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राजकीय मेडिकल कॉलेज में छह महीने से नहीं लग रहीं एंटी रेबीज वैक्सीन
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राजकीय मेडिकल कॉलेज का प्रशासनिक भवन । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाने के लिए अगर राजकीय मेडिकल कॉलेज आ रहे हैं तो इरादा बदल दीजिए। करीब छह महीने से मेडिकल कॉलेज में एआरवी नहीं लगाई जा रही है। प्राचार्य का यह कहना है कि मेडिकल कॉलेज में एआरवी लगाने का प्रावधान नहीं है। वहीं सीएमओ के मुताबिक मेडिकल कॉलेज से एआरवी की मांग नहीं की जा रही है।
तकरीबन ढाई साल पहले शाहजहांपुर जिला अस्पताल को राजकीय मेडिकल कॉलेज का दर्जा दे दिया गया था। लोगों को आस थी कि मेडिकल कॉलेज बनने के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा होगा, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। कुत्ता-बंदर आदि पशुओं के काटने पर लगने वाले एआरवी पिछले छह महीने से नहीं लगाई जा रही है। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य का कहना है कि उन्होंने मई में पदभार संभाला था, तब से इंजेक्शन नहीं लगाया जा रहा है। उससे पहले भी यहां एआरवी नहीं लगाई जा रही थी। जबकि फरवरी-मार्च तक एआरवी लगाई जा रही थी।
फरवरी में मेडिकल कॉलेज में एआरवी उपलब्ध न होने पर लोगों ने कई बार हंगामा किया था। तब सीएमओ कार्यालय से एआरवी मंगवाकर लोगों को लगवाईं थीं। तब मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना था कि सप्लाई अनुपलब्ध होने के कारण एआरवी लगाने में दिक्कत हो रही है। इसके बाद मेडिकल कॉलेज में एआरवी लगनी कब बंद कर दी गई, यह पता नहीं चला। सीएमओ डॉ. एसपी गौतम के मुताबिक मेडिकल कॉलेज से मांग न आने के कारण सप्लाई नहीं की जा रही। मांग आएगी तो एआरवी भेजी जाएगी।
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सीएमओ डॉ. एसपी गौतम ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध है। चार अर्बन सीएचसी समेत जिले की सभी सीएचसी और पीएचसी पर एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध है। राजकीय मेडिकल कॉलेज से डिमांड आने पर वैक्सीन उपलब्ध कराई जाएगी।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार का कहना है कि कार्यभार संभालने से पहले से यहां एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं लगाई जा रही थी। किसी भी मेडिकल कालेज में एंटी रैबीज नहीं लगाई जाती है। शासन से एंटी रैबीज वैक्सीन प्राप्त नहीं हो रही है।
बंदरों को पकड़ने का अभियान ठंडे बस्ते में
नगर निगम क्षेत्र में बंदरों का उत्पात है। आए दिन बंदर द्वारा काटने या दौड़ाने की घटनाएं होती रहती हैं। नगर निगम का अभियान ठंडे बस्ते में है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी वीरेंद्र वर्मा ने बताया कि बंदरों को पकड़वाने के लिए वन विभाग के अधिकारियों से पत्र व्यवहार किया था। तब बताया कि एक फर्म अपने कर्मचारियों के माध्यम से यह कार्य करवाती है। नगर निगम को अपने खर्चे पर उनसे बंदरों को पकड़वाना पड़ेगा। फर्म से बातचीत चल रही है। जल्द ही इसका विज्ञापन भी प्रकाशित करवाया जाएगा। प्रस्ताव पर मोहर लगने के लगने के बाद बंदरों को पकड़वाने की प्रक्रिया शुरू करई जाएगी। कुत्तों की समस्या को लेकर पशु चिकित्साधिकारी से विचार-विमर्श किया जाएगा।
यह है रैबीज
रैबीज या हाईड्रोफोबिया बहुत खतरनाक बीमारी है। लापरवाही पर यह जानलेवा साबित हो सकती है। किसी संक्रमित पशु के काटने या खुले घाव को चाटने से यह संक्रमण शरीर में प्रवेश कर जाता है। यह वायरस इंद्रियों पर हमला करता है और मस्तिष्क पर पहुंचकर घातक हो जाता है।
प्रमुख लक्षण
-संक्रमित व्यक्ति को झटके आना, उत्तेजित होना, पक्षाघात होना, पानी पीने में दिक्कत होना, बुखार, सिरदर्द और जी मचलाना आदि।
यह बरतें सावधानी
राजकीय मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एमएल अग्रवाल ने बताया कि कुत्ते के काटने के 72 घंटे में चिकित्सक की सलाह पर 3, 5 या फिर सात इंजेक्शन लगवाएं। घाव को गुनगुने पानी से धो सकते हैं। घाव को ढकें नहीं और न पट्टी लगाएं और न ही टांके। एंटी-रैबीज वैक्सीन लगवाएं। कुत्ते या पशु की दस दिन तक निगरानी करें। अगर कुत्ते की मौत हो जाए तो हर हाल में एआरवी लगवा लें।
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तकरीबन ढाई साल पहले शाहजहांपुर जिला अस्पताल को राजकीय मेडिकल कॉलेज का दर्जा दे दिया गया था। लोगों को आस थी कि मेडिकल कॉलेज बनने के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा होगा, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। कुत्ता-बंदर आदि पशुओं के काटने पर लगने वाले एआरवी पिछले छह महीने से नहीं लगाई जा रही है। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य का कहना है कि उन्होंने मई में पदभार संभाला था, तब से इंजेक्शन नहीं लगाया जा रहा है। उससे पहले भी यहां एआरवी नहीं लगाई जा रही थी। जबकि फरवरी-मार्च तक एआरवी लगाई जा रही थी।
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फरवरी में मेडिकल कॉलेज में एआरवी उपलब्ध न होने पर लोगों ने कई बार हंगामा किया था। तब सीएमओ कार्यालय से एआरवी मंगवाकर लोगों को लगवाईं थीं। तब मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना था कि सप्लाई अनुपलब्ध होने के कारण एआरवी लगाने में दिक्कत हो रही है। इसके बाद मेडिकल कॉलेज में एआरवी लगनी कब बंद कर दी गई, यह पता नहीं चला। सीएमओ डॉ. एसपी गौतम के मुताबिक मेडिकल कॉलेज से मांग न आने के कारण सप्लाई नहीं की जा रही। मांग आएगी तो एआरवी भेजी जाएगी।
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सीएमओ डॉ. एसपी गौतम ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध है। चार अर्बन सीएचसी समेत जिले की सभी सीएचसी और पीएचसी पर एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध है। राजकीय मेडिकल कॉलेज से डिमांड आने पर वैक्सीन उपलब्ध कराई जाएगी।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार का कहना है कि कार्यभार संभालने से पहले से यहां एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं लगाई जा रही थी। किसी भी मेडिकल कालेज में एंटी रैबीज नहीं लगाई जाती है। शासन से एंटी रैबीज वैक्सीन प्राप्त नहीं हो रही है।
बंदरों को पकड़ने का अभियान ठंडे बस्ते में
नगर निगम क्षेत्र में बंदरों का उत्पात है। आए दिन बंदर द्वारा काटने या दौड़ाने की घटनाएं होती रहती हैं। नगर निगम का अभियान ठंडे बस्ते में है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी वीरेंद्र वर्मा ने बताया कि बंदरों को पकड़वाने के लिए वन विभाग के अधिकारियों से पत्र व्यवहार किया था। तब बताया कि एक फर्म अपने कर्मचारियों के माध्यम से यह कार्य करवाती है। नगर निगम को अपने खर्चे पर उनसे बंदरों को पकड़वाना पड़ेगा। फर्म से बातचीत चल रही है। जल्द ही इसका विज्ञापन भी प्रकाशित करवाया जाएगा। प्रस्ताव पर मोहर लगने के लगने के बाद बंदरों को पकड़वाने की प्रक्रिया शुरू करई जाएगी। कुत्तों की समस्या को लेकर पशु चिकित्साधिकारी से विचार-विमर्श किया जाएगा।
यह है रैबीज
रैबीज या हाईड्रोफोबिया बहुत खतरनाक बीमारी है। लापरवाही पर यह जानलेवा साबित हो सकती है। किसी संक्रमित पशु के काटने या खुले घाव को चाटने से यह संक्रमण शरीर में प्रवेश कर जाता है। यह वायरस इंद्रियों पर हमला करता है और मस्तिष्क पर पहुंचकर घातक हो जाता है।
प्रमुख लक्षण
-संक्रमित व्यक्ति को झटके आना, उत्तेजित होना, पक्षाघात होना, पानी पीने में दिक्कत होना, बुखार, सिरदर्द और जी मचलाना आदि।
यह बरतें सावधानी
राजकीय मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एमएल अग्रवाल ने बताया कि कुत्ते के काटने के 72 घंटे में चिकित्सक की सलाह पर 3, 5 या फिर सात इंजेक्शन लगवाएं। घाव को गुनगुने पानी से धो सकते हैं। घाव को ढकें नहीं और न पट्टी लगाएं और न ही टांके। एंटी-रैबीज वैक्सीन लगवाएं। कुत्ते या पशु की दस दिन तक निगरानी करें। अगर कुत्ते की मौत हो जाए तो हर हाल में एआरवी लगवा लें।