{"_id":"5bd07b7dbdec2269980466cb","slug":"71540389757-shahjahanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोहरे से निपटने को तैयार नहीं रेलवे और रोडवेज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोहरे से निपटने को तैयार नहीं रेलवे और रोडवेज
Updated Wed, 24 Oct 2018 07:32 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोहरे से निपटने को रेलवे और रोडवेज की तैयारी नहीं
25 अक्तूबर से 15 फरवरी तक रहेगा कोहरे का प्रकोप
पिछले वर्ष पांच महीने तक रद्द रहीं थी दो दर्जन ट्रेनें
फोटो-14
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। कोहरे का सीजन शुरू होने वाला है। अधिकारिक रूप से रेलवे भी मानता है कि 25 अक्तूबर से 15 फरवरी तक कोहरे का सीजन रहता है। शाहजहांपुर जिले में नदियों, नहरों की बहुतायत होने से यहां कोहरे का प्रकोप भी ज्यादा रहता है। इसके बावजूद रेलवे और रोडवेज ने अब तक कोहरे से निपटने के ठोस प्रबंध शुरू नहीं किए हैं। कोहरे में हादसों के मद्देनजर कोई तैयारी नजर नहीं आ रही। निजी बस संचालकों की स्थिति और भी बदतर है। ज्यादातर बसें अनफिट हैं। उप संभागीय परिवहन विभाग बेपरवाह बना हुआ है।
सबसे ज्यादा यात्रियों को ढोने वाला रेल महकमा भी अभी कोहरे से लड़ने को तैयार नहीं है। रोजाना लाखों लोग ट्रेनों से यात्रा करते हैं। कोहरे में ट्रेनें कई-कई घंटे लेट होती हैं। कोहरे की वजह से बहुत सी ट्रेनों को रद्द करना पड़ता है। इसका खामियाजा यात्रियों को उठाना पड़ता है। पिछले साल कोहरे की वजह से रेलवे को पांच महीने के लिए अप-डाउन 26 से ज्यादा ट्रेनों को रद्द करना पड़ा था। कोहरे के मद्देनजर स्टेशनों के आउटर सिग्नल पर फॉग हट बनाकर फॉग पोर्टर की तैनाती की जाती है। ताकि भीषण कोहरे की वजह से कोई हादसा न हो। हट बनाने और फॉग पोर्टर की तैनाती, मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग पर सुरक्षा के इंतजाम की जिम्मेदारी स्थानीय स्टेशन मास्टर की होती है। अन्य सभी तरह की व्यवस्था रेल मंडल मुख्यालय से होती हैं।
यूं तो रेलवे मानता है कि 25 अक्तूबर से 15 फरवरी तक कोहरे का सीजन रहता है। लेकिन, दिसंबर से फरवरी तक ज्यादातर कोहरा ही छाया रहता है। इसका सीधा असर ट्रेनों के संचालन पर होता है। इसके बावजूद अब तक रेलवे ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। हालांकि, फिलहाल कोहरे ने असर दिखाना शुरू नहीं किया है। यह भी साफ है कि नदियों, नहरों से घिरे जिले में किस दिन कोहरे का प्रकोप शुरू हो जाए कहा नहीं जा सकता। इधर, रोडवेज ने भी अब तक कोहरे से निपटने के इंतजाम शुरू नहीं किए हैं।
विज्ञापन
----------
पटाख विस्फोट के जरिए दिया जाता है सिग्नल
- कोहरे में ट्रेनों को स्टेशन और सिग्नल के बारे में जानकारी देने के लिए रेलवे वर्षों पुरानी पटाखों पर निर्भर तकनीक पर ही काम कर रहा है। इसके तहत स्टेशन मास्टर से 180 मीटर की दूरी पर फॉग हट बनाकर दृष्यता परीक्षण यंत्र (वीटीओ) लगाया जाता है। ग्रुप डी के कर्मचारियों से औपचारिकता के लिए कोहरे में काम करने का मौखिक आश्वासन लिया जाता है। स्टेशन मास्टर को जब 180 मीटर दूर लगा वीटीओ नजर नहीं जाता तो माना जाता है कि कोहरा बहुत ज्यादा है। स्टेशन मास्टर दो कर्मचारियों को बुलाता है। इसके बाद रेल की पटरी पर दो स्थानों पर पटाखे लगाए जाते हैं। ट्रेन पहले पटाखे से गुजरती है तो धमाके के साथ पायलट को पता लग जाता है कि स्टेशन आने वाला है। दूसरा पटाख फटने के साथ वह समझ जाता है कि स्टेशन नजदीक है। इसके अलावा वीटीओ से 45 मीटर की दूरी पर रेल कर्मचारी हैंड लैंप लेकर खड़ा जाता है, ताकि पायलट ट्रेन को रोक सके।
----------
ब्रांच लाइन के लिए दूसरी व्यवस्था
- ब्रांच लाइन में फॉग हट नहीं बनाए जाते हैं और न ही पटाखा लगाने की व्यवस्था की जाती है। बल्कि कोहरे के दौरान इन लाइनों पर ट्रेनों की गति घटाकर 45 किमी प्रति घंटा कर दी जाती है। चालक को भी अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होती है। ऐसे में चालक सिग्नल पर रुकता है और उसे देखकर ही ट्रेन को चलाता है। जिन रूटों पर ट्रेनों की स्पीड 45 किमी प्रति घंटा है तो वहां आउटर सिग्नल पर फॉग पोर्टर तैनात नहीं किया जाता। लेकिन जिन रूट पर ट्रेन की अधिकतम स्पीड 110 किमी प्रति घंटा है वहां भीषण कोहरे के दौरान आउटर सिगनल पर फॉग पोर्टर की तैनाती की जाती है।
-------
वर्जन-
रेलवे का मानना है कि कोहरे का सीजन 25 अक्तूबर से शुरू होकर 15 फरवरी तक रहता है। सीजन शुरू हो चुका है। हालांकि, अभी कोहरे का प्रकोप देखने को नहीं मिला है। इससे पहले तैयारियां की जा रही हैं। संचालन से जुड़े कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पटाखों का स्टॉक पर्याप्त है। सिग्नल दुरुस्त किए जा रहे हैं। ट्रेनों के संचालन में समस्या न हो इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
-ओम शिव अवस्थी, स्टेशन अधीक्षक
विज्ञापन
25 अक्तूबर से 15 फरवरी तक रहेगा कोहरे का प्रकोप
पिछले वर्ष पांच महीने तक रद्द रहीं थी दो दर्जन ट्रेनें
फोटो-14
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। कोहरे का सीजन शुरू होने वाला है। अधिकारिक रूप से रेलवे भी मानता है कि 25 अक्तूबर से 15 फरवरी तक कोहरे का सीजन रहता है। शाहजहांपुर जिले में नदियों, नहरों की बहुतायत होने से यहां कोहरे का प्रकोप भी ज्यादा रहता है। इसके बावजूद रेलवे और रोडवेज ने अब तक कोहरे से निपटने के ठोस प्रबंध शुरू नहीं किए हैं। कोहरे में हादसों के मद्देनजर कोई तैयारी नजर नहीं आ रही। निजी बस संचालकों की स्थिति और भी बदतर है। ज्यादातर बसें अनफिट हैं। उप संभागीय परिवहन विभाग बेपरवाह बना हुआ है।
सबसे ज्यादा यात्रियों को ढोने वाला रेल महकमा भी अभी कोहरे से लड़ने को तैयार नहीं है। रोजाना लाखों लोग ट्रेनों से यात्रा करते हैं। कोहरे में ट्रेनें कई-कई घंटे लेट होती हैं। कोहरे की वजह से बहुत सी ट्रेनों को रद्द करना पड़ता है। इसका खामियाजा यात्रियों को उठाना पड़ता है। पिछले साल कोहरे की वजह से रेलवे को पांच महीने के लिए अप-डाउन 26 से ज्यादा ट्रेनों को रद्द करना पड़ा था। कोहरे के मद्देनजर स्टेशनों के आउटर सिग्नल पर फॉग हट बनाकर फॉग पोर्टर की तैनाती की जाती है। ताकि भीषण कोहरे की वजह से कोई हादसा न हो। हट बनाने और फॉग पोर्टर की तैनाती, मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग पर सुरक्षा के इंतजाम की जिम्मेदारी स्थानीय स्टेशन मास्टर की होती है। अन्य सभी तरह की व्यवस्था रेल मंडल मुख्यालय से होती हैं।
विज्ञापन
यूं तो रेलवे मानता है कि 25 अक्तूबर से 15 फरवरी तक कोहरे का सीजन रहता है। लेकिन, दिसंबर से फरवरी तक ज्यादातर कोहरा ही छाया रहता है। इसका सीधा असर ट्रेनों के संचालन पर होता है। इसके बावजूद अब तक रेलवे ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। हालांकि, फिलहाल कोहरे ने असर दिखाना शुरू नहीं किया है। यह भी साफ है कि नदियों, नहरों से घिरे जिले में किस दिन कोहरे का प्रकोप शुरू हो जाए कहा नहीं जा सकता। इधर, रोडवेज ने भी अब तक कोहरे से निपटने के इंतजाम शुरू नहीं किए हैं।
विज्ञापन
----------
पटाख विस्फोट के जरिए दिया जाता है सिग्नल
- कोहरे में ट्रेनों को स्टेशन और सिग्नल के बारे में जानकारी देने के लिए रेलवे वर्षों पुरानी पटाखों पर निर्भर तकनीक पर ही काम कर रहा है। इसके तहत स्टेशन मास्टर से 180 मीटर की दूरी पर फॉग हट बनाकर दृष्यता परीक्षण यंत्र (वीटीओ) लगाया जाता है। ग्रुप डी के कर्मचारियों से औपचारिकता के लिए कोहरे में काम करने का मौखिक आश्वासन लिया जाता है। स्टेशन मास्टर को जब 180 मीटर दूर लगा वीटीओ नजर नहीं जाता तो माना जाता है कि कोहरा बहुत ज्यादा है। स्टेशन मास्टर दो कर्मचारियों को बुलाता है। इसके बाद रेल की पटरी पर दो स्थानों पर पटाखे लगाए जाते हैं। ट्रेन पहले पटाखे से गुजरती है तो धमाके के साथ पायलट को पता लग जाता है कि स्टेशन आने वाला है। दूसरा पटाख फटने के साथ वह समझ जाता है कि स्टेशन नजदीक है। इसके अलावा वीटीओ से 45 मीटर की दूरी पर रेल कर्मचारी हैंड लैंप लेकर खड़ा जाता है, ताकि पायलट ट्रेन को रोक सके।
----------
ब्रांच लाइन के लिए दूसरी व्यवस्था
- ब्रांच लाइन में फॉग हट नहीं बनाए जाते हैं और न ही पटाखा लगाने की व्यवस्था की जाती है। बल्कि कोहरे के दौरान इन लाइनों पर ट्रेनों की गति घटाकर 45 किमी प्रति घंटा कर दी जाती है। चालक को भी अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होती है। ऐसे में चालक सिग्नल पर रुकता है और उसे देखकर ही ट्रेन को चलाता है। जिन रूटों पर ट्रेनों की स्पीड 45 किमी प्रति घंटा है तो वहां आउटर सिग्नल पर फॉग पोर्टर तैनात नहीं किया जाता। लेकिन जिन रूट पर ट्रेन की अधिकतम स्पीड 110 किमी प्रति घंटा है वहां भीषण कोहरे के दौरान आउटर सिगनल पर फॉग पोर्टर की तैनाती की जाती है।
-------
वर्जन-
रेलवे का मानना है कि कोहरे का सीजन 25 अक्तूबर से शुरू होकर 15 फरवरी तक रहता है। सीजन शुरू हो चुका है। हालांकि, अभी कोहरे का प्रकोप देखने को नहीं मिला है। इससे पहले तैयारियां की जा रही हैं। संचालन से जुड़े कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पटाखों का स्टॉक पर्याप्त है। सिग्नल दुरुस्त किए जा रहे हैं। ट्रेनों के संचालन में समस्या न हो इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
-ओम शिव अवस्थी, स्टेशन अधीक्षक