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ड्रैगन फल उगाकर खेती-किसानी की मिसाल बने 81 साल के निर्मल सिंह

Mon, 06 Jun 2022 12:45 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jun 2022 12:45 AM IST
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81-year-old Nirmal Singh became synonymous with change in farming
बंडा के सरदारपुर फार्म निवासी निर्मल सिंह अपने फार्म हॉउस पर पुवायां के नायब तहसीलदार के साथ संव? - फोटो : SHAHJAHANPUR
आले नबी
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शाहजहांपुर। बंडा निवासी 81 वर्षीय निर्मल सिंह ने खेती-किसानी में बदलाव की आहट को महसूस किया। आधुनिकता से कदमताल के लिए वयोवृद्ध निर्मल सिंह खूब घूमते हैं, कृषि विज्ञान से संबंधित किताबें पढ़ते हैं। परंपरागत फसलों के साथ वह वर्तमान में ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं। उनकी लगन का नतीजा है कि आमतौर पर 350 ग्राम का होने वाला ड्रैगन फल उनके फार्म में 670 ग्राम का उगा है। चार वैरायटी के ड्रैगन फ्रूट उगाने के बाद वह अब दूसरे किसानों को प्रशिक्षित करना चाहते हैं।
1957 में निर्मल सिंह के पिता जगन सिंह पंजाब से बंडा आए थे। निर्मल सिंह बताते हैं कि उस समय सरकार ने किसानों को मुफ्त में कृषि भूमि देने का वादा किया था, लेकिन उन लोगों ने 12 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन ली थी। शुरुआती वर्षों में किसानों ने फसलें उगाना शुरू कीं तो उन्हें काफी नुकसान हुआ। अपने कृषि फार्म को आबाद करने के लिए निर्मल सिंह 1968 में साइंस टीचर की नौकरी छोड़कर बंडा आ गए थे। निर्मल सिंह ने खेती-किसानी पर पकड़ बनाने के लिए कृषि विद्यालयों का भ्रमण किया। कई बार विदेश यात्रा भी की। अनुभव और अध्ययन के बाद जब खेती शुरू की तो काफी फायदा हुआ।
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उन्होंने गत दो वर्ष पहले ड्रैगन फ्रूट लगाने का खाका तैयार किया। पुणे के रिसर्च सेंटर के विशेषज्ञ से मार्गदर्शन लेने के बाद शुरुआती दिनों में सीमेंट के 67 पोलों के सहारे 250 पौधे लगाए। निर्मल सिंह बताते हैं कि एक पोल पर चार पौधे लगाए जाते हैं। पौधे में छह महीने बाद फूल और छह बाद महीने फल आते हैं। पहली फसल को उन्होंने बाजार में नहीं बेचा, बल्कि अपने करीबियों को उपहार के तौर पर भेंट किया। स्थानीय स्तर से लेकर पंजाब तक ड्रैगन फल को पहुंचाया। अब उनकी दूसरी फसल तैयार हो गई। इसकी आपूर्ति वह दिल्ली के बाजार में करेंगे। संवाद
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670 ग्राम का उगाया फल
निर्मल सिंह ने ड्रैगन फ्रूट की खेती पर इतना अध्ययन किया कि आमतौर पर साढ़े तीन सौ ग्राम का फल होता है, लेकिन पहली बार में निर्मल सिंह ने 670 ग्राम का फल उगा दिया। उन्होंने पुणे के रिसर्च सेंटर में जब फल का फोटो और वजन भेजा तो वहां के लोग भी आश्चर्य में पड़ गए। निर्मल सिंह बताते हैं कि पहली बार 80 किलो फल आए थे।
20 हजार पौधों की नर्सरी तैयार की
निर्मल सिंह ने अपने फार्म हाउस पर 200 हजार पौधों की नर्सरी तैयार की है। पौधों को वह प्रदेश के किसानों को सप्लाई करना चाहते हैं, जिससे दूसरे किसान भी ड्रैगन फ्रूट की खेती की तरफ आकर्षित हो सकें।
तमाम विटामिन होती हैं ड्रैगन फूट
ड्रैगन फल सिर्फ स्वाद के साथ-साथ औषधीय गुणों से भरा होता है। चार वैरायटी आधारित फल विभिन्न विटामिन से भरा है। जिला उद्यान अधिकारी राघवेंद्र सिंह ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट में ऐसे तत्व विद्यमान हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।
मेला लगाएंगे, किसानों के लिए लिखेंगे किताब
सफेद, पीला, लाइट पिंक और रेड गूदे वाला फल उगाने वाले निर्मल सिंह किसानों के लिए किताब लिखना चाहते हैं। उनका प्रयास है कि किसानों को अधिक जानकारी मिल सके। वहीं किसानों के लिए मेला भी लगाएंगे।

-परंपरागत खेती की अपेक्षा ड्रैगन फल का बाजार बेहतर है। इसके लिए सरकार को अनुदान देना चाहिए। किसानों को अनुदान रूपी सम्मान मिलने से खेती करने वालों की संख्या में इजाफा होगा, साथ ही किसानों की आय भी दोगुनी होगी। -निर्मल सिंह
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