{"_id":"6ae4ef24913690674301accd","slug":"applause-continued-to-ring-out-late-into-the-night-following-the-recitations-of-poets-and-lyricists-shahjahanpur-news-c-122-1-sbly1042-188841-2026-10-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shahjahanpur News: कवियों और शायरों की रचनाओं पर देर रात तक गूंजती रहीं तालियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shahjahanpur News: कवियों और शायरों की रचनाओं पर देर रात तक गूंजती रहीं तालियां
विज्ञापन
शायर, शकील आजमी।
- फोटो : Archive
शाहजहांपुर। आयुध वस्त्र निर्माणी (ओसीएफ) इस्टेट स्थित रामलीला एवं प्रदर्शनी समिति के तत्वावधान में शुक्रवार रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया। इसमें देश के जाने-माने कवियों और शायरों की रचनाओं पर देर रात तक तालियां गूंजती रहीं। रात करीब नौ बजे आयुध वस्त्र निर्माणी के मुख्य महाप्रबंधक अरुण कुमार वर्मा ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। देश के सुप्रसिद्ध कवि डॉ. विष्णु सक्सेना, चिराग जैन (नई दिल्ली), शायर शकील आजमी (मुंबई), जौहर कानपुरी, शबीना अदीब, जहाज देवबंदी, हिमांशी बाबरा ने एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी।
कार्यक्रम में एसएस मीणा, ऋषि बाबू, मदन मोहन त्रिपाठी, बलवीर सिंह, शारिक अली, प्रवेश कुमार, गोविंद वाजपेयी आदि मौजूद रहे।
-- -- -- -- -- -- -
सोशल मीडिया ने कवि सम्मेलनों और मुशायरों को पहुंचाया नुकसान : डॉ. विष्णु सक्सेना
कवि डॉ. विष्णु सक्सेना ने कहा कि सोशल मीडिया ने कवि सम्मेलनों और मुशायरों को काफी नुकसान पहुंचा है। नए कवियों के बीच यह धारणा बन रही है कि पुराने शायर और कवि उन्हें आगे नहीं बढ़ने देना चाहते। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने अपने समूह बना लिए हैं। वे एक-दूसरे की पोस्ट पर लाइक बढ़ाते हैं और उसे ही अपना श्रोता समझ बैठते हैं। अब लोकप्रियता का आकलन फॉलोअर्स से होने लगा है। उन्होंने कहा कि नए कवियों व शायरों को कमियां बताने वाला कोई नहीं है। युवा शायरों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि अच्छे शायरों और कवियों की रचनाओं का अध्ययन करें। पहले पढ़ें, फिर सुनें और इसके बाद लिखना शुरू करें।
-- -- -- -- -- -- -
रील्स के दौर में भी शायरी की अहमियत बरकरार : शबीना
अंतरराष्ट्रीय शायरा शबीना अदीब ने कहा कि रियल और रील में फर्क है। लोगों को रियल यानी वास्तविकता पर तवज्जो देनी चाहिए। तभी असली चीजें नजर आएंगी। आज लोग उन्हीं को अधिक तरजीह देते हैं, जिनके व्यूज ज्यादा होते हैं। इसके साथ ही उन लोगों पर भी गौर करना चाहिए, जिन्होंने अपनी नींद और समय गंवाकर साहित्य और शायरी को साधा है। उन्होंने कहा कि हर दौर में चुनौतियां रही हैं। आज भी हर पल खुद को साबित करना पड़ता है। पहले भी कवियों को अपनी प्रतिभा साबित करनी पड़ती थी। हर कवि सम्मेलन में शायर को अपनी शायरी से श्रोताओं का दिल जीतना पड़ता है। उन्हें सिर्फ जुमलों और चुटकुलों पर नहीं, बल्कि अच्छी शायरी पर दाद मिलती है।
विज्ञापन
--
साहित्य से मजबूत होती है भाषा : शकील आजमी
मशहूर शायर और गीतकार शकील आजमी ने कहा कि फिल्मों में लेखन का दायरा कहानी और पात्रों के अनुसार तय होता है। गीतकार को उसी के अनुरूप लिखना पड़ता है, जबकि साहित्य में अभिव्यक्ति की अधिक स्वतंत्रता होती है। इसके बावजूद फिल्मी लेखन में भी अपनी शैली और भाषा को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि उर्दू शायरी का हिंदी में प्रकाशित होना और लोकप्रियता हासिल करना भाषाई मेलजोल का अच्छा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन ने जहां लोगों को कई सुविधाएं दी हैं, वहीं काफी कुछ बिगाड़ा भी है। लोग अपने-अपने मोबाइल फोन और रील्स की दुनिया में सिमटकर रह गए हैं। किसी भी चीज का इस्तेमाल एक दायरे में रहकर किया जाए तो वह बेहतर होती है। युवाओं को अपनी भाषा पर काम करना चाहिए।
विज्ञापन
कार्यक्रम में एसएस मीणा, ऋषि बाबू, मदन मोहन त्रिपाठी, बलवीर सिंह, शारिक अली, प्रवेश कुमार, गोविंद वाजपेयी आदि मौजूद रहे।
सोशल मीडिया ने कवि सम्मेलनों और मुशायरों को पहुंचाया नुकसान : डॉ. विष्णु सक्सेना
कवि डॉ. विष्णु सक्सेना ने कहा कि सोशल मीडिया ने कवि सम्मेलनों और मुशायरों को काफी नुकसान पहुंचा है। नए कवियों के बीच यह धारणा बन रही है कि पुराने शायर और कवि उन्हें आगे नहीं बढ़ने देना चाहते। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने अपने समूह बना लिए हैं। वे एक-दूसरे की पोस्ट पर लाइक बढ़ाते हैं और उसे ही अपना श्रोता समझ बैठते हैं। अब लोकप्रियता का आकलन फॉलोअर्स से होने लगा है। उन्होंने कहा कि नए कवियों व शायरों को कमियां बताने वाला कोई नहीं है। युवा शायरों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि अच्छे शायरों और कवियों की रचनाओं का अध्ययन करें। पहले पढ़ें, फिर सुनें और इसके बाद लिखना शुरू करें।
विज्ञापन
रील्स के दौर में भी शायरी की अहमियत बरकरार : शबीना
अंतरराष्ट्रीय शायरा शबीना अदीब ने कहा कि रियल और रील में फर्क है। लोगों को रियल यानी वास्तविकता पर तवज्जो देनी चाहिए। तभी असली चीजें नजर आएंगी। आज लोग उन्हीं को अधिक तरजीह देते हैं, जिनके व्यूज ज्यादा होते हैं। इसके साथ ही उन लोगों पर भी गौर करना चाहिए, जिन्होंने अपनी नींद और समय गंवाकर साहित्य और शायरी को साधा है। उन्होंने कहा कि हर दौर में चुनौतियां रही हैं। आज भी हर पल खुद को साबित करना पड़ता है। पहले भी कवियों को अपनी प्रतिभा साबित करनी पड़ती थी। हर कवि सम्मेलन में शायर को अपनी शायरी से श्रोताओं का दिल जीतना पड़ता है। उन्हें सिर्फ जुमलों और चुटकुलों पर नहीं, बल्कि अच्छी शायरी पर दाद मिलती है।
विज्ञापन
साहित्य से मजबूत होती है भाषा : शकील आजमी
मशहूर शायर और गीतकार शकील आजमी ने कहा कि फिल्मों में लेखन का दायरा कहानी और पात्रों के अनुसार तय होता है। गीतकार को उसी के अनुरूप लिखना पड़ता है, जबकि साहित्य में अभिव्यक्ति की अधिक स्वतंत्रता होती है। इसके बावजूद फिल्मी लेखन में भी अपनी शैली और भाषा को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि उर्दू शायरी का हिंदी में प्रकाशित होना और लोकप्रियता हासिल करना भाषाई मेलजोल का अच्छा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन ने जहां लोगों को कई सुविधाएं दी हैं, वहीं काफी कुछ बिगाड़ा भी है। लोग अपने-अपने मोबाइल फोन और रील्स की दुनिया में सिमटकर रह गए हैं। किसी भी चीज का इस्तेमाल एक दायरे में रहकर किया जाए तो वह बेहतर होती है। युवाओं को अपनी भाषा पर काम करना चाहिए।

शायर, शकील आजमी।- फोटो : Archive

शायर, शकील आजमी।- फोटो : Archive

शायर, शकील आजमी।- फोटो : Archive