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Shahjahanpur News: मिलीभगत का आरोप, कंपनी ने जांच के लिए उपलब्ध नहीं दीं स्ट्रीट लाइटें
Sun, 29 Sep 2024 01:23 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Sun, 29 Sep 2024 01:23 AM IST
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महपौर अर्चना वर्मा को जांच रिपोर्ट सौंपते पार्षद। स्रोत : स्वयं
शाहजहांपुर। स्ट्रीट लाइटों के खराब होने व मरम्मत में बरती जा रही लापरवाही की जांच रिपोर्ट कमेटी ने महापौर अर्चना वर्मा को सौंप दी है। कमेटी में शामिल पार्षदों ने स्ट्रीट लाइटों को लगाने वाली ई-स्मार्ट कंपनी व नगर निगम के अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। कहा कि कंपनी ने जांच के लिए भी स्ट्रीट लाइटें उपलब्ध नहीं कराई हैं।
रिपोर्ट में बताया कि ई-स्मार्ट कंपनी द्वारा लगाई गईं ज्यादातर स्ट्रीट लाइटें बंद मिलीं या फिर दिन में जल रहीं थीं। स्ट्रीट लाइटों को बंद करने की कोई भी व्यवस्था नहीं है। इससे स्ट्रीट लाइटों का बिजली बिल भी करीब 40-45 लाख रुपये आता है। ई-स्मार्ट कंपनी के स्टाफ का व्यवहार आमजन ही नहीं पार्षदों के साथ भी अशोभनीय है। आरोप है कि ई-स्मार्ट कंपनी व नगर निगम के अधिकारियों में मिलीभगत चल रही है, इसलिए जांच कमेटी को कंपनी द्वारा लगाई गई स्ट्रीट लाइट को जांच के लिए भेजने के लिए उपलब्ध नहीं कराई गईं।
बताया गया कि ई-स्मार्ट कंपनी का वर्ष 2017 में तत्कालीन नगर पालिका परिषद (वर्तमान में नगर निगम) से यह समझौता हुआ था कि 8604 स्ट्रीट लाइटें कंपनी लगाएगी और उनका सात वर्ष तक परिसंचालन व अनुरक्षण करेगी। इस अवधि में अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा तथा सभी लाइटें नगर निगम की हो जाएंगी।
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मांग है कि सात वर्ष बाद नए नियम व शर्तों पर स्ट्रीट लाइटों के अनुरक्षण कार्य के लिए दोबारा निविदा आमंत्रित कर प्राप्त न्यूनतम निविदादाता/फर्म से कार्य कराया जाए। इससे नगर निगम को आर्थिक रूप से लाभ होगा। रिपोर्ट सौंपने वालों में पार्षद अनूप गुप्ता, धीरेंद्र सिंह चौहान, सोनी मिश्रा, लालू पुजारी, मनीष गुप्ता, शिवओम सक्सेना शामिल रहे। पार्षद अनूप गुप्ता ने बताया कि महापौर अर्चना वर्मा की ओर से कार्रवाई का आश्वासन मिला है।
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रिपोर्ट में बताया कि ई-स्मार्ट कंपनी द्वारा लगाई गईं ज्यादातर स्ट्रीट लाइटें बंद मिलीं या फिर दिन में जल रहीं थीं। स्ट्रीट लाइटों को बंद करने की कोई भी व्यवस्था नहीं है। इससे स्ट्रीट लाइटों का बिजली बिल भी करीब 40-45 लाख रुपये आता है। ई-स्मार्ट कंपनी के स्टाफ का व्यवहार आमजन ही नहीं पार्षदों के साथ भी अशोभनीय है। आरोप है कि ई-स्मार्ट कंपनी व नगर निगम के अधिकारियों में मिलीभगत चल रही है, इसलिए जांच कमेटी को कंपनी द्वारा लगाई गई स्ट्रीट लाइट को जांच के लिए भेजने के लिए उपलब्ध नहीं कराई गईं।
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बताया गया कि ई-स्मार्ट कंपनी का वर्ष 2017 में तत्कालीन नगर पालिका परिषद (वर्तमान में नगर निगम) से यह समझौता हुआ था कि 8604 स्ट्रीट लाइटें कंपनी लगाएगी और उनका सात वर्ष तक परिसंचालन व अनुरक्षण करेगी। इस अवधि में अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा तथा सभी लाइटें नगर निगम की हो जाएंगी।
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मांग है कि सात वर्ष बाद नए नियम व शर्तों पर स्ट्रीट लाइटों के अनुरक्षण कार्य के लिए दोबारा निविदा आमंत्रित कर प्राप्त न्यूनतम निविदादाता/फर्म से कार्य कराया जाए। इससे नगर निगम को आर्थिक रूप से लाभ होगा। रिपोर्ट सौंपने वालों में पार्षद अनूप गुप्ता, धीरेंद्र सिंह चौहान, सोनी मिश्रा, लालू पुजारी, मनीष गुप्ता, शिवओम सक्सेना शामिल रहे। पार्षद अनूप गुप्ता ने बताया कि महापौर अर्चना वर्मा की ओर से कार्रवाई का आश्वासन मिला है।