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नायब तहसीलदार सहित चार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
Updated Wed, 02 Aug 2017 06:58 PM IST
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नायब तहसीलदार पर धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज
जमीन की फर्जी विरासत दर्ज करने का आरोप
कोर्ट के आदेश पर दर्ज रिपोर्ट में तीन और भी हैं नामजद
अमर उजाला ब्यूरो
पुवायां (शाहजहांपुर)।
न्यायालय के आदेश पर पुवायां के तत्कालीन नायब तहसीलदार सहित चार लोगों के खिलाफ धारा 419 और 420 के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। खुटार के गांव अठकोना निवासी रामकुमार की ओर से दर्ज रिपोर्ट में कहा गया है कि रामकुमार के अविवाहित भाई नोखेलाल की मौत 22 जनवरी, 2017 को हो गई थी। उनकी मौत के बाद नोखेलाल की संपत्ति के वारिस भाई रामकुमार, चेतराम, मिश्रीलाल, नेतराम ही थे। अन्य कोई वारिस नहीं था। आरोप है कि गांव अठकोना के ही प्रेमशंकर ने तत्कालीन नायब तहसीलदार ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह से मिलकर नोखेलाल की जमीन की फर्जी विरासत अपने नाम करा ली। इस मामले में बंडा के गांव ररुआ के मनोहरलाल और खीरी के थाना मैलानी के गांव सुंदरपुर के आशाराम ने झूठी गवाही दी।
रामकुमार जब 30 मई को खतौनी लेने गए तो उन्हें इस धोखाधड़ी का पता चला। उन्होंने पुलिस को तहरीर दी, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। एसपी से शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने नायब तहसीलदार ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, प्रेमशंकर, आशाराम और मनोहर लाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
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जमीन की फर्जी विरासत दर्ज करने का आरोप
कोर्ट के आदेश पर दर्ज रिपोर्ट में तीन और भी हैं नामजद
अमर उजाला ब्यूरो
पुवायां (शाहजहांपुर)।
न्यायालय के आदेश पर पुवायां के तत्कालीन नायब तहसीलदार सहित चार लोगों के खिलाफ धारा 419 और 420 के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। खुटार के गांव अठकोना निवासी रामकुमार की ओर से दर्ज रिपोर्ट में कहा गया है कि रामकुमार के अविवाहित भाई नोखेलाल की मौत 22 जनवरी, 2017 को हो गई थी। उनकी मौत के बाद नोखेलाल की संपत्ति के वारिस भाई रामकुमार, चेतराम, मिश्रीलाल, नेतराम ही थे। अन्य कोई वारिस नहीं था। आरोप है कि गांव अठकोना के ही प्रेमशंकर ने तत्कालीन नायब तहसीलदार ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह से मिलकर नोखेलाल की जमीन की फर्जी विरासत अपने नाम करा ली। इस मामले में बंडा के गांव ररुआ के मनोहरलाल और खीरी के थाना मैलानी के गांव सुंदरपुर के आशाराम ने झूठी गवाही दी।
रामकुमार जब 30 मई को खतौनी लेने गए तो उन्हें इस धोखाधड़ी का पता चला। उन्होंने पुलिस को तहरीर दी, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। एसपी से शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने नायब तहसीलदार ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, प्रेमशंकर, आशाराम और मनोहर लाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
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