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झमाझम बारिश के बाद धान की रोपाई हुई तेज
Shahjahanpur
Updated Sun, 14 Jul 2013 05:32 AM IST
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- जलभराव वाले क्षेत्रों में पौध नष्ट होने की आशंका
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। झमाझम बारिश का एक दौर पूरा हो जाने के साथ विभिन्न तहसीलों में धान की पौध रोपने का काम तेजी पकड़ने लगा है। हालांकि, कई तहसीलों के उन गांवों में हजारों हेक्टेयर पौध नष्ट होने की आशंका पैदा हो गई है, जहां रोपाई पहले हो चुकी है, लेकिन खेत निचले स्थानों पर होने से उनमें बारिश का पानी ठहरकर हिलोरें मार रहा है।
बता दें कि जिले में जिस तरह रबी सीजन में गेहूं की रिकार्ड पैदावार होती है, ठीक वैसे ही धान की भरपूर उपज होती है। गेहूं उत्पादन की दृष्टि से पुवायां तहसील को ‘मिनी पंजाब’ का खिताब मिला है, तो खरीफ सीजन में यही तहसील ‘धान का कटोरा’ बन जाती है। तिलहर और सदर तहसील के गांवों की भी धान उत्पादन में अहम् हिस्सेदारी रहती है। इसलिए हर साल औसतन दो लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की पौध लगाई जाती है।
इस वर्ष मानसून एक्सप्रेस समय से पहले आ जाने से तमाम किसानों और मंझोले किसानों ने पहली बारिश के बाद ही पौध डाल दी थी। यही नहीं रोपाई भी जल्दी कर दी। जहां खेत पानी से भीगे रहे, वहां के किसानों ने रोपाई का काम अब तेजी से शुरू करा दिया है। अब वे किसान खासे परेशान हैं, जिनकी पहले लगाई गई पौध हाल में हुई भारी बारिश में डूब गई है। जलालाबाद तहसील में हर साल नदियों के तटवर्ती गांवों की आराजी बाढ़ में डूबने से किसानों को पौध का नुकसान उठाना पड़ता है, लेकिन इस बार पुवायां तहसील, विशेषकर बंडा ब्लॉक के किसानों को इसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
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बंडा ब्लॉक के गांव तिहार ऐजनपुर के तमाम किसानों को यही डर सता रहा है कि बारिश का पानी खेतों से जल्दी नहीं निकला तो उसमें डूबी धान पौध नष्ट हो जाएगी। ग्रामीणों के अनुसार तिहार गांव के खेत पश्चिम में निकली रोड से काफी नीचे होने के कारण बारिश केपानी को निकास का रास्ता नहीं मिल रहा है। यही हाल आसपास के अन्य कई गांवों का भी है। वहां खेतों के अलावा गांवों के अंदर तक बरसात का पानी ठहरा है।
2.19 लाख हेक्टेयर में रोपाई का लक्ष्य
‘इस वर्ष जिले में 2.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई का लक्ष्य है। विभिन्न तहसीलों से मिली रिपोर्ट के अनुसार अब तक 80 फीसदी रकबे में धान की पौध रोपी जा चुकी है।’
-अखिलानन्द पांडेय, जिला कृषि अधिकारी
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अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। झमाझम बारिश का एक दौर पूरा हो जाने के साथ विभिन्न तहसीलों में धान की पौध रोपने का काम तेजी पकड़ने लगा है। हालांकि, कई तहसीलों के उन गांवों में हजारों हेक्टेयर पौध नष्ट होने की आशंका पैदा हो गई है, जहां रोपाई पहले हो चुकी है, लेकिन खेत निचले स्थानों पर होने से उनमें बारिश का पानी ठहरकर हिलोरें मार रहा है।
बता दें कि जिले में जिस तरह रबी सीजन में गेहूं की रिकार्ड पैदावार होती है, ठीक वैसे ही धान की भरपूर उपज होती है। गेहूं उत्पादन की दृष्टि से पुवायां तहसील को ‘मिनी पंजाब’ का खिताब मिला है, तो खरीफ सीजन में यही तहसील ‘धान का कटोरा’ बन जाती है। तिलहर और सदर तहसील के गांवों की भी धान उत्पादन में अहम् हिस्सेदारी रहती है। इसलिए हर साल औसतन दो लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की पौध लगाई जाती है।
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इस वर्ष मानसून एक्सप्रेस समय से पहले आ जाने से तमाम किसानों और मंझोले किसानों ने पहली बारिश के बाद ही पौध डाल दी थी। यही नहीं रोपाई भी जल्दी कर दी। जहां खेत पानी से भीगे रहे, वहां के किसानों ने रोपाई का काम अब तेजी से शुरू करा दिया है। अब वे किसान खासे परेशान हैं, जिनकी पहले लगाई गई पौध हाल में हुई भारी बारिश में डूब गई है। जलालाबाद तहसील में हर साल नदियों के तटवर्ती गांवों की आराजी बाढ़ में डूबने से किसानों को पौध का नुकसान उठाना पड़ता है, लेकिन इस बार पुवायां तहसील, विशेषकर बंडा ब्लॉक के किसानों को इसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
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बंडा ब्लॉक के गांव तिहार ऐजनपुर के तमाम किसानों को यही डर सता रहा है कि बारिश का पानी खेतों से जल्दी नहीं निकला तो उसमें डूबी धान पौध नष्ट हो जाएगी। ग्रामीणों के अनुसार तिहार गांव के खेत पश्चिम में निकली रोड से काफी नीचे होने के कारण बारिश केपानी को निकास का रास्ता नहीं मिल रहा है। यही हाल आसपास के अन्य कई गांवों का भी है। वहां खेतों के अलावा गांवों के अंदर तक बरसात का पानी ठहरा है।
2.19 लाख हेक्टेयर में रोपाई का लक्ष्य
‘इस वर्ष जिले में 2.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई का लक्ष्य है। विभिन्न तहसीलों से मिली रिपोर्ट के अनुसार अब तक 80 फीसदी रकबे में धान की पौध रोपी जा चुकी है।’
-अखिलानन्द पांडेय, जिला कृषि अधिकारी