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इलाहाबाद कांड को लेकर दूसरे दिन भी रही हड़ताल
शाहजहांपुर।
Updated Fri, 13 Mar 2015 08:32 PM IST
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इलाहाबाद की घटना के विरोध में सेंट्रल बार एसोसिएशन ने हड़ताल के दूसरे दिन पीडब्ल्यूडी तिराहे पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। इस दौरान कचहरी रोड पर लगी मुख्यमंत्री की फ्लैक्सी को वकीलों ने आग के हवाले कर दिया। इसके बाद एडीएम (प्रशासन) को ज्ञापन सौंपा। साथ में सिटी मजिस्ट्रेट कमलेश द्विवेदी भी थे। वकीलों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 15 मार्च तक आरोपी दरोगा की गिरफ्तारी और अन्य मांगें पूरी नहीं हुईं तो 16 मार्च को ऑल इंडिया बार काउंसिल के आह्वान पर आंदोलन और तेज किया जाएगा।
शुक्रवार को 11 बजते ही भारी संख्या में वकील अध्यक्ष अमोघ चंद्र दीक्षित और महासचिव राजीव गुप्ता के नेतृत्व में पीडब्ल्यूडी तिराहे पर जाम लगाकर नारेबाजी करने लगे। वकीलों को संबोधित करते हुए वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय सक्सेना ने एकजुट होकर मुकाबला करने का आह्वान किया। वरिष्ठ अधिवक्ता राजाराम मिश्र ने शांतिपूर्ण आंदोलन करने और दरोगा को तत्काल गिरफ्तार करने की बात कही। पूर्व महासचिव संजय मिश्र ने कहा कि अधिवक्ता के सीने पर गोली मारने से हत्या का इरादा साफ झलकता है। दिन दहाड़े ऐसा कृत्य करने वाले को सख्त सजा मिलनी चाहिए। दिनेश मिश्र ने आरोपी की गिरफ्तारी की मांग करते हुए आंदोलन को तेज करने की बात कही। इसके अलावा रफत जहां, गुलिस्तां, अनुज सिंह, गायत्री प्रकाश अवस्थी, कीर्तिमान च्यवन, एजाज हसन खां, रामेंद्र मिश्रा, आलोक द्विवेदी, राजेश अवस्थी आदि ने भी सभा को संबोधित किया।
वादकारियों को वकीलों की हड़ताल की जानकारी होने के कारण अधिकांश लोग कचहरी नहीं आए। इस कारण अदालतों के बाहर सन्नाटा रहा। किसी भी वकील ने कार्य नहीं किया। प्रदर्शनकारी वकील पीडब्ल्यूडी तिराहे पर कुर्सियां डालकर बैठ गए और रास्ता जाम कर दिया। अंत में बार अध्यक्ष अमोघ चंद्र दीक्षित ने संबोधित करते हुए कहा कि उनकी लड़ाई एक अपराधी से है, अगर मांगे नहीं मानी जाती हैं तो 16 मार्च को भी हड़ताल हो सकती है। इस दौरान एडीएम प्रशासन मुनेंद्र नाथ उपाध्याय को ज्ञापन के लिए आधा घंटा खड़े होकर इंतजार करना पड़ा। ज्ञापन में दरोगा की गिरफ्तारी, मृतक वकील के परिजनों को 50 लाख व घायल को 25 लाख धनराशि मुआवजा देने की मांग की गई। एसपी सिटी, थाना प्रभारी सदर, महिला थाना इंस्पेक्टर सहित भारी फोर्स मौजूद था। प्रदर्शन में पूर्व अध्यक्ष मनेंद्र सिंह, अजय वर्मा, प्रमोद यादव, राकेश निगम, दीप गुप्ता, कौशल किशोर वाजपेयी, मनोज गुप्ता, गिरीश श्रीवास्तव, सत्यम गुप्ता, प्रमोद तिवारी आदि शामिल रहे।
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मुख्यमंत्री का पोस्टर फाड़ा, जलाया
जाम के दौरान गुस्साए वकीलों ने मुख्यमंत्री की तिराहे पर लगी फ्लैक्सी फाड़ कर जला दी। प्रदेश सरकार के विरुद्ध जमकर नारेबाजी भी की। इस दौरान पुलिस मूकदर्शक बनी रही।
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शुक्रवार को 11 बजते ही भारी संख्या में वकील अध्यक्ष अमोघ चंद्र दीक्षित और महासचिव राजीव गुप्ता के नेतृत्व में पीडब्ल्यूडी तिराहे पर जाम लगाकर नारेबाजी करने लगे। वकीलों को संबोधित करते हुए वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय सक्सेना ने एकजुट होकर मुकाबला करने का आह्वान किया। वरिष्ठ अधिवक्ता राजाराम मिश्र ने शांतिपूर्ण आंदोलन करने और दरोगा को तत्काल गिरफ्तार करने की बात कही। पूर्व महासचिव संजय मिश्र ने कहा कि अधिवक्ता के सीने पर गोली मारने से हत्या का इरादा साफ झलकता है। दिन दहाड़े ऐसा कृत्य करने वाले को सख्त सजा मिलनी चाहिए। दिनेश मिश्र ने आरोपी की गिरफ्तारी की मांग करते हुए आंदोलन को तेज करने की बात कही। इसके अलावा रफत जहां, गुलिस्तां, अनुज सिंह, गायत्री प्रकाश अवस्थी, कीर्तिमान च्यवन, एजाज हसन खां, रामेंद्र मिश्रा, आलोक द्विवेदी, राजेश अवस्थी आदि ने भी सभा को संबोधित किया।
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वादकारियों को वकीलों की हड़ताल की जानकारी होने के कारण अधिकांश लोग कचहरी नहीं आए। इस कारण अदालतों के बाहर सन्नाटा रहा। किसी भी वकील ने कार्य नहीं किया। प्रदर्शनकारी वकील पीडब्ल्यूडी तिराहे पर कुर्सियां डालकर बैठ गए और रास्ता जाम कर दिया। अंत में बार अध्यक्ष अमोघ चंद्र दीक्षित ने संबोधित करते हुए कहा कि उनकी लड़ाई एक अपराधी से है, अगर मांगे नहीं मानी जाती हैं तो 16 मार्च को भी हड़ताल हो सकती है। इस दौरान एडीएम प्रशासन मुनेंद्र नाथ उपाध्याय को ज्ञापन के लिए आधा घंटा खड़े होकर इंतजार करना पड़ा। ज्ञापन में दरोगा की गिरफ्तारी, मृतक वकील के परिजनों को 50 लाख व घायल को 25 लाख धनराशि मुआवजा देने की मांग की गई। एसपी सिटी, थाना प्रभारी सदर, महिला थाना इंस्पेक्टर सहित भारी फोर्स मौजूद था। प्रदर्शन में पूर्व अध्यक्ष मनेंद्र सिंह, अजय वर्मा, प्रमोद यादव, राकेश निगम, दीप गुप्ता, कौशल किशोर वाजपेयी, मनोज गुप्ता, गिरीश श्रीवास्तव, सत्यम गुप्ता, प्रमोद तिवारी आदि शामिल रहे।
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मुख्यमंत्री का पोस्टर फाड़ा, जलाया
जाम के दौरान गुस्साए वकीलों ने मुख्यमंत्री की तिराहे पर लगी फ्लैक्सी फाड़ कर जला दी। प्रदेश सरकार के विरुद्ध जमकर नारेबाजी भी की। इस दौरान पुलिस मूकदर्शक बनी रही।