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भतीजों ने बहाया चाचा का खून

Thu, 15 Nov 2012 12:00 PM IST
Shahjahanpur
Shahjahanpur Updated Thu, 15 Nov 2012 12:00 PM IST
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दरकते रिश्ते: जायदाद की खातिर बन गए जान के दुश्मन
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- लोहे की राड सिर पर पड़ते ही बुजुर्ग ने मौके पर ही तोड़ दिया दम
- लाठी डंडे बरसा कर चाची और उसके दो बेटों को किया लहूलुहान
- पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर दो आरोपियों की पकड़ा, तीसरे की तलाश
अमर उजाला नेटवर्क
शाहजहांपुर/मिर्जापुर। जायदाद के लालच में भतीजे अपने चाचा की ही जान के दुश्मन बन गए। दीपावली को उन्होंने चाचा के परिवार पर हमला बोल दिया। बुजुर्ग की लोहे की राड से पिटाई की गई। जिसकी मौके पर ही मौत हो गई। हमले में मृतक की पत्नी और दो बेटे घायल हो गए। जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
अपनों के खून से दीपावली का त्योहर खूनी होली के रूप में मनाने की यह वारदात गांव कम्मरपुर में हुई। मंगलवार को शाम के समय जब गांव के लोग दीपावली मनाने की तैयारी कर रहे थे, तभी घर में दिये जलाने की बजाए गांव के ही सियाराम किसान के पुत्र रामभोले, मुनीम और रामकिशोर के दिल में चाचा खुशीराम से चल रही संपत्ति विवाद की ज्वाला भड़क उठी। इसी को लेकर तीनों ने खुशीराम (60) को गांव के ही पास घेर कर लोहे की राड से पीटना शुरू कर दिया। पिटाई के दौरान खुशीराम ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। बचाव को दौड़ी खुशीराम की पत्नी विद्यादेवी और पुत्र श्याम सिंह और रामू को भी हमलावरों ने जमकर पीटा। जिससे वह घायल हो गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने दो हमलावरों रामभोले और मुनीम गिरफ्तार कर लिया। घटना की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है, तीसरे आरोपी की तलाश की जा रही है।
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घात लगाए बैठे तहेरे भाइयों ने लोहे की राड और लाठियों से उसके पिता खुशीराम पर हमला बोल दिया। हमले में उसके पिता की मौत हो गई, जबकि बचाव को जब मैं और मेरी मां और भाई पहुंचा तो हमें भी हमलावरों ने लहूलुहान कर दिया।
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- घायल रामू, घटना का चश्मदीद गवाह



संघर्ष के बाद पुलिस ने भेजी
थी महज चालानी रिपोर्ट
खुशीराम और उसके भतीजों के बीच संपत्ति का विवाद लंबे समय से चल रहा था, लेकिन पुलिस ने इस विवाद को चिन्हित नहीं किया था। पांच नवंबर को भी खुशीराम और उसके परिजनों की पिटाई की गई थी। खुशीराम के पुत्र राजू की ओर से तहेरे भाई रामभोले, मुनीम व सेठ तथा ताऊ सियाराम के खिलाफ पुलिस ने एनसीआर तो दर्ज कर ली थी, लेकिन उन्हें गिरफ्तार करने के बजाए दोनों पक्षों में शांतिभंग होने की संभावना जताते हुए महज चालानी रिपोर्ट भेज दी थी। अगर पुलिस उस एनसीआर को ही गंभीरता से लेती और आरोपियों को पकड़ कर जेल भेज देती तो शायद खुशीराम की जान बच जाती।


एक माह में तीन खून से
मिर्जापुर में दहशत फैली
एक माह के अंदर मिर्जापुर क्षेत्र में हत्या की तीन वारदातें हो चुकी हैं। जिससे क्षेत्र में दहशत व्याप्त है। 24 अक्तूबर को ग्राम गाजीपुर चिकटिया मे पालेज की रखवाली करते समय हुए विवाद मे दलित मुंशीलाल को मारपीट कर घायल कर दिया गया था। जिसकी 13 नवंबर को इलाज के दौरान मौत हो गई थी। 25 अक्तूबर को गांव पृथ्वीपुर के सहकारी समिति के सभापति कश्मीर सिंह यादव की ढाईगांव में गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी। तीसरी वारदात गांव कम्मरपुर में हुई। यहां भतीजों ने चाचा खुशीराम को पीट कर मार डाला।



पुलिस का खेल: हत्या को गैर
इरादतन हत्या बना डाला
शाहजहांपुर। कितनी भी सननीखेज वारदात क्यों न हो, मगर अपने जिले की पुलिस उस पर पर्दा डालने में माहिर ही साबित होती है। इसका सबूत मिर्जापुर में सरेशाम लाठियों और लोहे की राड से एक बुजुर्ग के कत्ल की घटना है। हमलावरों ने सरेआम बुजुर्ग खुशीराम पर जानलेवा हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने इस सनसनीखेज हत्या की वारदात को गैर इरादतन हत्या में दर्ज किया है।
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