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Shahjahanpur News: लखनऊ-दिल्ली हाईवे...ओवरब्रिज पर चूके तो हादसा

Mon, 23 Jan 2023 07:30 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 23 Jan 2023 07:30 AM IST
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Accident on Lucknow-Delhi Highway...overbridge
शाहजहांपुर। लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर तिलहर से लेकर हरदोई बाईपास तक कई ओवरब्रिज और अंडरपास हैं। सर्विस लेन से जुड़ने वाले हिस्सों पर संकेतक न लगे होने से आए दिन हादसे हो रहे हैं। लेकिन एनएचएआई का इस ओर कभी ध्यान नहीं गया।
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शाहजहांपुर से मीरानपुर कटरा तक हाईवे के पुलों के दोनों छोर पर एनएचएआई ने ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की है, जिससे वाहन चालक को आगे पुल होने का पता चल सके। कुछ दिनों पूर्व हादसे में एक ईंट भट्ठा कारोबारी की पत्नी की मौत हो गई। माना जा रहा है कि गति सीमा नियंत्रण संकेतक और ओवर ब्रिज से पहले स्पीड ब्रेकर बने होते तो तिलहर में ओवरब्रिज पर ओवरटेक कर रहे वाहन से बचने के फेर में कारोबारी की कार पुल से नीचे नहीं गिरती।
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बरेली मोड़ से हरदोई बाईपास तक भी पुलों पर नहीं लगे संकेतक
रौसर कोठी। हाईवे के बरेली मोड़ वाले ओवरब्रिज के दोनों ओर के ठिकाने एक्सीडेंट जोन बन गए हैं। जहां सर्विस लेन हाईवे से मिलती हैं, वहां अक्सर विपरीत दिशा के वाहन सामने आ जाते हैं। बरेली मोड़ से रोजा की ओर बढ़ते ही चांदापुर-भरगवां मार्ग वाले चौराहे पर भी कोई संकेतक नहीं है, जबकि वहां रोजाना सैकड़ों लोगों को हाईवे क्रॉस करना पड़ता है। रॉयन इंटरनेशनल स्कूल के सामने से हरदोई बाईपास ओवरब्रिज तक दोनों ओर जहां सर्विस लेन मिलती हैं, वहां भी कोई संकेतक लगाने की जरूरत नहीं समझी गई है। इस कारण पुल से तेज रफ्तार में उतरने वाले वाहन अक्सर सर्विस लेन से मुड़ने वाले वाहनों से टकरा जाते हैं।
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तिलहर में हाईवे पर दुर्घटना के कई कई ठिकाने
तिलहर। सरयू पुलिया मोड़ पर ओवरब्रिज बन गया है लेकिन नीचे सर्विस लेन से नगर के अंदर आने-जाने के लिए कहीं कोई संकेतक नहीं लगे हैं। दो माह पहले इसी जगह एक कार पलटने से कई लोग घायल हो गए थे। शहीद पार्क के सामने गोल चौराहा बनाया गया है, लेकिन कोई संकेतक नहीं होने से दुर्घटना हो सकती है। नगर में पूर्वी तिराहा ज्यादा खतरनाक हो गया है, क्योंकि वहां हाईवे की तुलना में नगर की सड़क काफी नीची है। वाहनों को हाईवे पर जाने के लिए तीखा घुमाव लेना पड़ता है। ऐसे में शाहजहांपुर की ओर से आने वाले वाहनों से अक्सर दुर्घटनाएं हो रही हैं। हाईवे पर गांव बिलहरी से तिलहर के लिए आने पर सड़क आगे बंद है। वहां पत्थर लगा कर सड़क को मोड़ दिया गया है, लेकिन संकेतक नहीं है। आगे बढ़ने पर कछियानी खेड़ा मंदिर से पश्चिम दिशा में दो मार्ग जोड़ दिए गए हैं, लेकिन वहां भी कोई संकेतक नहीं है। एसडीएम राशि कृष्णा और नगरपालिका ईओ सर्वेश कुशवाहा ने नगर सीमा क्षेत्र और राष्ट्रीय राजमार्ग पर संकेतक लगवाने का आश्वासन दिया थी, लेकिन हुआ कुछ नहीं।
हाईवे के पुलों से गुजरते समय वाहनों में एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ दुर्घटनाएं बढ़ा रहीं हैं। तिलहर मेें भट्ठा व्यवसायी के परिवार के साथ हुए हादसे का गंभीरता से संज्ञान लेकर जिले की सीमा में हाईवे के सभी पुलों पर इस तरह के हादसे रोकने के लिए एनएचएआई के अधिकारियों से बात की जा रही है। पुलों के दोनों ओर गति सीमा नियंत्रण और ओवरटेकिंग पर प्रतिबंध वाले संकेतक लगाने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
- रामसेवक द्विवेदी, नोडल अधिकारी राष्ट्रीय राजमार्ग/एडीएम प्रशासन
पुलों से 100 मीटर पहले लगें संकेतक
हाईवे की मुख्य लेन से सर्विस रोड जहां पर जोड़ी गईं हैं, वहां संकेतक लगाए जाने बहुत जरूरी हैं। ऐसे स्थानों पर जेब्रा लाइनों की पेंटिंग भी कराई जाए और सभी पुलों के दोनों ओर कम से कम 100 मीटर पहले गति सीमा के संकेतक लगाए जाएं ताकि तेज रफ्तार वाहनों की गति नियंत्रित करने का चालकों को पर्याप्त समय मिल सके। - विनोद वर्मा, सराफा कारोबारी
बहुत डर लगता है हाईवे पर सफर में
कारोबार के सिलसिले में बाहर जाते समय हाईवे पर चलते वक्त बहुत डर लगता है। शहर के आसपास और जिले की सीमा में हाईवे पर कई असुरक्षित स्थान हैं। पुलों पर किसी भी दशा में वाहनों की ओवरटेकिंग नहीं होनी चाहिए। पुलों के आसपास ओवरटेकिंग पर प्रतिबंध के आशय वाले संकेतक लगाए जाएं तो हादसे कम होंगे। - वेद प्रकाश गुप्ता, जिलाध्यक्ष, उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल (कंछल गुट)
डिवाडर के कट भी है खतरनाक
राष्ट्रीय राजमार्ग पर तमाम स्थानों पर डिवाइडर में कट लगे हुए हैं, उन्हें तत्काल बंद किया जाए। डिवाइडर की ऊंचाई भी बढ़ानी चाहिए। संकेतक के साथ रिफ्लेक्टर पट्टी भी लगनी चाहिए, ताकि कोई भी इधर से उधर सड़क पार न कर सके। वाहन लेकर चलने में दुर्घटना होने का भय बना रहता है। जो वाहन चालक पहली वार इस हाईवे से गुजरते हैं, उन्हें तो संकेतक न होने से बहुत दिक्कत होती है। - तरुण कुमार मिश्र, मारुति एसोसिएशन संचालक

कैट आई रिफ्लेक्टर लगाए जाएं
डिवाइडर और पुलों की रेलिंग पर रेडियम तथा सड़कों पर कैट-आई रिफ्लेक्टर लगने चाहिए, ताकि रात के समय वाहन चालकों को सड़क, डिवाइडर और पुलों की सही स्थिति का पता लग सके। मेरे डेढ़ दर्जन से अधिक वाहन चल रहे हैं। मुरादाबाद-रामपुर की ओर सड़कों पर कैट-आई लगी हुईं हैं। यहां पर भी तत्काल लगनी चाहिए और सड़क पर खुले कट तुरंत बंद होने चाहिए। - पंकज गुप्ता, प्रदेश सचिव राइस मिल एसोसिएशन।
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