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मौसम ने फिर बदली करवट, हवा के साथ बूंदाबांदी से बढ़ी सर्दी
Updated Mon, 12 Feb 2018 10:00 AM IST
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शाहजहांपुर। कड़ाके की ठंड का दौर गुजरने के बाद तेजी से सामान्य हो रहे मौसम ने रविवार को सुबह करवट बदलते हुए अपने तेवर फिर से तीखे कर लिए। सुबह से आसमान पर बादल छाए रहने से धूप देर से निकली। इसके साथ ही उत्तर-पश्चिमी पछुआ हवाओं के झोंकों ने जन सामान्य को फिर से सर्दी का अहसास कराना शुरू कर दिया। देर शाम ठंडी हवा चलने के साथ बूंदाबांदी से थर्मामीटर का पारा करीब दो डिग्री लुढ़क गया। सर्दी से बचने के लिए लोगों ने दिन ढलते ही खुद को गर्म कपड़ों से ढक लिया।
सर्दी की वापसी का अहसास चार दिन पहले ही हो गया था, जब बुधवार की रात आसमान साफ रहने और हल्का पाला गिरने से रात का तापमान पांच डिग्री गिरकर 5.2 डिग्री रह गया। इससे बृहस्पतिवार की सुबह वातावरण में गलन बढ़ गई। हालांकि, अगले दो दिन धूप निकलने से मौसम में थोड़ा सुधार हुआ, लेकिन पछुआ हवा से दिन ढलने के बाद से अगले दिन सुबह सूर्योदय तक सर्दी का असर बना रहा। बीते दिन सुबह हल्के बादल छाए, लेकिन बीच में कुछ देर को धूप निकलने से मौसम सामान्य बना रहा और उसी के अनुरूप बाजारों में भी चहल-पहल बरकरार रही।
शनिवार की रात बादल छंटने से पाला ओस के रूप में नीचे उतरा तो न्यूनतम तापमान भी 9.1 डिग्री से घटकर 7.4 डिग्री रह गया। सर्दी बढ़ाने की बाकी कसर दिन में बादल छाने के साथ ठंडी हवा ने पूरी कर दी। शाम छह बजे के बाद बूंदाबांदी होने से जनजीवन में ठहराव आने लगा और सनडे की छुट्टी के बावजूद बाजार दिन ढलते ही सूने पड़ गए। गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह ने बताया कि बादलों की वजह से दिन का तापमान दो डिग्री गिरावट के साथ 23.6 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। उन्होंने सोमवार को भी दिन में बादल छाए रहने और हल्की बूंदाबांदी होने का अनुमान जताया है।
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रबी फसलों के लिए बूंदाबांदी साबित होगी अमृत वर्षा
बादलों के साथ बूंदाबांदी से सर्दी में भले ही इजाफा हो गया हो, लेकिन रबी सीजन की अधिकांश फसलों के लिए यह अमृत वर्षा साबित होगी। नियामतपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक डॉ. केएम सिंह का यही मानना है। उनका कहना है अधिकांश लाही पकने के बाद कटकर किसानों के घर पहुंच चुकी है और राई, सरसों पकने की प्रक्रिया में है। आलू की अधिकांश फसल खेतों से निकल चुकी है। गेहूं बढ़वार पर और बाली तैयार होने की स्टेज पर होने से बूंदाबांदी का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बालियों में दूध ज्यादा बनेगा और दाना पुष्ट होगा। यही नहीं, बूंदाबांदी मटर को भी मजबूत करेगी। डॉ. सिंह के अनुसार वातावरण की नमी से गन्ना का वजन बढ़ने से किसान फायदे में रहेंगे, लेकिन इससे चीनी मिलों को नुकसान होगा, क्योंकि गन्ना में चीनी परता कम होगी। हवा का वेग बढ़ने की दशा में खेत में गन्ना गिरने से नुकसान की आशंका है।
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सर्दी की वापसी का अहसास चार दिन पहले ही हो गया था, जब बुधवार की रात आसमान साफ रहने और हल्का पाला गिरने से रात का तापमान पांच डिग्री गिरकर 5.2 डिग्री रह गया। इससे बृहस्पतिवार की सुबह वातावरण में गलन बढ़ गई। हालांकि, अगले दो दिन धूप निकलने से मौसम में थोड़ा सुधार हुआ, लेकिन पछुआ हवा से दिन ढलने के बाद से अगले दिन सुबह सूर्योदय तक सर्दी का असर बना रहा। बीते दिन सुबह हल्के बादल छाए, लेकिन बीच में कुछ देर को धूप निकलने से मौसम सामान्य बना रहा और उसी के अनुरूप बाजारों में भी चहल-पहल बरकरार रही।
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शनिवार की रात बादल छंटने से पाला ओस के रूप में नीचे उतरा तो न्यूनतम तापमान भी 9.1 डिग्री से घटकर 7.4 डिग्री रह गया। सर्दी बढ़ाने की बाकी कसर दिन में बादल छाने के साथ ठंडी हवा ने पूरी कर दी। शाम छह बजे के बाद बूंदाबांदी होने से जनजीवन में ठहराव आने लगा और सनडे की छुट्टी के बावजूद बाजार दिन ढलते ही सूने पड़ गए। गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह ने बताया कि बादलों की वजह से दिन का तापमान दो डिग्री गिरावट के साथ 23.6 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। उन्होंने सोमवार को भी दिन में बादल छाए रहने और हल्की बूंदाबांदी होने का अनुमान जताया है।
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रबी फसलों के लिए बूंदाबांदी साबित होगी अमृत वर्षा
बादलों के साथ बूंदाबांदी से सर्दी में भले ही इजाफा हो गया हो, लेकिन रबी सीजन की अधिकांश फसलों के लिए यह अमृत वर्षा साबित होगी। नियामतपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक डॉ. केएम सिंह का यही मानना है। उनका कहना है अधिकांश लाही पकने के बाद कटकर किसानों के घर पहुंच चुकी है और राई, सरसों पकने की प्रक्रिया में है। आलू की अधिकांश फसल खेतों से निकल चुकी है। गेहूं बढ़वार पर और बाली तैयार होने की स्टेज पर होने से बूंदाबांदी का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बालियों में दूध ज्यादा बनेगा और दाना पुष्ट होगा। यही नहीं, बूंदाबांदी मटर को भी मजबूत करेगी। डॉ. सिंह के अनुसार वातावरण की नमी से गन्ना का वजन बढ़ने से किसान फायदे में रहेंगे, लेकिन इससे चीनी मिलों को नुकसान होगा, क्योंकि गन्ना में चीनी परता कम होगी। हवा का वेग बढ़ने की दशा में खेत में गन्ना गिरने से नुकसान की आशंका है।