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ओसीएफ कर्मचारी में मिला स्वाइन फ्लू, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप
Updated Tue, 05 Sep 2017 06:27 PM IST
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शाहजहांपुर। दो माह से बुखार से पीड़ित ओसीएफ कर्मचारी की मेडिकल जांच रिपोर्ट में एच-1, एन-1 पॉजिटिव पाए जाने पर स्वाइल फ्लू की पुष्टि हुई है। उन्हें जिला अस्पताल के स्वाइन फ्लू वार्ड में रखा गया है। जिले में स्वाइन फ्लू का मरीज मिलने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। सीएमओ के निर्देश पर मलेरिया और आईडीएसपी की टीम ने जिला अस्पताल पहुंचकर मरीज का हाल जानने के साथ ही दवा दिलवाई। फिर दोपहर बाद मरीज को हॉयर सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया गया।
रोजा क्षेत्र के गांव हथौड़ा बुजुर्ग निवासी 52 वर्षीय मुन्नालाल ओसीएफ में कर्मचारी हैं। उन्हें 14 जुलाई को जुकाम, बुखार और खांसी की शिकायत हुई तो उन्होंने ओसीएफ चिकित्सालय से दवा ली। वह स्वस्थ हो गए, लेकिन दो दिन बाद उन्हें फिर इसी तरह की शिकायत हुई तो दोबारा दवा ले आए। इस तरह उन्हें जब तक दवा का असर रहता तब तक वह ठीक रहते। दवा का असर कम होते ही फिर से जुकाम, बुखार-खांसी की शिकायत बढ़ जाती। हालत में स्थायी सुधार न होने पर
दिल्ली के मैक्स अस्पताल में उनके बेटे सत्येंद्र लैब टेक्नीशियन हैं। उन्होंने पिता को वहां दिखाने की सलाह दी। 31 अगस्त को वह पिता को दिल्ली ले गए। गजरौला के पास वह लघुशंका करने को कार से उतरे। बरसात हो रही थी। वह उसमें भीग गए। दिल्ली पहुंचते-पहुंचते उनकी हालत और खराब हो गई। सांस लेने में दिक्कत और सीने व शरीर में दर्द की शिकायत बढ़ गई। एक सितंबर को मैक्स हॉस्पिटल में दवा ली लेकिन बुखार फिर भी बना रहा। इस पर दो सितंबर को दवा दिलवाने के साथ ही बेटे ने उनकी जांचे करवाईं। इसके बाद वह तीन अगस्त की रात आठ बजे दिल्ली से वापस आए। अगले दिन चार सितंबर को वह ड्यूटी पर भी गए। शाम को उन्हें व्हाट्सऐप पर जांच रिपोर्ट मिली तो उसमें एच-1, एन-1 पॉजिटिव निकला। इसमें स्वाइन फ्लू की पुष्टि होते ही उन्हें ओसीएफ अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां से उन्हें स्तरीय इलाज के लिए लखनऊ रेफर कर दिया गया।
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एच-1, एन-1 पॉजिटिव मरीज मिला है। उसे जिला में अस्पताल भर्ती कराया गया था, लेकिन अब उसे लखनऊ रेफर कर दिया गया है। इससे पहले दो महिलाओं में स्वाइन फ्लू के लक्षण पाए गए थे, लेकिन उनमें से एक की मौत बरेली और दूसरे की मौत लखनऊ में हुई। इसके अलावा यहां और कोई इस तरह का मरीज नहीं है।
डॉ. आरपी रावत, सीएमओ
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रोजा क्षेत्र के गांव हथौड़ा बुजुर्ग निवासी 52 वर्षीय मुन्नालाल ओसीएफ में कर्मचारी हैं। उन्हें 14 जुलाई को जुकाम, बुखार और खांसी की शिकायत हुई तो उन्होंने ओसीएफ चिकित्सालय से दवा ली। वह स्वस्थ हो गए, लेकिन दो दिन बाद उन्हें फिर इसी तरह की शिकायत हुई तो दोबारा दवा ले आए। इस तरह उन्हें जब तक दवा का असर रहता तब तक वह ठीक रहते। दवा का असर कम होते ही फिर से जुकाम, बुखार-खांसी की शिकायत बढ़ जाती। हालत में स्थायी सुधार न होने पर
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दिल्ली के मैक्स अस्पताल में उनके बेटे सत्येंद्र लैब टेक्नीशियन हैं। उन्होंने पिता को वहां दिखाने की सलाह दी। 31 अगस्त को वह पिता को दिल्ली ले गए। गजरौला के पास वह लघुशंका करने को कार से उतरे। बरसात हो रही थी। वह उसमें भीग गए। दिल्ली पहुंचते-पहुंचते उनकी हालत और खराब हो गई। सांस लेने में दिक्कत और सीने व शरीर में दर्द की शिकायत बढ़ गई। एक सितंबर को मैक्स हॉस्पिटल में दवा ली लेकिन बुखार फिर भी बना रहा। इस पर दो सितंबर को दवा दिलवाने के साथ ही बेटे ने उनकी जांचे करवाईं। इसके बाद वह तीन अगस्त की रात आठ बजे दिल्ली से वापस आए। अगले दिन चार सितंबर को वह ड्यूटी पर भी गए। शाम को उन्हें व्हाट्सऐप पर जांच रिपोर्ट मिली तो उसमें एच-1, एन-1 पॉजिटिव निकला। इसमें स्वाइन फ्लू की पुष्टि होते ही उन्हें ओसीएफ अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां से उन्हें स्तरीय इलाज के लिए लखनऊ रेफर कर दिया गया।
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एच-1, एन-1 पॉजिटिव मरीज मिला है। उसे जिला में अस्पताल भर्ती कराया गया था, लेकिन अब उसे लखनऊ रेफर कर दिया गया है। इससे पहले दो महिलाओं में स्वाइन फ्लू के लक्षण पाए गए थे, लेकिन उनमें से एक की मौत बरेली और दूसरे की मौत लखनऊ में हुई। इसके अलावा यहां और कोई इस तरह का मरीज नहीं है।
डॉ. आरपी रावत, सीएमओ