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यूपी से बाहर जा रहा है लाखों क्विंटल गेहूं
Shahjahanpur
Updated Thu, 09 May 2013 05:30 AM IST
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रोजा रेलवे साइडिंग से एक माह में गईं बीस रैक
- फेल नजर आ रही हैं सरकारी एजेंसियां
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर/ रोजा। जिले से भारी मात्रा में गेहूं दूसरे प्रांतों को भेजा जा रहा है। सरकारी एजेंसियां गेहूं खरीदने में फेल नजर आ रही हैं। रोजा मंडी के आंकड़े हैरान करने वाले हैं। अप्रैल में रोजा मंडी में लगभग सात लाख क्विंटल गेहूं आया था, जिसमें पांच लाख क्विंटल से अधिक गेहूं प्रदेश से बाहर भेजा गया। 11 सरकारी क्रय केंद्रों पर मात्र 12 हजार क्विंटल गेहूं ही खरीदा गया। शेष गेहूं फ्लोर मिलों ने खरीदा है। ऐसा मंडी समिति के अनुश्रवण अधिकारी प्रकाश यादव की रिपोर्ट के आंकड़े दर्शा रहे हैं।
शासन को भेजी गई इस रिपोर्ट में साफ है कि शाहजहांपुर में गेहूं की सरकारी खरीद काफी लचर है। रोजा मंडी समिति पर बिचौलियों का एक छत्र राज चल रहा है। कमोवेश यही हाल पूरे जिले का है। प्रशासनिक सख्ती के बावजूद इस बार सरकार की पकड़ से गेहूं बाहर हो गया है।
अनुश्रवण अधिकारी श्री यादव की रिपोर्ट के अनुसार रोजा मंडी में एक अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच कुल गेहूं की आवक सात लाख चार हजार दो सौ अट्ठासी क्विंटल हुई। निकासी छह लाख तिरसठ हजार दो सौ क्विंटल हुई। जिसमें बिचौलियों ने रेलवे के माध्यम से पांच लाख पांच हजार छह सौ तिरासी क्विंटल गेहूं कर्नाटक, महाराष्ट्र, उड़ीसा, गुजरात और तमिलनाडु को भेज दिया। मंडी के 11 खरीद सेंटरों पर मात्र बारह हजार क्विंटल गेहूं ही खरीदा गया। बाकी बचा चालीस हजार क्विंटल गेहूं यहां की आधा दर्जन फ्लोर मिलों को बेचा गया है। हालांकि वास्तविकता में फ्लोर मिलों का स्टाक इससे कहीं ज्यादा है।
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सरकार और प्रशासन की ओर से किसानों को उनकी उपज का पूरा मूल्य दिलाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कहीं अलग है। अप्रैल की शुरुआत में गेहूं एक हजार रुपये क्विंटल था। अप्रैल अंत में 13 सौ रुपये क्विंटल बिका। ऐसे में सरकार के समर्थन मूल्य 1350 रुपये की घोषणा सिर्फ हवाई साबित हुई है।
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- फेल नजर आ रही हैं सरकारी एजेंसियां
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर/ रोजा। जिले से भारी मात्रा में गेहूं दूसरे प्रांतों को भेजा जा रहा है। सरकारी एजेंसियां गेहूं खरीदने में फेल नजर आ रही हैं। रोजा मंडी के आंकड़े हैरान करने वाले हैं। अप्रैल में रोजा मंडी में लगभग सात लाख क्विंटल गेहूं आया था, जिसमें पांच लाख क्विंटल से अधिक गेहूं प्रदेश से बाहर भेजा गया। 11 सरकारी क्रय केंद्रों पर मात्र 12 हजार क्विंटल गेहूं ही खरीदा गया। शेष गेहूं फ्लोर मिलों ने खरीदा है। ऐसा मंडी समिति के अनुश्रवण अधिकारी प्रकाश यादव की रिपोर्ट के आंकड़े दर्शा रहे हैं।
शासन को भेजी गई इस रिपोर्ट में साफ है कि शाहजहांपुर में गेहूं की सरकारी खरीद काफी लचर है। रोजा मंडी समिति पर बिचौलियों का एक छत्र राज चल रहा है। कमोवेश यही हाल पूरे जिले का है। प्रशासनिक सख्ती के बावजूद इस बार सरकार की पकड़ से गेहूं बाहर हो गया है।
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अनुश्रवण अधिकारी श्री यादव की रिपोर्ट के अनुसार रोजा मंडी में एक अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच कुल गेहूं की आवक सात लाख चार हजार दो सौ अट्ठासी क्विंटल हुई। निकासी छह लाख तिरसठ हजार दो सौ क्विंटल हुई। जिसमें बिचौलियों ने रेलवे के माध्यम से पांच लाख पांच हजार छह सौ तिरासी क्विंटल गेहूं कर्नाटक, महाराष्ट्र, उड़ीसा, गुजरात और तमिलनाडु को भेज दिया। मंडी के 11 खरीद सेंटरों पर मात्र बारह हजार क्विंटल गेहूं ही खरीदा गया। बाकी बचा चालीस हजार क्विंटल गेहूं यहां की आधा दर्जन फ्लोर मिलों को बेचा गया है। हालांकि वास्तविकता में फ्लोर मिलों का स्टाक इससे कहीं ज्यादा है।
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सरकार और प्रशासन की ओर से किसानों को उनकी उपज का पूरा मूल्य दिलाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कहीं अलग है। अप्रैल की शुरुआत में गेहूं एक हजार रुपये क्विंटल था। अप्रैल अंत में 13 सौ रुपये क्विंटल बिका। ऐसे में सरकार के समर्थन मूल्य 1350 रुपये की घोषणा सिर्फ हवाई साबित हुई है।