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राशन कार्डों की डाटा फीडिंग से कार्यदायी संस्था उदासीन
Shahjahanpur
Updated Sat, 30 Nov 2013 05:47 AM IST
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शाहजहांपुर। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के कंप्यूटरीकरण के लिए राशन कार्डों के डिजिटाइजेशन और नए राशन कार्ड जारी करने का ठेका लेने वाली कार्यदायी संस्था मेसर्स शेखर एंड मूवर्स काम शुरू करने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रही है। डीएम राजमणि यादव ने इसे गंभीरता से लेते हुए संस्था केसंचालक को नियत प्रतिभूति धनराशि वसूल करके विधिक कार्रवाई करने का चेतावनी पत्र जारी किया है।
बता दें कि तहसील सदर और जलालाबाद क्षेत्र में राशन कार्डों का डिजिटाइजेशन कराने के लिए मेसर्स शेखर एंड मूवर्स ने निविदा डाली थी। प्रशासन ने फर्म को ठेका देकर पांच लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा कराने का निर्देश दिया। साथ ही डीएम ने कार्य आदेश जारी किया, लेकिन फर्म ने काम शुरू नहीं किया और न ही बैंक गारंटी जमा की। गत 12 नवंबर को डीएसओ बीके शुक्ला ने फर्म संचालक को जिला सूचना विज्ञान अधिकारी से संपर्क करकेवांक्षित क्षमता के कंप्यूटर पर कार्य शुरू करने का निर्देश दिया।
इसके विपरीत कार्यदायी संस्था निष्क्रिय रही। उल्टे संस्था के संचालक ने 21 नवंबर को डीएम को प्रतिवेदन देकर बैंक गारंटी समाप्त करने का अनुरोध किया। डीएम ने इस पर सहानुभूति पूर्वक निर्णय करके बैंक गारंटी की धनराशि पांच से घटाकर तीन लाख रुपये कर दी। यह आदेश लेकर डीएसओ दफ्तर का पत्रवाहक करन लाल लेकर गया, लेकिन संस्था के संचालक ने उसे लेने से इनकार कर दिया।
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पत्रवाहक करन लाल ने इस आशय की लिखित रिपोर्ट दी तो प्रशासन का धैर्य जवाब दे गया। डीएम ने संस्था के संचालक को भेजे चेतावनी पत्र में कहा है कि यह रवैया सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने एवं अन्य सुसंगत विधिक धाराओं केतहत दंडनीय कृत्य है। इसलिए कार्य आदेश के अनुसार तत्काल काम शुरू नहीं किए जाने पर बैंक गारंटी की धनराशि वसूल करके विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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बता दें कि तहसील सदर और जलालाबाद क्षेत्र में राशन कार्डों का डिजिटाइजेशन कराने के लिए मेसर्स शेखर एंड मूवर्स ने निविदा डाली थी। प्रशासन ने फर्म को ठेका देकर पांच लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा कराने का निर्देश दिया। साथ ही डीएम ने कार्य आदेश जारी किया, लेकिन फर्म ने काम शुरू नहीं किया और न ही बैंक गारंटी जमा की। गत 12 नवंबर को डीएसओ बीके शुक्ला ने फर्म संचालक को जिला सूचना विज्ञान अधिकारी से संपर्क करकेवांक्षित क्षमता के कंप्यूटर पर कार्य शुरू करने का निर्देश दिया।
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इसके विपरीत कार्यदायी संस्था निष्क्रिय रही। उल्टे संस्था के संचालक ने 21 नवंबर को डीएम को प्रतिवेदन देकर बैंक गारंटी समाप्त करने का अनुरोध किया। डीएम ने इस पर सहानुभूति पूर्वक निर्णय करके बैंक गारंटी की धनराशि पांच से घटाकर तीन लाख रुपये कर दी। यह आदेश लेकर डीएसओ दफ्तर का पत्रवाहक करन लाल लेकर गया, लेकिन संस्था के संचालक ने उसे लेने से इनकार कर दिया।
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पत्रवाहक करन लाल ने इस आशय की लिखित रिपोर्ट दी तो प्रशासन का धैर्य जवाब दे गया। डीएम ने संस्था के संचालक को भेजे चेतावनी पत्र में कहा है कि यह रवैया सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने एवं अन्य सुसंगत विधिक धाराओं केतहत दंडनीय कृत्य है। इसलिए कार्य आदेश के अनुसार तत्काल काम शुरू नहीं किए जाने पर बैंक गारंटी की धनराशि वसूल करके विधिक कार्रवाई की जाएगी।