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एक साथ उठी चार अर्थीं,मचा कहराम
Updated Wed, 10 Jan 2018 08:17 PM IST
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एक साथ उठीं चार अर्थीं, कोहराम मचा
अगल-बगल सजीं चिताएं, मासूम को दफनाया
एक दोस्त का भी हुआ धर्मेंद्र की चिता के पास ही अंतिम संस्कार
अमर उजाला ब्यूरो
खुटार (शाहजहांपुर)।
गांव रौतापुर कलां में बुधवार सुबह एक साथ चार शवों को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने की तैयारी हुई तो गांव वालों की आंखें नम हो उठीं। बड़ी संख्या में लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। दुख की घड़ी में गांव के तमाम घरों में चूल्हे नहीं जले और गांव की दुकानें भी बंद रहीं।
गौरतलब है कि आठ जनवरी की शाम गांव रौतापुर कलां के धर्मेंद्र की कार को रोडवेज बस ने खुटार पुवायां मार्ग पर गांव चमराबोझी मोड़ के पास टक्कर मार दी थी। हादसे में धर्मेंद्र उसका पुत्र पांच वर्षीय गिरधर गोपाल, धर्मेंद्र का दोस्त संतराम की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि गंभीर घायल शिव प्रसाद उर्फ गुड्डू ने जिला अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया था। एक साथ चार मौतों की जानकारी से गांव में कोहराम मच गया था। मंगलवार को विधायक चेतराम ने गांव पहुंचकर मृतकों के परिवार के लोगों को सांत्वना दी थी। पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार देर शाम शव घर पहुंचे सके, जिस कारण अंतिम संस्कार नहीं हो सका था।
बुधवार को चारों शव एक साथ अंतिम संस्कार के लिए ले जाने की तैयारी हुई तो गांव वालों की आंखें नम हो उठीं। महिलाओं के करुण क्रंदन ने माहौल को और ज्यादा गमगीन कर दिया। गांव के दक्षिण तालाब के किनारे धर्मेंद्र की चिता सजाई गई, उसकी चिता के एक तरफ पास में ही पांच वर्षीय पुत्र गिरधर गोपाल को दफनाया गया। दूसरी ओर धर्मेंद्र के दोस्त संतराम की चिता सजाकर मुखाग्नि दी गई। शिवप्रसाद का उसके खेत में अंतिम संस्कार किया गया।
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गांव में पहली बार एक साथ हुईं चार की अंत्येष्टि
खुटार। गांव रौतापुर कलां के बुजुर्गों ने बताया कि गांव में इससे पूर्व कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि एक साथ चार लोगों की मौत हुई हो। चार लोगों की मौत से पूरा गांव शोकाकुल रहा और गांव की तमाम दुकानें बंद रहने के साथ ही तमाम घरों में चूल्हे तक नहीं जले। गांव की तमाम महिलाएं और पुरुष मृतकों के घर पहुंचे और दुख परिवार वालों को सांत्वना देने के साथ ही मदद का भरोसा भी दिलाया।
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..तो दोस्त भी होते धर्मेंद्र के साथ
खुटार। रोडवेज बस और कार की टक्कर मेें चार लोगों की मौत का हादसा और भी बड़ा हो सकता था, लेकिन धर्मेंद्र के दो दोस्त गांव में नहीं होने के कारण उसके साथ नहीं थे और दो अन्य दोस्त बाइक से कार से कुछ दूरी पर थे। गांव के लोगों ने बताया कि धर्मेंद्र मिलनसार था और श्रमिक ठेकेदारी करता था, जिस कारण गांव के तमाम लोगों से उसके अच्छे संबंध थे। धर्मेंद्र, संतकुमार, गुड्डू, नारायण, नीरज, गुलशन आदि के बीच याराना था। आठ जनवरी को धर्मेंद्र को गांव लख्मीपुर में मौसी और मौसा के बीच विवाद की जानकारी मिली तो उसने दोस्तों से मौसा के घर चलकर विवाद का निपटारा कराने को कहा, लेकिन उस समय नारायण और नीरज बाजार गए थे। दोनों ने धर्मेंद्र ने देर शाम गांव लक्ष्मीपुर चलने को कहा, लेकिन धर्मेंद्र तुरंत ही मौसी के घर के लिए चल दिया। कार में उसके साथ दोस्त संतकुमार और शिव प्रसाद उर्फ गुड्डू थे, जबकि दोस्त गुलशन ने कार से जाने की अपेक्षा अपनी बाइक से जाना उचित समझा और वह एक अन्य युवक के साथ कार से कुछ दूर बाइक से चल रहा था। गांव के लोगों का कहना है कि ऊपर वाले की कृपा रही कि सभी दोस्त धर्मेंद्र के साथ नहीं थे।
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एक साथ उठीं चार अर्थीं, कोहराम मचा
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एक दोस्त का भी हुआ धर्मेंद्र की चिता के पास ही अंतिम संस्कार
अमर उजाला ब्यूरो
खुटार (शाहजहांपुर)।
गांव रौतापुर कलां में बुधवार सुबह एक साथ चार शवों को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने की तैयारी हुई तो गांव वालों की आंखें नम हो उठीं। बड़ी संख्या में लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। दुख की घड़ी में गांव के तमाम घरों में चूल्हे नहीं जले और गांव की दुकानें भी बंद रहीं।
गौरतलब है कि आठ जनवरी की शाम गांव रौतापुर कलां के धर्मेंद्र की कार को रोडवेज बस ने खुटार पुवायां मार्ग पर गांव चमराबोझी मोड़ के पास टक्कर मार दी थी। हादसे में धर्मेंद्र उसका पुत्र पांच वर्षीय गिरधर गोपाल, धर्मेंद्र का दोस्त संतराम की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि गंभीर घायल शिव प्रसाद उर्फ गुड्डू ने जिला अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया था। एक साथ चार मौतों की जानकारी से गांव में कोहराम मच गया था। मंगलवार को विधायक चेतराम ने गांव पहुंचकर मृतकों के परिवार के लोगों को सांत्वना दी थी। पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार देर शाम शव घर पहुंचे सके, जिस कारण अंतिम संस्कार नहीं हो सका था।
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बुधवार को चारों शव एक साथ अंतिम संस्कार के लिए ले जाने की तैयारी हुई तो गांव वालों की आंखें नम हो उठीं। महिलाओं के करुण क्रंदन ने माहौल को और ज्यादा गमगीन कर दिया। गांव के दक्षिण तालाब के किनारे धर्मेंद्र की चिता सजाई गई, उसकी चिता के एक तरफ पास में ही पांच वर्षीय पुत्र गिरधर गोपाल को दफनाया गया। दूसरी ओर धर्मेंद्र के दोस्त संतराम की चिता सजाकर मुखाग्नि दी गई। शिवप्रसाद का उसके खेत में अंतिम संस्कार किया गया।
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गांव में पहली बार एक साथ हुईं चार की अंत्येष्टि
खुटार। गांव रौतापुर कलां के बुजुर्गों ने बताया कि गांव में इससे पूर्व कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि एक साथ चार लोगों की मौत हुई हो। चार लोगों की मौत से पूरा गांव शोकाकुल रहा और गांव की तमाम दुकानें बंद रहने के साथ ही तमाम घरों में चूल्हे तक नहीं जले। गांव की तमाम महिलाएं और पुरुष मृतकों के घर पहुंचे और दुख परिवार वालों को सांत्वना देने के साथ ही मदद का भरोसा भी दिलाया।
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..तो दोस्त भी होते धर्मेंद्र के साथ
खुटार। रोडवेज बस और कार की टक्कर मेें चार लोगों की मौत का हादसा और भी बड़ा हो सकता था, लेकिन धर्मेंद्र के दो दोस्त गांव में नहीं होने के कारण उसके साथ नहीं थे और दो अन्य दोस्त बाइक से कार से कुछ दूरी पर थे। गांव के लोगों ने बताया कि धर्मेंद्र मिलनसार था और श्रमिक ठेकेदारी करता था, जिस कारण गांव के तमाम लोगों से उसके अच्छे संबंध थे। धर्मेंद्र, संतकुमार, गुड्डू, नारायण, नीरज, गुलशन आदि के बीच याराना था। आठ जनवरी को धर्मेंद्र को गांव लख्मीपुर में मौसी और मौसा के बीच विवाद की जानकारी मिली तो उसने दोस्तों से मौसा के घर चलकर विवाद का निपटारा कराने को कहा, लेकिन उस समय नारायण और नीरज बाजार गए थे। दोनों ने धर्मेंद्र ने देर शाम गांव लक्ष्मीपुर चलने को कहा, लेकिन धर्मेंद्र तुरंत ही मौसी के घर के लिए चल दिया। कार में उसके साथ दोस्त संतकुमार और शिव प्रसाद उर्फ गुड्डू थे, जबकि दोस्त गुलशन ने कार से जाने की अपेक्षा अपनी बाइक से जाना उचित समझा और वह एक अन्य युवक के साथ कार से कुछ दूर बाइक से चल रहा था। गांव के लोगों का कहना है कि ऊपर वाले की कृपा रही कि सभी दोस्त धर्मेंद्र के साथ नहीं थे।