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गन्ना सर्वे: फर्जीवाड़ा रोकने को गन्ना रकबा की होगी क्रॉस चेकिंग
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शाहजहांपुर। पेराई सत्र 2019-20 के लिए गन्ना सर्वे में फर्जीवाड़ा सामने आने पर क्रास चेकिंग का निर्णय लिया गया है। क्रास चेकिंग सहकारी गन्ना विकास समितियों और विभागीय पर्यवेक्षकों के स्तर से कराया जाएगा। रोजा सहकारी गन्ना विकास समिति के एक कर्मचारी ने सर्वे के दौरान रजिस्टर में दस ऐसे किसानों के नाम दर्ज कर दिए, जिन किसानों के पास गन्ने की फसल ही नहीं है। इस पर गन्ना विकास विभाग के अधिकारियों ने सर्वे की क्रॉस चेकिंग के साथ ऐसे मामलों में किसानों की संलिप्तता भी जांचने का निर्णय लिया है।
बुधवार को जिला गन्ना अधिकारी डॉ. खुशीराम भार्गव ने रोजा मिल क्षेत्र के गांव दिलावरपुर और हेतमपुर में सर्वे कार्य का निरीक्षण किया। तब उन्होंने पाया कि क्षेत्रीय गन्ना समिति के कर्मचारी सर्वेश कुमार ने अभिलेखों मेें दोनों गांवों के पांच-पांच किसानों के नाम ऐसे खेत दर्ज कर दिए, जिनमें गन्ना फसल बोई ही नहीं गई है। यानी खेत खाली पड़े हैं। चूंकि ऐसे मामले पिछले साल के पेराई सत्र में हुए गन्ना सर्वे में भी पकड़े जा चुके हैं। इसलिए जीपीएस मशीन से इस फर्जीवाड़ा का खुलासा होने पर डीसीओ ने इस तरह की गड़बडिय़ों का दोहराव रोकने के लिए न सिर्फ संबंधित कर्मचारी को सर्वे कार्य से बर्खास्त कर उसकी जीपीएस मशीन जब्त कर ली, अभी तक हुए सर्वे की दोहरी जांच कराने का निर्णय किया।
दो सर्वे कर्मचारियों पर पहले हो चुकी एफआईआर
बीते पेराई सत्र में गन्ना सट्टा सर्वे में फर्जीवाड़े को लेकर गन्ना पर्यवेक्षक कृष्णपाल यादव और गन्ना विभाग के सामान्य लिपिक हीरा लाल (सेवानिवृत्त हो चुके) के खिलाफ कांट थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। रोजा मिल के जरावन सर्कल से संबद्ध सिकंदरपुर खुर्द गांव में शिकायतों पर हुई जांच में पाया गया था कि दोनों कर्मचारियों ने कुछ किसानों के सट्टों पर गांव में उनके नाम वास्तविक कृषि योग्य भूमि के सापेक्ष गन्ना रकबा ज्यादा दर्ज किया। जांच में कई ऐसे किसान भी पाए जिनके पास कृषि योग्य जमीन नहीं होने पर भी अभिलेखों में उनका मनगढ़ंत गन्ना रकबा दर्ज कर लिया गया। चूंकि, कर्मचारियों ने किसानों से प्राप्त झूठे घोषणा पत्रों के आधार पर उनके नाम सर्वे सूची में शामिल किए। इसलिए सिकंदरपुर खुर्द समेत अन्य कई गांवों के करीब 50 किसानों को विभाग ने नोटिस जारी किए और संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर उन्हेें काली सूची में डाल दिया था। यही नहीं, सट्टा संचालन में लापरवाही के अन्य मामले प्रमाणित होने पर निगोही गन्ना विकास परिषद के पर्यवेक्षक हरवीर सिंह एवं राम प्रताप गंगवार, रोजा गन्ना विकास परिषद के पर्यवेक्षक राम औतार एवं अशोक कुमार और तिलहर गन्ना विकास परिषद के पर्यवेक्षक सत्येंद्र वाजपेयी को कार्रवाई संबंधी नोटिस जारी किए गए थे।
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इस वर्ष जिले के 1970 गन्ना ग्रामों के 95 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे में फर्जीवाड़ा रोकने को एक समिति क्षेत्र के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से दूसरे क्षेत्र में किए गए सर्वे की क्रॉस चेकिंग कराई जाएगी और इसके लिए संबंधित स्टाफ को सर्वे सत्यापन लक्ष्य दिया जा चुका है। जो किसान झूठे घोषणा पत्रों के सहारे सर्वे में फर्जीवाड़ा करते हैं, वस्तुत: वह गन्ना माफिया हैं और उनसे भी कड़ाई से निपटा जाएगा। -डॉ. खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी
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बुधवार को जिला गन्ना अधिकारी डॉ. खुशीराम भार्गव ने रोजा मिल क्षेत्र के गांव दिलावरपुर और हेतमपुर में सर्वे कार्य का निरीक्षण किया। तब उन्होंने पाया कि क्षेत्रीय गन्ना समिति के कर्मचारी सर्वेश कुमार ने अभिलेखों मेें दोनों गांवों के पांच-पांच किसानों के नाम ऐसे खेत दर्ज कर दिए, जिनमें गन्ना फसल बोई ही नहीं गई है। यानी खेत खाली पड़े हैं। चूंकि ऐसे मामले पिछले साल के पेराई सत्र में हुए गन्ना सर्वे में भी पकड़े जा चुके हैं। इसलिए जीपीएस मशीन से इस फर्जीवाड़ा का खुलासा होने पर डीसीओ ने इस तरह की गड़बडिय़ों का दोहराव रोकने के लिए न सिर्फ संबंधित कर्मचारी को सर्वे कार्य से बर्खास्त कर उसकी जीपीएस मशीन जब्त कर ली, अभी तक हुए सर्वे की दोहरी जांच कराने का निर्णय किया।
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दो सर्वे कर्मचारियों पर पहले हो चुकी एफआईआर
बीते पेराई सत्र में गन्ना सट्टा सर्वे में फर्जीवाड़े को लेकर गन्ना पर्यवेक्षक कृष्णपाल यादव और गन्ना विभाग के सामान्य लिपिक हीरा लाल (सेवानिवृत्त हो चुके) के खिलाफ कांट थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। रोजा मिल के जरावन सर्कल से संबद्ध सिकंदरपुर खुर्द गांव में शिकायतों पर हुई जांच में पाया गया था कि दोनों कर्मचारियों ने कुछ किसानों के सट्टों पर गांव में उनके नाम वास्तविक कृषि योग्य भूमि के सापेक्ष गन्ना रकबा ज्यादा दर्ज किया। जांच में कई ऐसे किसान भी पाए जिनके पास कृषि योग्य जमीन नहीं होने पर भी अभिलेखों में उनका मनगढ़ंत गन्ना रकबा दर्ज कर लिया गया। चूंकि, कर्मचारियों ने किसानों से प्राप्त झूठे घोषणा पत्रों के आधार पर उनके नाम सर्वे सूची में शामिल किए। इसलिए सिकंदरपुर खुर्द समेत अन्य कई गांवों के करीब 50 किसानों को विभाग ने नोटिस जारी किए और संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर उन्हेें काली सूची में डाल दिया था। यही नहीं, सट्टा संचालन में लापरवाही के अन्य मामले प्रमाणित होने पर निगोही गन्ना विकास परिषद के पर्यवेक्षक हरवीर सिंह एवं राम प्रताप गंगवार, रोजा गन्ना विकास परिषद के पर्यवेक्षक राम औतार एवं अशोक कुमार और तिलहर गन्ना विकास परिषद के पर्यवेक्षक सत्येंद्र वाजपेयी को कार्रवाई संबंधी नोटिस जारी किए गए थे।
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इस वर्ष जिले के 1970 गन्ना ग्रामों के 95 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे में फर्जीवाड़ा रोकने को एक समिति क्षेत्र के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से दूसरे क्षेत्र में किए गए सर्वे की क्रॉस चेकिंग कराई जाएगी और इसके लिए संबंधित स्टाफ को सर्वे सत्यापन लक्ष्य दिया जा चुका है। जो किसान झूठे घोषणा पत्रों के सहारे सर्वे में फर्जीवाड़ा करते हैं, वस्तुत: वह गन्ना माफिया हैं और उनसे भी कड़ाई से निपटा जाएगा। -डॉ. खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी