फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   ab rich inter college

शहीद अशफाकउल्लाह खां और पं. रामप्रसाद बिस्मिल की दोस्ती का साक्षी है एबी रिच इंटर कॉलेज

Wed, 24 Nov 2021 01:29 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 24 Nov 2021 01:29 AM IST
विज्ञापन
ab rich inter college
शाहजहांपुर का एबी रिच इंटर कॉलेज । संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। शहर के मध्य में स्थित मिशन स्कूल अमर शहीद काकोरी कांड के नायक अशफाउल्ला खां और पं. रामप्रसाद बिस्मिल की दोस्ती का साक्षी और लगभग डेढ़ सौ सालों के इतिहास को खुद में समेटे हुए है। आज विद्यालय की बिल्डिंग भले ही जर्जर हो गई हो लेकिन 150 छात्राओं समेत 650 विद्यार्थी इंटर तक की बेहद कम फीस में शिक्षा पा रहे हैं।
विज्ञापन

एबी रिच इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल मिहिर फिलिप्स ने बताया कि मिशन स्कूल की स्थापना लोधीपुर में सन 1867 में एक मिशनरी के द्वारा की गई थी। कुछ ही वर्षों में यह मिशन जूनियर हाईस्कूल शाहजहांपुर की जनता में मिशन हाईस्कूल के नाम से जाना जाने लगा। बाद में यह स्कूल लोधीपुर से स्थानांतरित होकर वहां पर आ गया, जहां पर वर्तमान में चित्रा टॉकीज भवन है। सन 1913-14 के आसपास एबी लियोनार्ड नामक एक मिशनरी अमेरिका से आए।
विज्ञापन

उन्होंने खपरैल पड़े भवन को देखा तो नए भवन के लिए प्रयास करने शुरू कर दिए। सन 1915 में एबी लियोनार्ड रिच के नाम से वर्तमान विद्यालय भवन की नींव डाली गई। विद्यालय भवन के निर्माण के लिए मैथोडिस्ट चर्च ने 40000 रुपये, अमेरिका के कुछ दानकर्ता मित्रों ने 13000 रुपये नकद और 10000 रुपये विद्यालय के फर्नीचर के लिये प्रदान किये थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

डिस्ट्रिक्ट सुपरिटेंडेंट मैथोडिस्ट चर्च डॉ. वेस्ट के मार्गदर्शन में विद्यालय का निर्माण कराया गया। यह विद्यालय एक वर्ष में बनकर तैयार हो गया। सन 1919 में एक बार फिर मिशन स्कूल का स्थानांतरण चित्रा टाकीज से इस नये भवन में हो गया और तब से ही सभी छात्र यहां शिक्षा गृहण कर रहे हैं। तब यह स्कूल कलकत्ता विश्वविद्यालय से संबद्ध था और हाईस्कूल के छात्रों की परीक्षाएं व परीक्षाफल कलकत्ता विश्वविद्यालय से ही आता था।
सन 1925 में ब्रिटिश सरकार ने उत्तर प्रदेश इलाहाबाद में यूपी बोर्ड की स्थापना की तब यह यूपी बोर्ड से संबंद्घ हुआ। अब भी कक्षा आठ तक किसी बच्चे से शुल्क नहीं लिया जाता। इसके बाद की कक्षाओं में बहुत ही कम शुल्क लेकर बच्चों को पढ़ाया जाता है।
स्वतंत्रता संग्राम का गवाह एबी रिच इंटर कॉलेज
काकोरी कांड के महानायक अमर शहीद अशफाक उल्ला खां और पं. राम प्रसाद बिस्मिल इसी विद्यालय के छात्र थे। 1919 में दोनों कक्षा सात में पढ़ते थे। यहीं पर दोनों के बीच दोस्ती प्रगाढ़ हुई। प्रिंसिपल मिहिर फिलिप्स बताते हैं कि 1919 के स्कूल रजिस्टर के मुताबिक अशफाक उल्ला खां कक्षा आठ-बी के छात्र थे जबकि पं. रामप्रसाद बिस्मिल कक्षा सात-बी के छात्र थे। दोनों लोग क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल रहते थे।
इसलिए एक बार जब पुलिस उन्हें पकड़ने कॉलेज आई तो प्रिंसिपल रुफस चरन ने उसे गेट पर ही रोक दिया। तब तक अशफाक और बिस्मिल वहां से चले गए। सन 1925 में काकोरी कांड में दोनों की भूमिका के बाद उन्हें ब्रिटिश सरकार ने फांसी की सजा दी थी। इसके अलावा प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के समय यहां के पांच छात्रों और तीन शिक्षकों ने ब्रिटिश सरकार की ओर से हिस्सा लिया। विद्यालय का स्टाफ और बच्चे अशफाक और बिस्मिल की परंपरा पर आज भी गर्व करते हैं।

बिल्डिंग जर्जर, सरकारी मदद का इंतजार
प्रिंसिपल मिहिर फिलिप्स से ने बताया कि अल्पसंख्यक संस्थान होने की वजह से सरकार सिर्फ शिक्षकों को सेलरी देती है। बिल्डिंग बहुत पुरानी होने के कारण जर्जर हो चुकी है। स्टाफ आपस में सहयोग कर निर्माण और सुविधा के काम कराता रहता है। मगर यह पर्याप्त नहीं है। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना समेत कई इंजीनियर-डॉक्टर इसी स्कूल से पढ़कर निकले हैं। सरकार की ओर से मदद मिले तो जिले का सबसे पुराना शैक्षिक संस्थान भी आगे बढ़ सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed