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Shahjahanpur News: भीषण गर्मी में छायादार ठिकानों के लिए तरस रहे गोशालाओं में पशु
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कांट के इंदेपुर गांव की गोशाला में सूखा भूसा खातीं गाय। संवाद
शाहजहांपुर। भीषण गर्मी में तीखी धूप से बचने के लिए हर कोई छायादार ठिकाने तलाशता है, लेकिन जिले की गोशालाओं में रखे गए तमाम पशु खुले में रहकर धूप में तपने के लिए मजबूर हैं। कई गोशालाओं में न तो पर्याप्त टिनशेड बनाए गए हैं और न ही वहां हरा चारे की व्यवस्था की गई है। पशुओं को खाने के लिए सिर्फ सूखा भूसा दिया जा रहा है। इस बारे में मुख्यमंत्री से उनके जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत कर गोशालाओं में पशुओं के रखरखाव की व्यवस्था में सुधार कराने की मांग की गई है।
जैतीपुर। अगरोली गांव की गोशाला में 220 पशुओं को रखने की क्षमता है। वर्तमान में वहां 180 गोवंश हैं, फिर भी पशुओं के लिए जरूरी व्यवस्थाएं नदारद हैं। सरकार उदारता से गोशालाओं को बजट दे रही है, लेकिन उस अनुपात में पशुओं को कुछ नहीं मिल रहा। भूसे की सीजन खत्म हुए अभी दो माह भी नहीं बीते, लेकिन गोशाला में भूसा खत्म हो गया है। गत वर्ष इन्हीं दिनों में वहां भूसे का भंंडारण कर उसके कई बुर्ज बनाए गए थे, लेकिन इस बार गोशाला का परिसर भूसे से खाली हो चुका है। गोपालक सुबह हरा चारा लाते हैं और वही काटकर पशुओं के आगे डाल दिया जाता है। शेष चारा सरस हाट के खाली पड़े अहाते में डाल दिया जाता है। गोवंशीय पशु हरे चारे के सूखे अवशेष चबाते हैं। गोशाला परिसर में कोई टिनशेड या ऐसा स्थान नहीं बनवाया गया, जहां पशुओं को छाया नसीब हाे सके। संवाद
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गोशाला में पशुओं का खिलाया जा रहा सूखा भूसा
कांट। इंदेपुर गांव की गोशाला में संरक्षित गोवंशीय पशुओं को खुले में रखा गया है और उनके हरे चारे की भी व्यवस्था नहीं की गई है। सोमवार को दोपहर गोशाला में पशुओं को सूखा भूसा खाते और तेज धूप में तपते देख पूर्व प्रधान वीरेंद्र कुमार ने मुख्यमंत्री के पोर्टल पर शिकायत कर गोशाला में पशुओं के लिए उचित प्रबंध कराने की गुहार लगाई। मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में उन्होंने कहा है कि गोशाला में ग्राम प्रधान संसार वती ने 400 पशु संरक्षित कराए हैं, लेकिन वहां न तो पर्याप्त टिनशेड बने हैं और न ही चहारदीवारी है। तपती दोपहर में खुले में रहने के लिए मजबूर पशुओं के लिए हरे चारे की कोई व्यवस्था नहीं की गई है और भूसा का भी पर्याप्त स्टॉक नहीं है। हरा चारा, दाना और भूसा पर्याप्त मात्रा में नहीं देने से कई पशु बीमार हो चुके हैं। संवाद
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जनपद में गोवंशीय पशुओं की स्थिति
- जनपद की 123 गोशालाओं में 15164 पशु संरक्षित
- 9059 पशुओं को सहभागिता योजना के तहत दिया गया
- 10 वृहद गोशालाएं निर्माणाधीन
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गोशालाओं की देखरेख के लिए लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं। अगरोली और इंदेपुर गोशालाओं की जिलास्तरीय अधिकारी से जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- उत्कर्ष द्विवेदी, सीडीओ
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जैतीपुर। अगरोली गांव की गोशाला में 220 पशुओं को रखने की क्षमता है। वर्तमान में वहां 180 गोवंश हैं, फिर भी पशुओं के लिए जरूरी व्यवस्थाएं नदारद हैं। सरकार उदारता से गोशालाओं को बजट दे रही है, लेकिन उस अनुपात में पशुओं को कुछ नहीं मिल रहा। भूसे की सीजन खत्म हुए अभी दो माह भी नहीं बीते, लेकिन गोशाला में भूसा खत्म हो गया है। गत वर्ष इन्हीं दिनों में वहां भूसे का भंंडारण कर उसके कई बुर्ज बनाए गए थे, लेकिन इस बार गोशाला का परिसर भूसे से खाली हो चुका है। गोपालक सुबह हरा चारा लाते हैं और वही काटकर पशुओं के आगे डाल दिया जाता है। शेष चारा सरस हाट के खाली पड़े अहाते में डाल दिया जाता है। गोवंशीय पशु हरे चारे के सूखे अवशेष चबाते हैं। गोशाला परिसर में कोई टिनशेड या ऐसा स्थान नहीं बनवाया गया, जहां पशुओं को छाया नसीब हाे सके। संवाद
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गोशाला में पशुओं का खिलाया जा रहा सूखा भूसा
कांट। इंदेपुर गांव की गोशाला में संरक्षित गोवंशीय पशुओं को खुले में रखा गया है और उनके हरे चारे की भी व्यवस्था नहीं की गई है। सोमवार को दोपहर गोशाला में पशुओं को सूखा भूसा खाते और तेज धूप में तपते देख पूर्व प्रधान वीरेंद्र कुमार ने मुख्यमंत्री के पोर्टल पर शिकायत कर गोशाला में पशुओं के लिए उचित प्रबंध कराने की गुहार लगाई। मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में उन्होंने कहा है कि गोशाला में ग्राम प्रधान संसार वती ने 400 पशु संरक्षित कराए हैं, लेकिन वहां न तो पर्याप्त टिनशेड बने हैं और न ही चहारदीवारी है। तपती दोपहर में खुले में रहने के लिए मजबूर पशुओं के लिए हरे चारे की कोई व्यवस्था नहीं की गई है और भूसा का भी पर्याप्त स्टॉक नहीं है। हरा चारा, दाना और भूसा पर्याप्त मात्रा में नहीं देने से कई पशु बीमार हो चुके हैं। संवाद
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जनपद में गोवंशीय पशुओं की स्थिति
- जनपद की 123 गोशालाओं में 15164 पशु संरक्षित
- 9059 पशुओं को सहभागिता योजना के तहत दिया गया
- 10 वृहद गोशालाएं निर्माणाधीन
गोशालाओं की देखरेख के लिए लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं। अगरोली और इंदेपुर गोशालाओं की जिलास्तरीय अधिकारी से जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- उत्कर्ष द्विवेदी, सीडीओ

कांट के इंदेपुर गांव की गोशाला में सूखा भूसा खातीं गाय। संवाद