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69 बाढ़ चौकियों से होंगे राहत और बचाव के कार्य, नियुक्त हुए कर्मचारी
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शाहजहांपुर। पिछले वर्ष मानसून सीजन में गंगा-रामगंगा समेत गर्रा नदी में उफान से विभिन्न तहसीलों के करीब 300 गांवों के हजारों लोग बाढ़ की चपेट में आ गए थे। इसे देखते प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्यों की अभी से तैयारी शुरू कर दी है। नदियों के तटीय गांवों में 69 बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी गई हैं। अधिकारियों के अनुसार सभी बाढ़ चौकियों पर क्षेत्रीय लेखपालों, ग्राम पंचायत सचिवों, रोजगार सेवकों, ग्राम विकास अधिकारियों, आंगनबाड़ी कर्मचारियों आदि की ड्यूटी लगा दी गई है।
99 हजार वर्ग किमी क्षेत्र बाढ़ प्रभावित
गंगा, रामगंगा, बहगुल, गर्रा, गोमती और खन्नौत नदियां जिले में 251 किमी लंबाई में बहती हैं। मानसून सीजन में बारिश होने पर इन सभी नदियों का कैचमेंट एरिया (पानी का फैलाव) 99 हजार वर्ग किमी हो जाता है। सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। कलान में भैंसार बांध बनने के बाद गंगा के तटवर्ती गांवों पर बाढ़ का खतरा कम हो गया है, लेकिन जैतीपुर से परौर तक रामगंगा और खुदागंज क्षेत्र में गर्रा नदी के तटीय गांवों पर बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं पर तेज हुआ काम
सिंचाई विभाग के प्रस्ताव पर शासन ने रामगंगा और गर्रा के तटीय गांवों के किनारे पक्के तटबंध बनाने को 7.43 करोड़ रुपये लागत वाली कटान निरोधक चार परियोजनाएं स्वीकृत की थीं। इनमें खुदागंज क्षेत्र में गर्रा नदी के किनारे नवादा दरोबस्त, भुंडा हरबंशपुर उर्फ नौगवां व चितीबोझी में और जलालाबाद क्षेत्र में रामगंगा के किनारे मई खुर्द कलां गांव के पास पक्की ठोकरें बनाने का काम किया जा रहा है। भुंडा हरबंशपुर में करीब पांच दिन से ठोकरों का निर्माण कार्य बंद है। गांव के अखिलेश सिंह ने भी इसकी पुष्टि की है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सुनील कुमार भास्कर के अनुसार सभी परियोजनाओं पर 50 से 57 प्रतिशत काम कराया जा चुका है। कार्य पूर्ति अगस्त माह तक कराने का लक्ष्य नियत किया था, लेकिन यह सभी कार्य 20 जून तक पूरे कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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न्यू सिटी को डूबने से बचाएगा 12 करोड़ का तटबंध
कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना के ड्रीम प्रोजेक्ट न्यू सिटी को बाढ़ की विभीषिका से बचाने के लिए एक किलोमीटर लंबे तटबंध को बनाकर तैयार कर लिया गया। सिंचाई विभाग ने 12 करोड़ रुपये की लागत से तटबंध को बनाया है। गत वर्ष आई बाढ़ में ककरा इलाका पूरी तरह से जलमग्न हो गया था। जैव विविधता पार्क, नगर निगम का कार्यालय समेत कई प्रोजेक्ट पूरी तरह से डूब गए थे। सुरेश खन्ना ने इसे गंभीरता से लेते हुए तटबंध बनाने के निर्देश दिए थे। नगर आयुक्त संतोष शर्मा ने बताया कि तटबंध से बाढ़ से सुरक्षा होगी। नगर निगम का दफ्तर, गेस्ट हाउस और पार्क समेत ककरा सुरक्षित रहेेगा।
परौर में तटबंधों की मरम्मत की जरूरत
परौर। गत वर्ष शासन ने बाढ़ प्रभावित गांवों के किनारे 14 तटबंध बनाने को 11 करोड़ रुपये स्वीकृत किए। मानसून सीजन मेें काम कराने के कारण गत वर्ष लगाए गए जिओ ट्यूब के अस्थायी तटबंध क्षतिग्रस्त होने लगे हैं। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता विजय दिवाकर का कहना है कि तटबंधों की मरम्मत का काम शीघ्र शुरू हो जाएगा।
बाढ़ चौकियों पर गांव और क्षेत्र स्तर के अधिकारियों व कर्मचारियों की ड्यूटी भी निर्धारित कर दी गई है। डीएम के निर्देश पर संबंधित विभागों के अधिकारी बाढ़ चौकियों पर आवश्यक रसद, दवाओं आदि की व्यवस्था कराएंगे। -गिरिजेश कुमार चौधरी, बाढ़ आपदा राहत प्रभारी/एडीएम फाइनेंस
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99 हजार वर्ग किमी क्षेत्र बाढ़ प्रभावित
गंगा, रामगंगा, बहगुल, गर्रा, गोमती और खन्नौत नदियां जिले में 251 किमी लंबाई में बहती हैं। मानसून सीजन में बारिश होने पर इन सभी नदियों का कैचमेंट एरिया (पानी का फैलाव) 99 हजार वर्ग किमी हो जाता है। सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। कलान में भैंसार बांध बनने के बाद गंगा के तटवर्ती गांवों पर बाढ़ का खतरा कम हो गया है, लेकिन जैतीपुर से परौर तक रामगंगा और खुदागंज क्षेत्र में गर्रा नदी के तटीय गांवों पर बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
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बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं पर तेज हुआ काम
सिंचाई विभाग के प्रस्ताव पर शासन ने रामगंगा और गर्रा के तटीय गांवों के किनारे पक्के तटबंध बनाने को 7.43 करोड़ रुपये लागत वाली कटान निरोधक चार परियोजनाएं स्वीकृत की थीं। इनमें खुदागंज क्षेत्र में गर्रा नदी के किनारे नवादा दरोबस्त, भुंडा हरबंशपुर उर्फ नौगवां व चितीबोझी में और जलालाबाद क्षेत्र में रामगंगा के किनारे मई खुर्द कलां गांव के पास पक्की ठोकरें बनाने का काम किया जा रहा है। भुंडा हरबंशपुर में करीब पांच दिन से ठोकरों का निर्माण कार्य बंद है। गांव के अखिलेश सिंह ने भी इसकी पुष्टि की है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सुनील कुमार भास्कर के अनुसार सभी परियोजनाओं पर 50 से 57 प्रतिशत काम कराया जा चुका है। कार्य पूर्ति अगस्त माह तक कराने का लक्ष्य नियत किया था, लेकिन यह सभी कार्य 20 जून तक पूरे कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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न्यू सिटी को डूबने से बचाएगा 12 करोड़ का तटबंध
कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना के ड्रीम प्रोजेक्ट न्यू सिटी को बाढ़ की विभीषिका से बचाने के लिए एक किलोमीटर लंबे तटबंध को बनाकर तैयार कर लिया गया। सिंचाई विभाग ने 12 करोड़ रुपये की लागत से तटबंध को बनाया है। गत वर्ष आई बाढ़ में ककरा इलाका पूरी तरह से जलमग्न हो गया था। जैव विविधता पार्क, नगर निगम का कार्यालय समेत कई प्रोजेक्ट पूरी तरह से डूब गए थे। सुरेश खन्ना ने इसे गंभीरता से लेते हुए तटबंध बनाने के निर्देश दिए थे। नगर आयुक्त संतोष शर्मा ने बताया कि तटबंध से बाढ़ से सुरक्षा होगी। नगर निगम का दफ्तर, गेस्ट हाउस और पार्क समेत ककरा सुरक्षित रहेेगा।
परौर में तटबंधों की मरम्मत की जरूरत
परौर। गत वर्ष शासन ने बाढ़ प्रभावित गांवों के किनारे 14 तटबंध बनाने को 11 करोड़ रुपये स्वीकृत किए। मानसून सीजन मेें काम कराने के कारण गत वर्ष लगाए गए जिओ ट्यूब के अस्थायी तटबंध क्षतिग्रस्त होने लगे हैं। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता विजय दिवाकर का कहना है कि तटबंधों की मरम्मत का काम शीघ्र शुरू हो जाएगा।
बाढ़ चौकियों पर गांव और क्षेत्र स्तर के अधिकारियों व कर्मचारियों की ड्यूटी भी निर्धारित कर दी गई है। डीएम के निर्देश पर संबंधित विभागों के अधिकारी बाढ़ चौकियों पर आवश्यक रसद, दवाओं आदि की व्यवस्था कराएंगे। -गिरिजेश कुमार चौधरी, बाढ़ आपदा राहत प्रभारी/एडीएम फाइनेंस