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संपत्ति रजिस्टर गायब होने की प्रशासनिक जांच शुरू
शाहजहांपुर, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 09 Apr 2017 12:44 AM IST
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जांच
- फोटो : शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश
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मुगलकालीन विरासतों के शहर में नजूल की जमीनों समेत अन्य चल-अचल संपत्तियों का रिकार्ड रखने वाले संपत्ति रजिस्टर गायब होने के मामले की प्रशासनिक जांच शुरू होे गई। डीएम के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच टीम के साथ नगरपालिका परिषद पहुंचे एसडीएम सदर रामजी मिश्रा ने संपत्ति रजिस्टर की गुमशुदगी को लेकर अधिशासी अधिकारी मुनेंद्र सिंह राठौर को सवालों के घेरे मेें लिया तो वे बगले झांकने लगे।
बता दें कि संपत्ति रजिस्टर में नगरपालिका परिषद सीमा क्षेत्र में समस्त चल-अचल संपत्तियों का लेखा-जोखा रहता है। इसी रजिस्टर के आधार पर भवन कर, जल कर आदि का निर्धारण होता है। गत वर्ष हाउस टैक्स और वाटर टैक्स की वसूली नहीं होने का संज्ञान लेते हुए अनुसूचित जनमोर्चा के अध्यक्ष हरिनंदन स्वरूप ने आरटीआई के जरिये सवाल किया तो संपत्ति रजिस्टर गायब होने का खुलासा हुआ।
आरटीआई के जरिए जनमोर्चा नेता को नगरपालिका परिषद से उत्तर दिया गया कि संपत्ति रजिस्टर ढूंढ़ने पर भी मिल नहीं रहा है और इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराने को थाना सदर बाजार में दी गई तहरीर पर पुलिस मामले की जांच कर रही है। गत वर्ष तत्कालीन डीएम विजय किरन आनंद ने ईओ से संपत्ति रजिस्टर के बारे में आख्या भी तलब की थी, लेकिन कार्यवाही मुकाम तक पहुंचने से पहले उनका वाराणसी तबादला हो गया और मामला ठंडे बस्ते मेें चला गया।
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हाल ही में सूबे में भाजपा की सरकार बनने पर संपत्ति रजिस्टर की जांच को डीएम कर्ण सिंह चौहान ने अपनी अध्यक्षता में जांच टीम गठित कर दी। इस टीम में एसडीएम सदर के साथ अतिरिक्त मजिस्ट्रेट हरिशंकर यादव और तत्कालीन तहसीलदार सदर अबुल कलाम को सदस्य नामित किया था। तहसीलदार कलाम अब तिलहर में तैनात हैं, लेकिन संपत्ति रजिस्टर की जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाने को वे भी एसडीएम सदर के साथ नगरपालिका कार्यालय पहुंचे।
जांच के दौरान एसडीएम ने ऐसे कई सवाल दागे, जिनका ईओ के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। उन्होंने जानना चाहा कि संपत्ति रजिस्टर बनाया गया तो कहां हैं और नहीं बनाया गया तो क्यों। यह भी पूछा कि एफआईआर के सापेक्ष क्या कार्रवाई हुई और कोई कार्रवाई नहीं हुई तो वह तहरीर कहां है, जिसके आधार पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई। एसडीएम श्री मिश्रा के अनुसार ईओ मुनेंद्र राठौर ने दो दिवसीय अवकाश का हवाला देते हुए कहा कि कर्मचारियों के ड्यूटी पर आने के बाद इन सवालों की पड़ताल करके जांच टीम को अवगत कराएंगे।
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बता दें कि संपत्ति रजिस्टर में नगरपालिका परिषद सीमा क्षेत्र में समस्त चल-अचल संपत्तियों का लेखा-जोखा रहता है। इसी रजिस्टर के आधार पर भवन कर, जल कर आदि का निर्धारण होता है। गत वर्ष हाउस टैक्स और वाटर टैक्स की वसूली नहीं होने का संज्ञान लेते हुए अनुसूचित जनमोर्चा के अध्यक्ष हरिनंदन स्वरूप ने आरटीआई के जरिये सवाल किया तो संपत्ति रजिस्टर गायब होने का खुलासा हुआ।
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आरटीआई के जरिए जनमोर्चा नेता को नगरपालिका परिषद से उत्तर दिया गया कि संपत्ति रजिस्टर ढूंढ़ने पर भी मिल नहीं रहा है और इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराने को थाना सदर बाजार में दी गई तहरीर पर पुलिस मामले की जांच कर रही है। गत वर्ष तत्कालीन डीएम विजय किरन आनंद ने ईओ से संपत्ति रजिस्टर के बारे में आख्या भी तलब की थी, लेकिन कार्यवाही मुकाम तक पहुंचने से पहले उनका वाराणसी तबादला हो गया और मामला ठंडे बस्ते मेें चला गया।
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हाल ही में सूबे में भाजपा की सरकार बनने पर संपत्ति रजिस्टर की जांच को डीएम कर्ण सिंह चौहान ने अपनी अध्यक्षता में जांच टीम गठित कर दी। इस टीम में एसडीएम सदर के साथ अतिरिक्त मजिस्ट्रेट हरिशंकर यादव और तत्कालीन तहसीलदार सदर अबुल कलाम को सदस्य नामित किया था। तहसीलदार कलाम अब तिलहर में तैनात हैं, लेकिन संपत्ति रजिस्टर की जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाने को वे भी एसडीएम सदर के साथ नगरपालिका कार्यालय पहुंचे।
जांच के दौरान एसडीएम ने ऐसे कई सवाल दागे, जिनका ईओ के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। उन्होंने जानना चाहा कि संपत्ति रजिस्टर बनाया गया तो कहां हैं और नहीं बनाया गया तो क्यों। यह भी पूछा कि एफआईआर के सापेक्ष क्या कार्रवाई हुई और कोई कार्रवाई नहीं हुई तो वह तहरीर कहां है, जिसके आधार पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई। एसडीएम श्री मिश्रा के अनुसार ईओ मुनेंद्र राठौर ने दो दिवसीय अवकाश का हवाला देते हुए कहा कि कर्मचारियों के ड्यूटी पर आने के बाद इन सवालों की पड़ताल करके जांच टीम को अवगत कराएंगे।