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शंटिंग कर रहे इंजन में फंसकर रेलकर्मी की मौत
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
Updated Fri, 12 Dec 2014 01:07 AM IST
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रामसरन अपनी मोपेड समेत इंजन में बुरी तरह फंस गए थे और काफी दूर तक घिसटते हुए गए। उनके साथ हेल्पर रघुवीर भी था, मगर सौभाग्य से कुछ कदम पीछे रहकर वह लाइन पार कर रहा था, इसलिए बच गया।
रामसरन क्षेत्र के गांव बल्लिया के रहेन वाले थे और तकनीकी ग्रेड तृतीय के पद पर कार्यरत थे। बिजली अभियंता संजय सक्सेना ने बताया कि बुधवार रात करीब दस बजे रेलवे साइडिंग के प्लेटफार्म संख्या तीन के पास फीडर पैनल में आई तकनीकी खराबी को ठीक करने के लिए रामसरन और रघुवीर को भेजा गया था। लौटते समय लाइन पार करना थी, सो रघुवीर मोपेड से उतर गया था।
रघुवीर के मुताबिक रामसरन लाइन पार कर पाते कि उससे पहले ही इंजन आ गया। इस पर रामसरन ने शंटर और शंटिग स्टाफ को रूकने के लिए आवाज लगाई थी, मगर किसी ने उनकी आवाज नहीं सुनी। रामसरन बुरी तरह लहूलुहान हो गए। हादसे की सूचना पर सीनियर सेक्शन इंजीनियर संजय सक्सेना, ओपी सिंह और अवधेश सक्सेना, रेलवे के डॉ. संजय राय को लेकर मौके पर पहुंचे। रामसरन को गंभीर हालत में जिला अस्पताल भेजा गया, जहां मृत घोषित कर दिया गया। जीआरपी ने शव का पोस्टमार्टम कराया। बृहस्पतिवार को रेलवे प्रशासन की ओर से प्रवर हित निरीक्षक संजय माथुर ने रामसरन के घर पहुंचकर संवेदना व्यक्त की और पांच हजार रुपये घरवालों को तत्काल राहत राशि के रूप में दिए।
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पिता ही नहीं, मां का भी साया उठ गया बच्चों से
ड्यूटी के दौरान हादसे का शिकार हुए रामसरन अपने बच्चों का अकेला परवरिश करने वाला था। रामसरन की पत्नी माया का निधन करीब दस साल पहले हो चुका है। चार बेटियों में रामसरन केवल एक ही की शादी कर पाया था। दो बेटों में बड़ा 20 वर्षीय विनीत है और दूसरा अनीत अभी 12 साल का ही है। पत्नी के निधन के बाद से रामसरन इन बच्चों के लिए माता-पिता दोनों की ही जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहा था।
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रामसरन क्षेत्र के गांव बल्लिया के रहेन वाले थे और तकनीकी ग्रेड तृतीय के पद पर कार्यरत थे। बिजली अभियंता संजय सक्सेना ने बताया कि बुधवार रात करीब दस बजे रेलवे साइडिंग के प्लेटफार्म संख्या तीन के पास फीडर पैनल में आई तकनीकी खराबी को ठीक करने के लिए रामसरन और रघुवीर को भेजा गया था। लौटते समय लाइन पार करना थी, सो रघुवीर मोपेड से उतर गया था।
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रघुवीर के मुताबिक रामसरन लाइन पार कर पाते कि उससे पहले ही इंजन आ गया। इस पर रामसरन ने शंटर और शंटिग स्टाफ को रूकने के लिए आवाज लगाई थी, मगर किसी ने उनकी आवाज नहीं सुनी। रामसरन बुरी तरह लहूलुहान हो गए। हादसे की सूचना पर सीनियर सेक्शन इंजीनियर संजय सक्सेना, ओपी सिंह और अवधेश सक्सेना, रेलवे के डॉ. संजय राय को लेकर मौके पर पहुंचे। रामसरन को गंभीर हालत में जिला अस्पताल भेजा गया, जहां मृत घोषित कर दिया गया। जीआरपी ने शव का पोस्टमार्टम कराया। बृहस्पतिवार को रेलवे प्रशासन की ओर से प्रवर हित निरीक्षक संजय माथुर ने रामसरन के घर पहुंचकर संवेदना व्यक्त की और पांच हजार रुपये घरवालों को तत्काल राहत राशि के रूप में दिए।
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ड्यूटी के दौरान हादसे का शिकार हुए रामसरन अपने बच्चों का अकेला परवरिश करने वाला था। रामसरन की पत्नी माया का निधन करीब दस साल पहले हो चुका है। चार बेटियों में रामसरन केवल एक ही की शादी कर पाया था। दो बेटों में बड़ा 20 वर्षीय विनीत है और दूसरा अनीत अभी 12 साल का ही है। पत्नी के निधन के बाद से रामसरन इन बच्चों के लिए माता-पिता दोनों की ही जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहा था।