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बादल छाने और सर्द पछुआ हवा के सर्द झोंकों से लुढ़का पारा

Sun, 17 Feb 2019 08:06 PM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Sun, 17 Feb 2019 08:06 PM IST
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बादल छाने और सर्द पछुआ हवा के तेज थपेड़ों से लुढ़का पारा
शाहजहांपुर। हवा के कम दबाव वाला क्षेत्र बनने से मौसम के तेवर रविवार को सुबह फिर बिगड़ गए। बादल छाए रहने और सर्द पछुआ हवा के तेज थपेड़ों से धूप की गरमाहट बेअसर साबित हुई और मौसम साफ को लेकर एक दिन पहले के अनुमान ध्वस्त हो गए। हालांकि, बूंदाबांदी और बारिश नहीं हुई, लेकिन धूप कम निकलने और वातावरण में नमी 90 प्रतिशत से अधिक बनी रहने से रात से सुबह तक सर्दी अधिक प्रतीत हुई। गन्ना शोध परिषद में रात को न्यूनतम तापमान 12.2 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड हुआ, जो बीते 24 घंटे की तुलना मे दो डिग्री कम रहा। दिन में करीब 11 बजे अधिकतम तापमान भी दो डिग्री घटकर 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह गया। हालांकि, दोपहर को थोड़ी देर धूप निकलने के बाद अधिकतम तापमान 21.8 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।
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बीते 72 घंटे के दौरान 8.6 मिमी बरसात भले ही रबी सीजन की फसलों के लिए अमृत साबित हुई हो, साथ में पश्चिमोत्तर दिशा से चली तेज रफ्तार हवा के झोंके सरसों की फसल केे लिए नुकसान दायक साबित हुई है। गनीमत यह है कि फसली नुकसान का सामना केवल कलान तहसील के कुछ ही किसानों को करना पड़ा, क्योंकि वहां सरसों का काफी रकबा है। चूंकि, इसी तहसील क्षेत्र में ओले भी ज्यादा गिरे। इसलिए ओला की चोट खाए सरसों के बढ़वार ले चुके पौधे खेतों की मिट्टी गीली होने के कारण तेज हवा के झोंकों से गिर गए। कृषि विभाग के टोल फ्री नंबर पर कुछ किसानों से फसली नुकसान की सूचनाएं मिलने के बाद विभागीय टीमों को शिकायतों का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं।
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जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीश चंद्र पाठक के अनुसार जिले में राई/सरसों से 15272 हेक्टेयर रकबा आच्छादित है और केवल दो से तीन फीसदी फसल को हानि होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि सरसों के पौधे का तना बेहद नाजुक होता है। चूंकि, फसल बढ़वार ले चुकी है। इसलिए तेज हवा चलने पर सरसों के पौधे गीली मिट्टी में जड़ ढीली पड़ने से गिर गए। कृषि अधिकारी के अनुसार 2.51 लाख हेक्टेयर में बोई गई गेहूं की फसल पूरी तरह सुरक्षित है और जिन किसानों की सरसों गिर गई है, उन्हें नुकसान का सत्यापन कराने के बाद नियमों के अनुसार मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इधर, गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह का कहना है कि बैरोमीटर की रीडिंग में पिछले 24 घंटे के दौरान 27 अंक की गिरावट के कारण पछुआ हवा की रफ्तार बढ़ने के साथ बादल छाए हुए हैं।
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