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नाइजीरिया के लोगों को आलम सप्लाई करता था हेरोइन
Shahjahanpur
Updated Wed, 21 May 2014 05:31 AM IST
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जलालाबाद (शाहजहांपुर)। खुफिया पुलिस की जांच में सामने आया है कि दिल्ली में सोमवार को पकड़ा गया आलम उर्फ डॉक्टर नाइजीरियन लोगों को हेरोइन सप्लाई करता था। माल्हूपुर में बने इंदिरा आवास में रहने वाले उसके परिवार को देखकर लगता है कि आलम ने या तो घर के लोगों से ताल्लुक खत्म कर रखा था, या फिर वह नया-नया ही इस धंधे में उतरा था। वरना उसके घर की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं होती।
आलम का यह दिया गया बयान भी गलत लगता है कि उस पर पहले अफीम की खेती का लाइसेंस था। गांव के प्रधान समेत अन्य लोगों का कहना है कि उस पर लाइसेंस कभी था ही नहीं। न ही उसने कभी अफीम की खेती की। ऐसे में शक यह है कि यहां अफीम और उससे बनने वाली हेरोइन का चोरी छिपे धंधा करने वालों से ही वह खरीदता था। अब उनके नाम छुपाने के लिए ही आलम ने झूठ बोला। आलम तो कभी झोलाछाप डॉक्टर के रूप में एक दुकान चलाता था। दिल्ली के नारकोटिक्स विभाग की टीम इस बात का पता लगाने में जुटी भी है, इसलिए ही विभाग के लोग उसे रविवार को माल्हूपुर गांव लेकर भी आए थे। हालांकि पड़ताल से कोई खास सुराग उन्हें नहीं मिला।
आलम ने अपने परिवार से काफी समय से ताल्लुक न के बराबर कर रखा था, ऐसी चर्चा है। इंदिरा आवास में उसकी पत्नी और बच्चे रहते जरूर हैं, मगर वे भी कई-कई दिन नजर नहीं आते। आलम को तो लंबे समय से माल्हूपुर में नहीं देखा गया। मां की काफी समय पहले मौत हो चुकी है, बुजुर्ग पिता और भाई आलम के परिवार से अलग रहते हैं।
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पहले भी पकड़े गए हैं जलालाबाद के लोग
-कस्बा और आसपास मादक पदार्थों का धंधा फैला है लंबे समय से
जलालाबाद। नगर तथा आसपास क्षेत्र के कई गांवों में अफीम, स्मैक तथा हेरोइन का कारोबार लंबे समय से चलता आ रहा है। कई बार पकड़े जाने तथा प्रशासन की सख्ती के चलते इस धंधे से जुड़े लोग बस अपना कार्यक्षेत्र बदलते रहे हैं। इसकी पुष्टि इस इलाके के लोगों की विभिन्न प्रांतों में पकड़े जाने के दौरान कई बार हो चुकी है।
गांव माल्हूपुर के एक युवक के दिल्ली मेें हेरोइन की तस्करी के आरोप मे पकड़े जाने के बाद यहां आई दिल्ली पुलिस की नारकोटिक्स विभाग की टीम ने माल्हूपुर के अलावा नगर के मोहल्ला नौसारा में छापामारी कर एक युवक को गिरफ्तार करके यहां से ले गई थी। इस घटना से बाद एक बार फिर चर्चा में आ गई कि अफीम के धंधे से जुड़े लोग भले ही क्षेत्र छोड़ गए हो, लेकिन अफिम का काम लगातार चल रहा है। करीब एक दशक पहले अफीम के करोबार की वजह से जलालाबाद क्षेत्र काफी चर्चा में रहा था। कस्बे के आसपास के गांव कुदौली, नगरिया, कोला, कलक्टरगंज, सुगसुगी, पठकपुरा, धियरपुरा, माल्हूपुर समेत कई गांवों में स्मैक और अफीम का करोबार चोरी छुपे जारी है। इतना जरूर है कि इस धंधे से जुड़े बड़े कारोबारी स्थान बदलकर दूसरी जगह से संचालित कर रहे हैं। माल्हूपुर के आलम के अलावा पिछले पांच सालों में कस्बे और आसपास के गांवों के लोग तस्करी करते देश के विभिन्न प्रांतों में जैसे राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र आदि में पकड़े जा चुके हैं। इनमें गांव कुदौली और नगरिया स्मैक के कारोबार के लिए बदनाम है।
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आलम का यह दिया गया बयान भी गलत लगता है कि उस पर पहले अफीम की खेती का लाइसेंस था। गांव के प्रधान समेत अन्य लोगों का कहना है कि उस पर लाइसेंस कभी था ही नहीं। न ही उसने कभी अफीम की खेती की। ऐसे में शक यह है कि यहां अफीम और उससे बनने वाली हेरोइन का चोरी छिपे धंधा करने वालों से ही वह खरीदता था। अब उनके नाम छुपाने के लिए ही आलम ने झूठ बोला। आलम तो कभी झोलाछाप डॉक्टर के रूप में एक दुकान चलाता था। दिल्ली के नारकोटिक्स विभाग की टीम इस बात का पता लगाने में जुटी भी है, इसलिए ही विभाग के लोग उसे रविवार को माल्हूपुर गांव लेकर भी आए थे। हालांकि पड़ताल से कोई खास सुराग उन्हें नहीं मिला।
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आलम ने अपने परिवार से काफी समय से ताल्लुक न के बराबर कर रखा था, ऐसी चर्चा है। इंदिरा आवास में उसकी पत्नी और बच्चे रहते जरूर हैं, मगर वे भी कई-कई दिन नजर नहीं आते। आलम को तो लंबे समय से माल्हूपुर में नहीं देखा गया। मां की काफी समय पहले मौत हो चुकी है, बुजुर्ग पिता और भाई आलम के परिवार से अलग रहते हैं।
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पहले भी पकड़े गए हैं जलालाबाद के लोग
-कस्बा और आसपास मादक पदार्थों का धंधा फैला है लंबे समय से
जलालाबाद। नगर तथा आसपास क्षेत्र के कई गांवों में अफीम, स्मैक तथा हेरोइन का कारोबार लंबे समय से चलता आ रहा है। कई बार पकड़े जाने तथा प्रशासन की सख्ती के चलते इस धंधे से जुड़े लोग बस अपना कार्यक्षेत्र बदलते रहे हैं। इसकी पुष्टि इस इलाके के लोगों की विभिन्न प्रांतों में पकड़े जाने के दौरान कई बार हो चुकी है।
गांव माल्हूपुर के एक युवक के दिल्ली मेें हेरोइन की तस्करी के आरोप मे पकड़े जाने के बाद यहां आई दिल्ली पुलिस की नारकोटिक्स विभाग की टीम ने माल्हूपुर के अलावा नगर के मोहल्ला नौसारा में छापामारी कर एक युवक को गिरफ्तार करके यहां से ले गई थी। इस घटना से बाद एक बार फिर चर्चा में आ गई कि अफीम के धंधे से जुड़े लोग भले ही क्षेत्र छोड़ गए हो, लेकिन अफिम का काम लगातार चल रहा है। करीब एक दशक पहले अफीम के करोबार की वजह से जलालाबाद क्षेत्र काफी चर्चा में रहा था। कस्बे के आसपास के गांव कुदौली, नगरिया, कोला, कलक्टरगंज, सुगसुगी, पठकपुरा, धियरपुरा, माल्हूपुर समेत कई गांवों में स्मैक और अफीम का करोबार चोरी छुपे जारी है। इतना जरूर है कि इस धंधे से जुड़े बड़े कारोबारी स्थान बदलकर दूसरी जगह से संचालित कर रहे हैं। माल्हूपुर के आलम के अलावा पिछले पांच सालों में कस्बे और आसपास के गांवों के लोग तस्करी करते देश के विभिन्न प्रांतों में जैसे राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र आदि में पकड़े जा चुके हैं। इनमें गांव कुदौली और नगरिया स्मैक के कारोबार के लिए बदनाम है।