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उफनाई रामगंगा से 18 गांवों का अस्तित्व खतरे में पड़ा
Updated Wed, 06 Sep 2017 08:23 PM IST
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शाहजहांपुर। नरौरा बैराज से गंगा और रामगंगा में लगातार छोड़े जा रहे पानी से नदियां उफान पर हैं। इससे रामगंगा नदी के किनारे बसे करीब 18 गांवों का अस्तित्व संकट में पड़ गया है। वहीं 50 गांव कटान के मुहाने पर खड़े हैं। हालात बेकाबू होते ही प्रशासन अलर्ट हो गया है। बुधवार को डीएम के निर्देश पर एसडीएम जलालाबाद सत्यप्रिय सिंह के अलावा दो अतिरिक्त मजिस्ट्रेट परौर में लगाए गए हैं। वहीं सिंचाई विभाग के अधिकारी नदी से कटान रोकने के लिए ठोकरें बनवा रहे हैं। दोपहर बाद जिलाधिकारी नरेंद्र कुमार सिंह, एडीएम प्रशासन जितेंद्र शर्मा टीम के साथ वहां परौर पहुंचे और काम का जायजा लिया।
गंगा के जल स्तर में बुधवार को भी बढ़ोत्तरी हुई वहीं रामगंगा 24 घंटे के दौरान जल स्तर में मामूली कमी के बावजूद उफान बरकरार है। परौर प्रतिनिधि के अनुसार इलाके के करीब 12 गांव इनमें मोहनपुर, परौर, कुडरी, दहलिया, कुंडरिया, हैदलपुर आदि पर खतरा मंडरा रहा है। स्थिति यह है कि परौर के राजमहल से नदी मात्र 100 मीटर दूर रह गई है। एहतियात के तौर पर नदी किनारे चार गोताखोर लगाए गए हैं।
इधर, मिर्जापुर में आधा दर्जन गांवों में कीलापुर, कुनिया, पाहरुआ, मौजमपुर, अटा , टेडा का अस्तित्व भी खतरे में है। इस क्षेत्र में भी नदी में ठोकर बनाने का काम तेज कर दिया गया है। बाढ़ से ग्राम हरिहरपुर में रात से भू कटान जारी है। दो दिन में गांव के बांकेलाल, बृहमानंद, महेश, रामदास, रिषीपाल, प्रेमपाल आदि के छप्पर नदी में समा गए हैं। इधर, प्राथमिक स्कूल टेढ़ा का मुख्य भवन तो पिछले वर्ष ही आधा नदी में कट गया था। शिक्षक अतिरिक्त कक्ष में छात्रों का बैठाकर पढ़ाते थे। अब यह अतिरिक्त कक्ष भी कटने के कगार पर है। ग्रामीणों के अनुसार करीब पचास गांवों पर बाढ़ का असर पड़ रहा है।
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गंगा के जल स्तर में बुधवार को भी बढ़ोत्तरी हुई वहीं रामगंगा 24 घंटे के दौरान जल स्तर में मामूली कमी के बावजूद उफान बरकरार है। परौर प्रतिनिधि के अनुसार इलाके के करीब 12 गांव इनमें मोहनपुर, परौर, कुडरी, दहलिया, कुंडरिया, हैदलपुर आदि पर खतरा मंडरा रहा है। स्थिति यह है कि परौर के राजमहल से नदी मात्र 100 मीटर दूर रह गई है। एहतियात के तौर पर नदी किनारे चार गोताखोर लगाए गए हैं।
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इधर, मिर्जापुर में आधा दर्जन गांवों में कीलापुर, कुनिया, पाहरुआ, मौजमपुर, अटा , टेडा का अस्तित्व भी खतरे में है। इस क्षेत्र में भी नदी में ठोकर बनाने का काम तेज कर दिया गया है। बाढ़ से ग्राम हरिहरपुर में रात से भू कटान जारी है। दो दिन में गांव के बांकेलाल, बृहमानंद, महेश, रामदास, रिषीपाल, प्रेमपाल आदि के छप्पर नदी में समा गए हैं। इधर, प्राथमिक स्कूल टेढ़ा का मुख्य भवन तो पिछले वर्ष ही आधा नदी में कट गया था। शिक्षक अतिरिक्त कक्ष में छात्रों का बैठाकर पढ़ाते थे। अब यह अतिरिक्त कक्ष भी कटने के कगार पर है। ग्रामीणों के अनुसार करीब पचास गांवों पर बाढ़ का असर पड़ रहा है।
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