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Shahjahanpur News: 38 डिग्री तापमान... स्कूलों में बच्चों को गर्मी से बचाने के नहीं इंतजाम
Thu, 10 Apr 2025 12:29 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Thu, 10 Apr 2025 12:29 AM IST
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तिलहर प्राथमिक विद्यालय में एक ही क्लास में बैठे कई कक्षाओं के बच्चे। संवाद
- फोटो : mathura
शाहजहांपुर। 38 डिग्री तापमान होने के बाद भी स्कूलों का समय नहीं बदला गया है। इसके चलते बच्चे गर्मी में बेहाल हैं। पंखे नहीं चलने से उमस में बच्चों के बीमार होने का खतरा बना हुआ है। कुछ स्कूलों में ठंडे पानी तक की व्यवस्था तक नहीं है। शिक्षकों ने समय को बदलवाने की मांग डीएम से की है।
वर्तमान समय में सुबह आठ से दो बजे तक परिषदीय विद्यालयों का संचालन हो रहा है, जबकि अप्रैल में पारा लगातार चढ़ रहा है। ऐसे में स्कूलों में बच्चों को दुश्वारियों से जूझना पड़ रहा है। शहरी क्षेत्र में स्कूलों में पंखे तो चलते हैं, लेकिन बिजली कट का समाधान नहीं है।
अधिकतर स्कूलों में उनके लिए ठंडे पानी तक का इंतजाम नहीं है। सबसे ज्यादा ग्रामीण इलाकों के स्कूलों का हाल खराब है। वहां विद्यालयों में बिजली के कनेक्शन तक नहीं हैं। जहां कनेक्शन हैं, वहां भी दोपहर में गेहूं की फसल के चलते बिजली कटौती रहती है। ऐसे में बच्चों को गर्मी में जूझना पड़ता है। तपती धूप में बच्चे शिक्षा ग्रहण करने के लिए मजबूर हैं। वहीं स्कूलों में पर्याप्त पानी तक की व्यवस्था नहीं है।
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शिक्षकों ने स्कूल का समय सुबह साढ़े सात से साढ़े 12 बजे तक करने की मांग की है। हालांकि, शिक्षा विभाग की ओर से अभी कोई कदम नहीं उठाया गया है।
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ग्रामीण इलाकों में बिजली नहीं आने से पंखे तक नहीं चलते हैं। खुले इलाके में स्कूल होने से सीधे हवा लगती है। गर्मी से बच्चों के बीमार होने की आशंका है। ऐसे में विद्यालय का समय परिवर्तन किया जाए।
राजकुमार तिवारी, मीडिया प्रभारी, प्राथमिक शिक्षक संघ
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-कुछ जिलों में स्कूलों का समय बदल गया है। अपने यहां भी स्कूल समय के बदलाव को लेकर प्रयास चल रहे हैं। शिक्षकों की मांगों को अधिकारियों को अवगत कराएंगे।
सुरेंद्र मौर्या, बीईओ नगर
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वर्तमान समय में सुबह आठ से दो बजे तक परिषदीय विद्यालयों का संचालन हो रहा है, जबकि अप्रैल में पारा लगातार चढ़ रहा है। ऐसे में स्कूलों में बच्चों को दुश्वारियों से जूझना पड़ रहा है। शहरी क्षेत्र में स्कूलों में पंखे तो चलते हैं, लेकिन बिजली कट का समाधान नहीं है।
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अधिकतर स्कूलों में उनके लिए ठंडे पानी तक का इंतजाम नहीं है। सबसे ज्यादा ग्रामीण इलाकों के स्कूलों का हाल खराब है। वहां विद्यालयों में बिजली के कनेक्शन तक नहीं हैं। जहां कनेक्शन हैं, वहां भी दोपहर में गेहूं की फसल के चलते बिजली कटौती रहती है। ऐसे में बच्चों को गर्मी में जूझना पड़ता है। तपती धूप में बच्चे शिक्षा ग्रहण करने के लिए मजबूर हैं। वहीं स्कूलों में पर्याप्त पानी तक की व्यवस्था नहीं है।
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शिक्षकों ने स्कूल का समय सुबह साढ़े सात से साढ़े 12 बजे तक करने की मांग की है। हालांकि, शिक्षा विभाग की ओर से अभी कोई कदम नहीं उठाया गया है।
ग्रामीण इलाकों में बिजली नहीं आने से पंखे तक नहीं चलते हैं। खुले इलाके में स्कूल होने से सीधे हवा लगती है। गर्मी से बच्चों के बीमार होने की आशंका है। ऐसे में विद्यालय का समय परिवर्तन किया जाए।
राजकुमार तिवारी, मीडिया प्रभारी, प्राथमिक शिक्षक संघ
-कुछ जिलों में स्कूलों का समय बदल गया है। अपने यहां भी स्कूल समय के बदलाव को लेकर प्रयास चल रहे हैं। शिक्षकों की मांगों को अधिकारियों को अवगत कराएंगे।
सुरेंद्र मौर्या, बीईओ नगर