{"_id":"59da20a04f1c1bf2538b63be","slug":"31507467424-shahjahanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"धान परिवहन भाड़ा तय कराएंगी प्रमुख सचिव खाद्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धान परिवहन भाड़ा तय कराएंगी प्रमुख सचिव खाद्य
Updated Sun, 08 Oct 2017 06:27 PM IST
विज्ञापन
शाहजहांपुर। ट्रांसपोर्टेशन दरों में कमी को लेकर धान की सरकारी खरीद का सहकारी समितियों के सचिवों के बहिष्कार किए जाने का मामला डीएम नरेंद्र कुमार सिंह ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान खाद्य विभाग की प्रमुख सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा के समक्ष प्रमुखता से उठाते हुए उनसे मदद मांगी। वीसी में मौजूद खाद्य आयुक्त ने भारतीय खाद्य निगम के महाप्रबंधक को यह प्रकरण शीघ्र निस्तारित करने के निर्देश दिए, लेकिन प्रमुख सचिव ने अपने स्तर से धान की परिवहन दरों में संशोधन के लिए एफसीआई के जीएम से पत्राचार का ब्यौरा तलब किया है।
मूल्य समर्थन योजना के तहत हर साल गेहूं और धान की सरकारी खरीद शुरू होते ही भारतीय खाद्य निगम की परिवहन दरों में असमानता को लेकर विभिन्न क्रय एजेंसियों के कर्मचारियों का असंतोष मुखर होने लगता है। प्रशासनिक अधिकारी हर बार संबंधित पक्षों से वार्ता कर ढुलाई शुल्क में बढ़ोत्तरी का आश्वासन देते रहे, लेकिन किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचे। नतीजा सामने है। धान की सरकारी खरीद शुरू होेते ही भाड़ा की दरों को लेकर सहकारी सचिव विरोध के स्वर उठाने लगे हैं। इससे क्रय केंद्र्रों पर खरीदे गए धान की गोदामों और मिलों तक ढुलाई में व्यवधान पड़ना तय माना जा रहा है।
इसलिए भाड़ा दरों को लेकर पनप रहा असंतोष
परिवहन भाड़ा की दरें तय करने का अधिकार नोडल एजेंसी के नाते भारतीय खाद्य निगम को दिया गया है। निगम के उच्च अधिकारियों की ओर से जो दरें तय की जाती हैं, वह बाजार दरों से काफी कम हैं। सहकारी सचिवों को ठेकेदार के बजाय अपने स्तर से धान का ट्रांसपोर्टेशन करना पड़ता है। इसलिए वे बाजार दरों के सापेक्ष परिवहन भाड़ा मांग कर रहे हैं। यही नहीं, इसके लिए डीएम स्तर से उनका हर साल एग्रीमेंट होता है, लेकिन भुगतान अनुबंध में निहित दरों के बजाय एफसीआई की दरों से किया जा रहा है। चूंकि, एफसीआई अपने केंद्र प्रभारियों को अधिक दरों के टेंडर स्वीकृत कर रही है। इसीलिए सहकारी सचिवों मेें असंतोष है।
विज्ञापन
बहिष्कार की दूसरी चेतावनी से दिखा असर
सहकारी सचिव परिवहन दरों में संशोधन की मांग को लेेकर गत माह के अंतिम सप्ताह मेें भी डीएम से भेंट कर चुके थे। इसके बावजूद प्रशासन गेंद एफसीआई के पाले मे डाले बैठा था। इस पर सहकारिता विभाग के केंद्र प्रभारियों ने दो दिन पहले पीसीएफ और पीसीयू के जिला प्रबंधकों को ज्ञापन देकर चेताया कि परिवहन दरों में बढ़ोत्तरी नहीं होने पर धान की खरीद नहीं करेंगे। चूंकि, ऐसी दशा में क्रय केंद्रों पर आवक बढ़ने से भंडारण की समस्या खड़ी हो सकती है। इसीलिए सचिवों की दूसरी चेतावनी ने अपना असर दिखाया।
प्रमुख सचिव की व्यक्तिगत रुचि से बंधी उम्मीदें
वीडियो कांफ्रेंसिंग में एफसीआई के महाप्रबंधक ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में दिल्ली स्थित उच्चाधिकारियों को पहले भी अवगत कराया जा चुका है। अब दोबारा पत्राचार किया जा रहा है। चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए प्रमुख सचिव ने जीएम से उच्चाधिकारियों को भेजे गए पत्रों की प्रतिलिपियां तलब करते हुए कहा कि वह स्वयं अपने स्तर से संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर समस्या का समाधान कराएंगी। उप संभागीय विपणन अधिकारी रूपेश सिंह का मानना है कि प्रमुख सचिव की व्यक्तिगत रुचि से परिवहन दरों में बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद बढ़ गई है।
विज्ञापन
मूल्य समर्थन योजना के तहत हर साल गेहूं और धान की सरकारी खरीद शुरू होते ही भारतीय खाद्य निगम की परिवहन दरों में असमानता को लेकर विभिन्न क्रय एजेंसियों के कर्मचारियों का असंतोष मुखर होने लगता है। प्रशासनिक अधिकारी हर बार संबंधित पक्षों से वार्ता कर ढुलाई शुल्क में बढ़ोत्तरी का आश्वासन देते रहे, लेकिन किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचे। नतीजा सामने है। धान की सरकारी खरीद शुरू होेते ही भाड़ा की दरों को लेकर सहकारी सचिव विरोध के स्वर उठाने लगे हैं। इससे क्रय केंद्र्रों पर खरीदे गए धान की गोदामों और मिलों तक ढुलाई में व्यवधान पड़ना तय माना जा रहा है।
विज्ञापन
इसलिए भाड़ा दरों को लेकर पनप रहा असंतोष
परिवहन भाड़ा की दरें तय करने का अधिकार नोडल एजेंसी के नाते भारतीय खाद्य निगम को दिया गया है। निगम के उच्च अधिकारियों की ओर से जो दरें तय की जाती हैं, वह बाजार दरों से काफी कम हैं। सहकारी सचिवों को ठेकेदार के बजाय अपने स्तर से धान का ट्रांसपोर्टेशन करना पड़ता है। इसलिए वे बाजार दरों के सापेक्ष परिवहन भाड़ा मांग कर रहे हैं। यही नहीं, इसके लिए डीएम स्तर से उनका हर साल एग्रीमेंट होता है, लेकिन भुगतान अनुबंध में निहित दरों के बजाय एफसीआई की दरों से किया जा रहा है। चूंकि, एफसीआई अपने केंद्र प्रभारियों को अधिक दरों के टेंडर स्वीकृत कर रही है। इसीलिए सहकारी सचिवों मेें असंतोष है।
विज्ञापन
बहिष्कार की दूसरी चेतावनी से दिखा असर
सहकारी सचिव परिवहन दरों में संशोधन की मांग को लेेकर गत माह के अंतिम सप्ताह मेें भी डीएम से भेंट कर चुके थे। इसके बावजूद प्रशासन गेंद एफसीआई के पाले मे डाले बैठा था। इस पर सहकारिता विभाग के केंद्र प्रभारियों ने दो दिन पहले पीसीएफ और पीसीयू के जिला प्रबंधकों को ज्ञापन देकर चेताया कि परिवहन दरों में बढ़ोत्तरी नहीं होने पर धान की खरीद नहीं करेंगे। चूंकि, ऐसी दशा में क्रय केंद्रों पर आवक बढ़ने से भंडारण की समस्या खड़ी हो सकती है। इसीलिए सचिवों की दूसरी चेतावनी ने अपना असर दिखाया।
प्रमुख सचिव की व्यक्तिगत रुचि से बंधी उम्मीदें
वीडियो कांफ्रेंसिंग में एफसीआई के महाप्रबंधक ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में दिल्ली स्थित उच्चाधिकारियों को पहले भी अवगत कराया जा चुका है। अब दोबारा पत्राचार किया जा रहा है। चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए प्रमुख सचिव ने जीएम से उच्चाधिकारियों को भेजे गए पत्रों की प्रतिलिपियां तलब करते हुए कहा कि वह स्वयं अपने स्तर से संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर समस्या का समाधान कराएंगी। उप संभागीय विपणन अधिकारी रूपेश सिंह का मानना है कि प्रमुख सचिव की व्यक्तिगत रुचि से परिवहन दरों में बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद बढ़ गई है।