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सीवीओ कार्यालय का वरिष्ठ लिपिक निलंबित
Shahjahanpur
Updated Wed, 24 Oct 2012 12:00 PM IST
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धोखाधड़ी में नामजद होने पर हुई विभागीय कार्रवाई
- मृतक कर्मचारी की सर्विस बुक गायब करने का है आरोप
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। भ्रष्टाचार और कर्मचारियों को आतंकित करने के आरोपों में घिरे मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक नरेंद्र कुमार के विरुद्घ सदर कोतवाली पुलिस ने एक मृतक कर्मचारी की सेवा पुस्तिका गायब करके आश्रितों को धमकाने के मामले में न्यायालय के आदेश पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। विभाग ने वरिष्ठ लिपिक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
विवरण के अनुसार विभाग के रुद्रपुर पृथ्वीपुर पशु सेवा केंद्र पर पशुधन प्रसार अधिकारी के पद पर नियुक्त जलालाबाद क्षेत्र के गांव चचोरा निवासी कर्मवीर सिंह का पांच जून 2007 को सेवा में रहते निधन हो गया था। उनकी पत्नी कुसुमा देवी के अनुसार पति की मृत्यु से एक वर्ष पहले उनकी सर्विस बुक वेतन निर्धारण को बरेली उप निदेशक कार्यालय भेजी गई थी। वहां से पांच अगस्त को पति की सेवा पुस्तिका, वेतन निर्धारण आदेश आदि प्रपत्र वरिष्ठ लिपिक नरेंद्र ने प्राप्त किए, लेकिन कार्यालय में देने के बजाय गायब कर दिए।
कुसुमा देवी के पूछने पर वरिष्ठ लिपिक यह कहकर टाल मटोल करता रहा कि सर्विस बुक बरेली से नहीं आई। डीडीआर आफिस से संपर्क करने पर असलियत पता चली तो कुसुमा ने तत्कालीन सीवीओ डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह से शिकायत की। उन्होंने सेवा पुस्तिका हासिल करने को दबाव बनाया तो वरिष्ठ लिपिक ने आश्रित कोटे में नियुक्त हुए मृतक कर्मचारी के बेटे संदीप और परिजनों को जान की धमकी देनी शुरू कर दी।
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इस बावत पुलिस को तहरीर दी गई, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं होने पर कुसुमा देवी ने एक वकील के मार्फत सीजेएम न्यायालय में धारा 156(3) के तहत प्रार्थना पत्र दिया। इस पर सुनवाई करने के बाद सीजेएम ने रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए। न्यायालय के आदेश पर दर्ज रिपोर्ट में वादिनी कुसुमा ने कहा है कि वरिष्ठ लिपिक नरेंद्र एक रिश्तेदार की विभाग में ऊंची पहुंच के बल पर वर्ष 2008 से सीवीओ आफिस में भ्रष्टाचार और कार्मिक उत्पीड़न में लिप्त है। गत वर्ष सिटी मजिस्ट्रेट स्तर से हुई जांच में उसे कर्मचारियों को आतंकित करने का दोषी पाया गया, लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ लिपिक को निलंबित कर दिया गया है।
‘न्यायालय के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज होने के आधार पर ही वरिष्ठ लिपिक नरेंद्र कुमार को निलंबित किया गया है। अब 45 दिन में उसके खिलाफ आरोप पत्र जारी करके आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर विभागीय जांच भी अमल में लाई जाएगी।’
-डॉ. त्रिलोक सिंह, डिप्टी सीवीओ
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- मृतक कर्मचारी की सर्विस बुक गायब करने का है आरोप
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। भ्रष्टाचार और कर्मचारियों को आतंकित करने के आरोपों में घिरे मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक नरेंद्र कुमार के विरुद्घ सदर कोतवाली पुलिस ने एक मृतक कर्मचारी की सेवा पुस्तिका गायब करके आश्रितों को धमकाने के मामले में न्यायालय के आदेश पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। विभाग ने वरिष्ठ लिपिक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
विवरण के अनुसार विभाग के रुद्रपुर पृथ्वीपुर पशु सेवा केंद्र पर पशुधन प्रसार अधिकारी के पद पर नियुक्त जलालाबाद क्षेत्र के गांव चचोरा निवासी कर्मवीर सिंह का पांच जून 2007 को सेवा में रहते निधन हो गया था। उनकी पत्नी कुसुमा देवी के अनुसार पति की मृत्यु से एक वर्ष पहले उनकी सर्विस बुक वेतन निर्धारण को बरेली उप निदेशक कार्यालय भेजी गई थी। वहां से पांच अगस्त को पति की सेवा पुस्तिका, वेतन निर्धारण आदेश आदि प्रपत्र वरिष्ठ लिपिक नरेंद्र ने प्राप्त किए, लेकिन कार्यालय में देने के बजाय गायब कर दिए।
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कुसुमा देवी के पूछने पर वरिष्ठ लिपिक यह कहकर टाल मटोल करता रहा कि सर्विस बुक बरेली से नहीं आई। डीडीआर आफिस से संपर्क करने पर असलियत पता चली तो कुसुमा ने तत्कालीन सीवीओ डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह से शिकायत की। उन्होंने सेवा पुस्तिका हासिल करने को दबाव बनाया तो वरिष्ठ लिपिक ने आश्रित कोटे में नियुक्त हुए मृतक कर्मचारी के बेटे संदीप और परिजनों को जान की धमकी देनी शुरू कर दी।
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इस बावत पुलिस को तहरीर दी गई, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं होने पर कुसुमा देवी ने एक वकील के मार्फत सीजेएम न्यायालय में धारा 156(3) के तहत प्रार्थना पत्र दिया। इस पर सुनवाई करने के बाद सीजेएम ने रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए। न्यायालय के आदेश पर दर्ज रिपोर्ट में वादिनी कुसुमा ने कहा है कि वरिष्ठ लिपिक नरेंद्र एक रिश्तेदार की विभाग में ऊंची पहुंच के बल पर वर्ष 2008 से सीवीओ आफिस में भ्रष्टाचार और कार्मिक उत्पीड़न में लिप्त है। गत वर्ष सिटी मजिस्ट्रेट स्तर से हुई जांच में उसे कर्मचारियों को आतंकित करने का दोषी पाया गया, लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ लिपिक को निलंबित कर दिया गया है।
‘न्यायालय के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज होने के आधार पर ही वरिष्ठ लिपिक नरेंद्र कुमार को निलंबित किया गया है। अब 45 दिन में उसके खिलाफ आरोप पत्र जारी करके आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर विभागीय जांच भी अमल में लाई जाएगी।’
-डॉ. त्रिलोक सिंह, डिप्टी सीवीओ