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वैदिक साहित्य में हैं पर्यावरण संरक्षण के उपाय
Updated Sat, 16 Sep 2017 07:03 PM IST
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शाहजहांपुर। आर्य महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विश्व ओजोन दिवस पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रवक्ताओं ने ओजोन की महत्ता पर प्रकाश डाला। गोष्ठी का शुभारंभ करने के बाद प्राचार्य डॉ. कनकरानी ने कहा कि वैदिक साहित्य में पर्यावरण संरक्षण के उपाय बताए गए हैं। इसलिए हमें वैदिक साहित्य भी पढ़ना चाहिए। इससे पूर्व पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश भारती ने विषय स्थापना करते हुए ओजोन की महत्ता और उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा वायुमंडलीय स्तरों में समताप मंडल अत्यंत उपयोगी है, जो न केवल वायुमंडलीय दाब और स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है, बल्कि विभिन्न लैप्स रेटों को भी व्यवस्थित रखने में उपयोगी साबित होता है। समताप मंडल ओजोन परत के माध्यम से सूर्य से निकलने वाली हानिकारक पराबैगनीं किरणों को प्रत्यक्ष रूप से पृथ्वी तक आने से रोकती है, जिसको जागरुकता के माध्यम से बचाया जा सकता है। डॉ. रुचि द्विवेदी ने कहा कि ओजोन क्षरण से चर्म रोग बढ़ते हैं। इस अवसर पर डॉ. ज्योति गुप्ता, डॉ. एमपीएस राठौर आदि शिक्षकों के अलावा शताक्षी श्रीवास्तव, यशस्वी राठौर, अर्चना यादव, स्वेच्छा गंगवार, प्रांशी शर्मा, रीतू, पलक गंगवार, निधि शर्मा, अनुष्का देवी, नीमी शुक्ला, दुर्गेश सक्सेना, आकांक्षा आदि छात्राओं ने भी विचार व्यक्त किए। गोष्ठी में प्रबंधक अमितेश अमित, डॉ. मधु जैन, डॉ. संतोष सक्सेना, डॉ. नीलम अग्रवाल, डॉ. रूपांशुमाला, डॉ. दुर्गावती सिंह, डॉ. सारिका अग्रवाल, डॉ. आभा त्रिवेदी, डॉ. मृदुला शुक्ला, डॉ. विजय गुप्ता, डॉ. आलोक दीक्षित, डॉ. निदा शाहिद आदि मौजूद रहे।
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