है। स्थिति को सुधारने के लिए कॉलेज की प्रबंध समिति ने डीएम से पत्राचार किया है।
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फोटो 16
कॉलेज के पास खुद का फंड नहीं है। इस पावन स्थली को बचाने व छात्रों के निर्बाध पठन-पाठन के लिए डीएम से सहायता निधि से आर्थिक सहायता की मांग की है, जिससे सुंदरीकरण कराया जा सके।
- मिहिर फिलिप्स, प्रधानाचार्य-एबी रिच कॉलेज
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पूर्व छात्रों से बातचीत
कक्षा छह से 12 तक एबी रिच कॉलेज में पढ़े हैं। यह शहीदों की धरा से जुड़ा विद्यालय है। वर्तमान समय में काफी बदहाली के दौर से गुजर रहा है। सरकार व प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
- हरगोविंद मोदी, उद्यमी
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हमने वर्ष 1984 तक विद्यालय में पढ़ाई की है। पढ़ाई के दौरान ही शहीदों की प्रतिमाएं लगाईं गईं थीं। पहले कॉलेज काफी बेहतर था। अब स्थिति काफी खराब हो गई है। प्रशासन को धरोहर को सहेजने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए।
- राजीव अवस्थी, व्यापारी
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इतिहासकार डॉ. विकास खुराना ने बताया कि शहर के लोधीपुर में बड़ा अमेरिकन सेटलमेंट आने पर जूनियर हाईस्कूल को शुरू किया गया था। वर्ष 1857 की क्रांति के समय इसे बंद करना पड़ा। वर्ष 1867 में दोबारा किराये के भवन में स्कूल को शुरू किया गया। अनेक वर्षों तक स्कूल का संचालन खपरैल के नीचे होता रहा।
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इसके बाद वर्ष 1915 में मिशनरी अधिकारी एबे लियोनार्ड रिच की अगुवाई में जिला प्रशासन ने स्थानीय नवाब की दिलवाई गई खाली जमीन पर स्कूल की भव्य इमारत का निर्माण शुरू कराया। वर्ष 1916 में नई इमारत में शिक्षण कार्य शुरू हुआ। काकोरी एक्शन केस के अमर नायक पंडित रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खां कक्षा आठ व कक्षा सात बी में पढ़ते थे।
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प्रधानाचार्य मिहिर फिलिप्स ने बताया कि वर्ष 1919 तक के दोनों रजिस्टर स्कूल में उपलब्ध हैं, जिनमें अशफाक और बिस्मिल के नाम अंकित हैं। अशफाक नियमित स्कूल आते थे। 1918 में पुलिस कर्मी दोनों को पकड़ने स्कूल आए तो प्रधानाचार्य रूफस चरन ने उन्हें गेट पर रोक दिया। तब तक अशफाक और बिस्मिल इमारत की छत से कूदकर निकल गए।
158 वर्ष पुरानी संस्था को सरकारी मरहम की दरकार
जिस स्कूल में काकोरी कांड के अमर नायकाें ने शिक्षा ग्रहण की, वह 158 वर्ष पुरानी संस्था बदहाली के दौर से गुजर रही है। इमारत काफी ज्यादा जर्जर हो गई है। मरम्मत के अभाव में छत से पानी टपकता है। दीवारों की स्थिति भी ठीक नहीं है। स्थिति को सुधारने के लिए कॉलेज की प्रबंध समिति ने डीएम से पत्राचार किया है।
फोटो 16
कॉलेज के पास खुद का फंड नहीं है। इस पावन स्थली को बचाने व छात्रों के निर्बाध पठन-पाठन के लिए डीएम से सहायता निधि से आर्थिक सहायता की मांग की है, जिससे सुंदरीकरण कराया जा सके।
- मिहिर फिलिप्स, प्रधानाचार्य-एबी रिच कॉलेज
पूर्व छात्रों से बातचीत
कक्षा छह से 12 तक एबी रिच कॉलेज में पढ़े हैं। यह शहीदों की धरा से जुड़ा विद्यालय है। वर्तमान समय में काफी बदहाली के दौर से गुजर रहा है। सरकार व प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
- हरगोविंद मोदी, उद्यमी
हमने वर्ष 1984 तक विद्यालय में पढ़ाई की है। पढ़ाई के दौरान ही शहीदों की प्रतिमाएं लगाईं गईं थीं। पहले कॉलेज काफी बेहतर था। अब स्थिति काफी खराब हो गई है। प्रशासन को धरोहर को सहेजने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए।
- राजीव अवस्थी, व्यापारी

हर गोविंद मोदी। स्रोत: स्वयं

हर गोविंद मोदी। स्रोत: स्वयं

हर गोविंद मोदी। स्रोत: स्वयं

हर गोविंद मोदी। स्रोत: स्वयं