{"_id":"5b8eca8e867a5548416b8e08","slug":"41536084622-shahjahanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीकृष्ण 84 साल की आयु में भी कर रहे शिक्षण कार्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीकृष्ण 84 साल की आयु में भी कर रहे शिक्षण कार्य
Updated Tue, 04 Sep 2018 11:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो-01, 02 में
84 वर्ष की उम्र में भी श्रीकृष्ण बांट रहे ज्ञान
3 साल पहले पूमावि कांट से हुए थे सेवानिवृत्त
शिष्य ओम प्रकाश ने भी रिटायर होने के बाद नहीं छोड़ा शिक्षक धर्म
अजय अवस्थी
शाहजहांपुर। ऐसे शिक्षकों को तो सर्वत्र पूजा जाना चाहिए, जिन्होंने अपना पूरा जीवन ही निस्वार्थ भाव से शिक्षा को समर्पित कर दिया है। ऐसे गुरुजन अपने समाज के ही अंग हैं और अपनी उम्र को चुनौती देते हुए बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कारित करने में जुटे हैं। भले ही ब्लैक बोर्ड पर उनके हाथ कांपतेेे हों, लेकिन छात्र-छात्राओं को ज्ञानार्जन कराने में वह मिसाल-दर-मिसाल कायम करते जा रहे हैं। महानता की श्रेणी प्राप्त कर चुके इन शिक्षकों के नाम श्रीकृष्ण शर्मा और ओम प्रकाश शर्मा हैं। दोनों में खास बात यह भी है कि शर्मा द्वय आपस में गुरु-शिष्य भी हैं।
बात कांट क्षेत्र के श्रीकृष्ण शर्मा और ओम प्रकाश शर्मा की हो रही है। श्रीकृष्ण शर्मा जून 1995 में सेवानिवृत्त होने के बाद पिछले 23 साल से लगातार पूर्व माध्यमिक विद्यालय कांट में शिक्षण कार्य कर रहे हैं। चौरासी साल के हो चुके श्रीकृष्ण विकास खंड कांट के गांव मोहनपुर के निवासी हैं और अपने घर से आठ किलोमीटर साइकिल से नियमित स्कूल जाते हैं और बच्चों को अंग्रेजी तथा हिंदी का ज्ञान बांटते हैं। एक सवाल के जवाब में श्रीकृष्ण बताते हैं कि वह महात्मा बुद्ध के उस विचार से प्रेरित हुए, जिसमें उन्होंने कहा था कि शिक्षक के लिए उसका शिष्य दत्तक पुत्र के समान होता है। इसी विचार को जीवन में उतारते हुए उन्होंने रिटायरमेंट के दिन संकल्प लिया था कि जब तक शरीर में शक्ति रहेगी, तब तक वह पुत्रवत बच्चों को पढ़ाना नहीं छोड़ेंगे। इसी आत्मा की आवाज पर वह आज भी विद्यालय जाते हैं।
श्रीकृष्ण शर्मा से प्रेरित होकर इसी क्षेत्र के शिक्षक ओम प्रकाश शर्मा उच्च प्राथमिक स्कूल नगला वनवारी कांट से वह 30 जून 2014 को सेवानिवृत्त हो गए। सेवा निवृत्त होने के बाद पिछले चार साल से वह जूनियर हाई स्कूल देवरिया झाला कांट में छात्र-छात्राओं को संस्कृत और अंग्रेजी का ज्ञान बांट रहे हैं। वह बताते हैं कि श्रीकृष्ण शर्मा उनके गुरु हैं और पिता तुल्य गुरू की प्रेरणा से वह पिछले चार वर्षों से नियमित स्कूल जाकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं। गुरु की आज्ञा शिरोधार्य करते हुए उन्होंने जीवन का ध्येय बना लिया है कि जब तक स्वस्थ्य और स्कूल पहुंचने की स्थिति में रहेंगे, तब तक वह नियमित शिक्षक की भांति अपने शिक्षक होने का दायित्व निभाते रहेंगे।
विज्ञापन
फोटो- 07 में
राज्य पुरस्कार प्राप्त सुभाष दे रहे बालिका शिक्षा को बढ़ावा
शाहजहांपुर। गत वर्ष पांच सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथ से राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षक सुभाष चंद्र मिश्रा ने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने का संकल्प लिया है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय पड़ैचा कांच में प्रधान अध्यापक पद पर कार्यरत सुभाष चंद्र मिश्रा बताते हैं कि वह हमेशा से ही बालिकाओं को आगे बढ़ता देखना चाहते रहे। पुरस्कार प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपने संकल्प को और मजबूती प्रदान की और आज वह बालिकाओं को शिक्षित करने की मुहिम में जुटे हुए हैं। स्कूल को सुव्यवस्थित रखने, शिक्षा के साथ अन्य क्रिया-कलापों में विशेष रुचि रखने वाले राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक अपने कर्तव्य के प्रति अडिग हैं।
विज्ञापन
84 वर्ष की उम्र में भी श्रीकृष्ण बांट रहे ज्ञान
3 साल पहले पूमावि कांट से हुए थे सेवानिवृत्त
शिष्य ओम प्रकाश ने भी रिटायर होने के बाद नहीं छोड़ा शिक्षक धर्म
अजय अवस्थी
शाहजहांपुर। ऐसे शिक्षकों को तो सर्वत्र पूजा जाना चाहिए, जिन्होंने अपना पूरा जीवन ही निस्वार्थ भाव से शिक्षा को समर्पित कर दिया है। ऐसे गुरुजन अपने समाज के ही अंग हैं और अपनी उम्र को चुनौती देते हुए बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कारित करने में जुटे हैं। भले ही ब्लैक बोर्ड पर उनके हाथ कांपतेेे हों, लेकिन छात्र-छात्राओं को ज्ञानार्जन कराने में वह मिसाल-दर-मिसाल कायम करते जा रहे हैं। महानता की श्रेणी प्राप्त कर चुके इन शिक्षकों के नाम श्रीकृष्ण शर्मा और ओम प्रकाश शर्मा हैं। दोनों में खास बात यह भी है कि शर्मा द्वय आपस में गुरु-शिष्य भी हैं।
बात कांट क्षेत्र के श्रीकृष्ण शर्मा और ओम प्रकाश शर्मा की हो रही है। श्रीकृष्ण शर्मा जून 1995 में सेवानिवृत्त होने के बाद पिछले 23 साल से लगातार पूर्व माध्यमिक विद्यालय कांट में शिक्षण कार्य कर रहे हैं। चौरासी साल के हो चुके श्रीकृष्ण विकास खंड कांट के गांव मोहनपुर के निवासी हैं और अपने घर से आठ किलोमीटर साइकिल से नियमित स्कूल जाते हैं और बच्चों को अंग्रेजी तथा हिंदी का ज्ञान बांटते हैं। एक सवाल के जवाब में श्रीकृष्ण बताते हैं कि वह महात्मा बुद्ध के उस विचार से प्रेरित हुए, जिसमें उन्होंने कहा था कि शिक्षक के लिए उसका शिष्य दत्तक पुत्र के समान होता है। इसी विचार को जीवन में उतारते हुए उन्होंने रिटायरमेंट के दिन संकल्प लिया था कि जब तक शरीर में शक्ति रहेगी, तब तक वह पुत्रवत बच्चों को पढ़ाना नहीं छोड़ेंगे। इसी आत्मा की आवाज पर वह आज भी विद्यालय जाते हैं।
विज्ञापन
श्रीकृष्ण शर्मा से प्रेरित होकर इसी क्षेत्र के शिक्षक ओम प्रकाश शर्मा उच्च प्राथमिक स्कूल नगला वनवारी कांट से वह 30 जून 2014 को सेवानिवृत्त हो गए। सेवा निवृत्त होने के बाद पिछले चार साल से वह जूनियर हाई स्कूल देवरिया झाला कांट में छात्र-छात्राओं को संस्कृत और अंग्रेजी का ज्ञान बांट रहे हैं। वह बताते हैं कि श्रीकृष्ण शर्मा उनके गुरु हैं और पिता तुल्य गुरू की प्रेरणा से वह पिछले चार वर्षों से नियमित स्कूल जाकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं। गुरु की आज्ञा शिरोधार्य करते हुए उन्होंने जीवन का ध्येय बना लिया है कि जब तक स्वस्थ्य और स्कूल पहुंचने की स्थिति में रहेंगे, तब तक वह नियमित शिक्षक की भांति अपने शिक्षक होने का दायित्व निभाते रहेंगे।
विज्ञापन
फोटो- 07 में
राज्य पुरस्कार प्राप्त सुभाष दे रहे बालिका शिक्षा को बढ़ावा
शाहजहांपुर। गत वर्ष पांच सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथ से राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षक सुभाष चंद्र मिश्रा ने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने का संकल्प लिया है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय पड़ैचा कांच में प्रधान अध्यापक पद पर कार्यरत सुभाष चंद्र मिश्रा बताते हैं कि वह हमेशा से ही बालिकाओं को आगे बढ़ता देखना चाहते रहे। पुरस्कार प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपने संकल्प को और मजबूती प्रदान की और आज वह बालिकाओं को शिक्षित करने की मुहिम में जुटे हुए हैं। स्कूल को सुव्यवस्थित रखने, शिक्षा के साथ अन्य क्रिया-कलापों में विशेष रुचि रखने वाले राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक अपने कर्तव्य के प्रति अडिग हैं।