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खनन माफिया पर कसा शिकंजा, जेसीबी-डंपर कब्जे में
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सिंधौली। मिट्टी खनन की सूचना पर गांव तिउलक पहुंची पुलिस टीम ने मौके से जेसीबी और एक डंपर को कब्जे में ले लिया, लेकिन इस दौरान खनन करने वाले मौके से भाग गए। पुलिस की इस कार्रवाई से खनन करने वालों में हड़कंप की स्थिति है। हालांकि पुलिस का कहना है कि खनन के कागज नहीं दिखाने पर कार्रवाई की जाएगी।
क्षेत्र मेें मिट्टी और खन्नौत नदी से रेत खनन का काम बड़े पैमाने पर हो रहा है। कोरोकुइयां नहर के किनारे बसे गांवों में कुछ माफिया किस्म के लोगों ने पूरा रेकैट तैैयार कर लिया है। बताते हैं कि इस मामले में पुलिस भी पूरी तरह से मिली हुई है। सबसे बड़े पैमाने पर खनन का काम वार्डर की चौकी महासिर क्षेत्र में होता है क्योंकि यहां किसी अधिकारी की नजर ही नहीं जाती। एक सप्ताह पहले पुलिस ने पसगनपुर घाट पर खन्नौत नदी से हो रहे खनन के दौरान छापेमारी कर एक ट्रैक्टर ट्रॉली को कब्जे लिया था। जिसे सीज कर दिया गया था। कुछ दिन तक तो खनन बंद रहा। इसके बाद फिर से खनन शुरू हो गया। वहीं मिट्टी का खनन भी व्यापक पैमाने पर हो रहा है। मिट्टी खनन के लिए गोरारायपुर, काजीपुर, पैना सुंदरनगर, सैंजना, ददियूरा आदि गांव पूरी तरह से बदनाम हैं। यहां रॉयल्टी के नाम पर भी खेल हो रहा है। अमर उजाला में खनन का मामला उजागर होने पर सिंधौली पुलिस ने सोमवार तड़के खनन क्षेत्रों में चेकिंग अभियान चलाया तो गांव तिउलक के पास खनन करते हुए कुछ लोग दिखाई दिए। पुलिस उन तक जैसे ही पहुंची, तभी वह लोग डंपर और जेसीबी मौके पर छोड़कर भाग गए। पुलिस ने यहां से एक जेेसीबी और डंपर को कब्जे में ले लिया, लेकिन देर शाम तक मामले में कार्रवाई नहीं की गई थी। थानाध्यक्ष जग नारायण पांडेय ने बताया कि मामले में जानकारी की जा रही है कि खनन के लिए अनुमति ली गई थी या नहीं। सही कागजात दिखाने पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
रात में निकलते हैं खनन करने वाले
अधिकारियों की नजरों से बचने के लिए खनन करने वाले देर रात 10 बजे के बाद निकलते हैं, उधर तड़के तीन से पांच बजे के बीच खनन करते हैं क्योंकि यह समय पुलिस का गश्त से लौटने का होता है। इसी का फायदा उठाते हुए धडल्ले से खनन करते हैं।
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क्षेत्र मेें मिट्टी और खन्नौत नदी से रेत खनन का काम बड़े पैमाने पर हो रहा है। कोरोकुइयां नहर के किनारे बसे गांवों में कुछ माफिया किस्म के लोगों ने पूरा रेकैट तैैयार कर लिया है। बताते हैं कि इस मामले में पुलिस भी पूरी तरह से मिली हुई है। सबसे बड़े पैमाने पर खनन का काम वार्डर की चौकी महासिर क्षेत्र में होता है क्योंकि यहां किसी अधिकारी की नजर ही नहीं जाती। एक सप्ताह पहले पुलिस ने पसगनपुर घाट पर खन्नौत नदी से हो रहे खनन के दौरान छापेमारी कर एक ट्रैक्टर ट्रॉली को कब्जे लिया था। जिसे सीज कर दिया गया था। कुछ दिन तक तो खनन बंद रहा। इसके बाद फिर से खनन शुरू हो गया। वहीं मिट्टी का खनन भी व्यापक पैमाने पर हो रहा है। मिट्टी खनन के लिए गोरारायपुर, काजीपुर, पैना सुंदरनगर, सैंजना, ददियूरा आदि गांव पूरी तरह से बदनाम हैं। यहां रॉयल्टी के नाम पर भी खेल हो रहा है। अमर उजाला में खनन का मामला उजागर होने पर सिंधौली पुलिस ने सोमवार तड़के खनन क्षेत्रों में चेकिंग अभियान चलाया तो गांव तिउलक के पास खनन करते हुए कुछ लोग दिखाई दिए। पुलिस उन तक जैसे ही पहुंची, तभी वह लोग डंपर और जेसीबी मौके पर छोड़कर भाग गए। पुलिस ने यहां से एक जेेसीबी और डंपर को कब्जे में ले लिया, लेकिन देर शाम तक मामले में कार्रवाई नहीं की गई थी। थानाध्यक्ष जग नारायण पांडेय ने बताया कि मामले में जानकारी की जा रही है कि खनन के लिए अनुमति ली गई थी या नहीं। सही कागजात दिखाने पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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रात में निकलते हैं खनन करने वाले
अधिकारियों की नजरों से बचने के लिए खनन करने वाले देर रात 10 बजे के बाद निकलते हैं, उधर तड़के तीन से पांच बजे के बीच खनन करते हैं क्योंकि यह समय पुलिस का गश्त से लौटने का होता है। इसी का फायदा उठाते हुए धडल्ले से खनन करते हैं।
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