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एक परमाणु बम फोड़ क्यों न देते हो..
Updated Tue, 08 Aug 2017 07:43 PM IST
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पुवायां। साहित्यिक संस्था सृजन की ओर से नगर के एक पैलेस में सीतापुर से आए कवि केदारनाथ शुक्ल के सम्मान में कवि सम्मेलन का आयोेजन किया गया। इसका शुभारंभ अरविंद दीक्षित ने सरस्वती वंदना से किया।
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे अतिथि कवि केदारनाथ शुक्ल ने सुनाया
संतों को वृत्तासुर जैसे, अब परेशान कर लेते हैं।
युग के दधीचि तब हंस करके अस्थियां दान कर देते हैं।
संचालक डॉ. रामबाबू शुक्ला ने सुनाया
सीमा पर सीना तान तैश में खड़ा है चीन
दोगले की बाजू को मरोड़ क्यों न देते हो
बमों का भविष्य में अचार क्या रखोगे आप
एक परमाणु बम फोड़ क्यों न देते हो।
रामलड़ैते श्रीवास ने अपनी बात कुछ यूं कही
आज हमें अफसोस किंतु नेता हैं सफेदपोश,
देश में अंधेरा, इनके घर में प्रकाश है।
गीतकार तेजपाल जोशी ने सुनाया-
गुलाबी होंठ तेरे मयकदे से कम नहीं दिलवर,
है खाली जाम दिल का, जाम धीरे धीरे भरने दो।
कवि प्रदीप बैरागी ने गुनगुनाया-
ये जवानी लुटा दूं वतन के लिए।
जिंदगी लुटा दूं अमन के लिए।
आरजू आखिरी अब यही है मेरी,
बस तिरंगा हो अपने कफन के लिए।
इसके अलावा अन्य कवियों ने भी कविता पाठ किया। आयोजन में रामलड़ैते तिवारी, पवन मिश्रा, गोपाल त्रिवेदी, श्यामबाबू शुक्ला, सुरेश कुमार सहित तमाम लोगों का सहयोग रहा।
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कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे अतिथि कवि केदारनाथ शुक्ल ने सुनाया
संतों को वृत्तासुर जैसे, अब परेशान कर लेते हैं।
युग के दधीचि तब हंस करके अस्थियां दान कर देते हैं।
संचालक डॉ. रामबाबू शुक्ला ने सुनाया
सीमा पर सीना तान तैश में खड़ा है चीन
दोगले की बाजू को मरोड़ क्यों न देते हो
बमों का भविष्य में अचार क्या रखोगे आप
एक परमाणु बम फोड़ क्यों न देते हो।
रामलड़ैते श्रीवास ने अपनी बात कुछ यूं कही
आज हमें अफसोस किंतु नेता हैं सफेदपोश,
देश में अंधेरा, इनके घर में प्रकाश है।
गीतकार तेजपाल जोशी ने सुनाया-
गुलाबी होंठ तेरे मयकदे से कम नहीं दिलवर,
है खाली जाम दिल का, जाम धीरे धीरे भरने दो।
कवि प्रदीप बैरागी ने गुनगुनाया-
ये जवानी लुटा दूं वतन के लिए।
जिंदगी लुटा दूं अमन के लिए।
आरजू आखिरी अब यही है मेरी,
बस तिरंगा हो अपने कफन के लिए।
इसके अलावा अन्य कवियों ने भी कविता पाठ किया। आयोजन में रामलड़ैते तिवारी, पवन मिश्रा, गोपाल त्रिवेदी, श्यामबाबू शुक्ला, सुरेश कुमार सहित तमाम लोगों का सहयोग रहा।
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