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रूठे कार्यकर्ताओं की मान-मनुहार में जुटे सपाई धुरंधर
शाहजहांपुर
Updated Fri, 10 Nov 2017 11:34 PM IST
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शाहजहांपुर। निकाय चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार घोषित होने के बाद से टिकट के अन्य दावेदारों में उपजा असंतोष थामने और रूठे कार्यकर्ताओं की मान-मनुहार में सपाई धुरंधर जुट गए हैं। शहर की नगरपालिका परिषद समेत मीरानपुर कटरा, खुटार व खुदागंज नगर पंचायतों को अपवाद मानें तो जिले के अन्य निकायों में असंतुष्टों को मनाने के लिए जिलाध्यक्ष तनवीर खां ने पार्टी के सभी निवर्तमान और मौजूदा जन प्रतिनिधियों को निकाय वार चुनाव प्रभारी नामित कर बगावती तेवर शांत करने की कमान खुद संभाल ली है।
शहर की पालिका परिषद से लगातार तीन बार चेयरमैन रहे तनवीर खां के अतिरिक्त अन्य किसी ने पार्टी हाईकमान से टिकट की मांग नहीं की थी। सपा के सहयोगी संगठन जन समस्या मेला समिति के तत्कालीन जिलाध्यक्ष नौशाद कुरैशी ने शुरुआत में टिकट मांगा, लेकिन तनवीर की मां जहांआरा बेगम का नाम तय होने पर नौशाद ने पत्नी हसीन कुरैशी को बसपा का टिकट दिला दिया।
अब शहर सीट पर अधिकृत प्रत्याशी का पार्टी के अंदर कोई विरोधी नहीं रहा। इसी तरह खुदागंज से केवल ओमेंद्र पाल सिंह, कटरा से निवर्तमान चेयरमैन सुकेश गुप्ता की पत्नी रेखा गुप्ता और खुटार से हरिशंकर अवस्थी ने टिकट मांगा था। इसलिए इन तीनों नगर पंचायतों के प्रत्याशियों को पार्टी के अंदर विरोध होने की कोई आशंका नहीं है। इसके विपरीत अन्य निकायों में बागी तेवर अपनाए सपाई प्रत्याशियों के लिए मुश्किलें खड़ी करने पर आमादा है। कुछ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप मेें खुलकर मैदान में आ चुके हैं, तो कई चुनावी परिदृश्य से बाहर रहकर सपा प्रत्याशियों को जीत से दूर रखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
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पुवायां में पंकज की सक्रियता बनी सिरदर्द
निवर्तमान चेयरमैन संजय गुप्ता द्वारा सपा से इस्तीफा दिए जाने के बाद पुवायां नगरपालिका परिषद से अध्यक्ष पद को गोपाल अगिभनहोत्री, हिमांशु बाजपेयी और चेयरमैन का चुनाव लड़ चुके अजीत गुप्ता सराफ के बेटे पंकज गुप्ता ने टिकट का दावा किया था। गोपाल के नाम टिकट जारी होने पर हिमांशु उनके साथ बने रहे, लेकिन पंकज ने निर्दलीय दावेदारी ठोंककर सपा नेतृत्व के सिरदर्द पैदा कर दिया है।
जलालाबाद में संजय को दोहरी चुनौती
जलालाबाद नगरपालिका सीट से फिर चुनाव जीतने के लिए निवर्तमान पालिकाध्यक्ष संजय पाठक को कांग्रेस प्रत्याशी सादिक अली और निर्दलीय शकील खां से जूझना होगा। पहले शकील खां का टिकट तय हुआ था। इसे देखते सादिक ने सपा से किनारा कर कांग्रेस का हाथ थाम लिया। संजय पाठक को टिकट मिलने पर शकील का भी सपा से मोहभंग हो गया। सपा के कई पदाधिकारी निर्दलीय शकील का खुला साथ दे रहे हैं।
तिलहर में हाजरा का विरोधी बना पिछड़ा वर्ग
तिलहर में पार्टी के पिछड़ा वर्ग ने निवर्तमान चेयरमैन इमरान खां को सामान्य सीट से जिताया, लेकिन अध्यक्ष पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होने पर उन्होंने अपनी पत्नी हाजरा बेगम को टिकट दिलाया तो बैक वर्ड लॉबी सजातीय को टिकट नहीं दिए जाने से खफा हो गई। यहां से टिकट के दावेदार रहे सपा के नगर अध्यक्ष कदीर मंसूरी और हाजी आरिफ हुसैन अब न सिर्फ एक हो गए हैं, कदीर ने निर्दलीय पर्चा भरकर अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं।
कांट में रईस मियां के समर्थकों से मिलेगी चुनौती
नगर पंचायत कांट से अध्यक्ष पद के लिए निवर्तमान चेयरमैन रईस मियां टिकट के प्रमुख दावेदार थे, लेकिन हाईकमान ने पूर्व चेयरमैन इदरीस खां की पत्नी सुरैया बेगम को टिकट दे दिया। इससे नाराज होकर रईस मियां तमाम कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए। अब रईस की पत्नी को वहां कांग्रेस उम्मीदवार बना दिए जाने से पार्टी नेतृत्व को उनसे कोई उम्मीद नहीं बची, लेकिन उनका समर्थन कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं को मनाने के लिए प्रदेश के पूर्व राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा और पूर्व मंत्री कोविद कुमार सिंह को चुनाव संचालन प्रभारी बनाया गया है।
रोजा में रुक्मिणी देवी की चौतरफा घेराबंदी
सपा से जुड़े रहे रोजा के चेयरमैन अजय गुप्ता उर्फ पोता महिला के लिए आरक्षित हुए अध्यक्ष पद का टिकट नीतू सिंह पत्नी अनूप कुमार को दिलाना चाहते थे। जिलाध्यक्ष के सिपहसालार राकेश विश्वकर्मा नीलम देवी के लिए प्रयासरत थे, लेकिन ओम गुप्ता गुट ने रुक्मिणी देवी को टिकट दिलाने में कामयाबी हासिल कर ली। इस पर नीलम बसपा प्रत्याशी के तौर पर मुकाबले में आ गईं और निवर्तमान चेयरमैन ने नीतू का नामांकन निर्दलीय के तौर पर करा दिया। नतीजे में सपा प्रत्याशी अपनी ही पार्टी के असंतुष्टों से घिरी दिख रही हैं।
अल्हागंज में राजू की राह में तमाम मुश्किलें
अल्हागंज से सगीर अहमद ने टिकट मांगा, लेकिन सपा नेतृत्व ने दिल्ली में रहकर व्यवसाय कर रहे राजू शाह को उम्मीदवार बनाया तो सगीर पाला बदलकर पुराने कांग्रेसी घर लौट गए। कांग्रेस ने भी उन्हें अपना प्रत्याशी बनाने में देर नहीं लगाई। राजू शाह की मुश्किल यह है कि सगीर के साथ घूम रहे तथाकथित सपाइयों को किसतरह अपने पाले में लाएं।
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शहर की पालिका परिषद से लगातार तीन बार चेयरमैन रहे तनवीर खां के अतिरिक्त अन्य किसी ने पार्टी हाईकमान से टिकट की मांग नहीं की थी। सपा के सहयोगी संगठन जन समस्या मेला समिति के तत्कालीन जिलाध्यक्ष नौशाद कुरैशी ने शुरुआत में टिकट मांगा, लेकिन तनवीर की मां जहांआरा बेगम का नाम तय होने पर नौशाद ने पत्नी हसीन कुरैशी को बसपा का टिकट दिला दिया।
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अब शहर सीट पर अधिकृत प्रत्याशी का पार्टी के अंदर कोई विरोधी नहीं रहा। इसी तरह खुदागंज से केवल ओमेंद्र पाल सिंह, कटरा से निवर्तमान चेयरमैन सुकेश गुप्ता की पत्नी रेखा गुप्ता और खुटार से हरिशंकर अवस्थी ने टिकट मांगा था। इसलिए इन तीनों नगर पंचायतों के प्रत्याशियों को पार्टी के अंदर विरोध होने की कोई आशंका नहीं है। इसके विपरीत अन्य निकायों में बागी तेवर अपनाए सपाई प्रत्याशियों के लिए मुश्किलें खड़ी करने पर आमादा है। कुछ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप मेें खुलकर मैदान में आ चुके हैं, तो कई चुनावी परिदृश्य से बाहर रहकर सपा प्रत्याशियों को जीत से दूर रखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
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पुवायां में पंकज की सक्रियता बनी सिरदर्द
निवर्तमान चेयरमैन संजय गुप्ता द्वारा सपा से इस्तीफा दिए जाने के बाद पुवायां नगरपालिका परिषद से अध्यक्ष पद को गोपाल अगिभनहोत्री, हिमांशु बाजपेयी और चेयरमैन का चुनाव लड़ चुके अजीत गुप्ता सराफ के बेटे पंकज गुप्ता ने टिकट का दावा किया था। गोपाल के नाम टिकट जारी होने पर हिमांशु उनके साथ बने रहे, लेकिन पंकज ने निर्दलीय दावेदारी ठोंककर सपा नेतृत्व के सिरदर्द पैदा कर दिया है।
जलालाबाद में संजय को दोहरी चुनौती
जलालाबाद नगरपालिका सीट से फिर चुनाव जीतने के लिए निवर्तमान पालिकाध्यक्ष संजय पाठक को कांग्रेस प्रत्याशी सादिक अली और निर्दलीय शकील खां से जूझना होगा। पहले शकील खां का टिकट तय हुआ था। इसे देखते सादिक ने सपा से किनारा कर कांग्रेस का हाथ थाम लिया। संजय पाठक को टिकट मिलने पर शकील का भी सपा से मोहभंग हो गया। सपा के कई पदाधिकारी निर्दलीय शकील का खुला साथ दे रहे हैं।
तिलहर में हाजरा का विरोधी बना पिछड़ा वर्ग
तिलहर में पार्टी के पिछड़ा वर्ग ने निवर्तमान चेयरमैन इमरान खां को सामान्य सीट से जिताया, लेकिन अध्यक्ष पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होने पर उन्होंने अपनी पत्नी हाजरा बेगम को टिकट दिलाया तो बैक वर्ड लॉबी सजातीय को टिकट नहीं दिए जाने से खफा हो गई। यहां से टिकट के दावेदार रहे सपा के नगर अध्यक्ष कदीर मंसूरी और हाजी आरिफ हुसैन अब न सिर्फ एक हो गए हैं, कदीर ने निर्दलीय पर्चा भरकर अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं।
कांट में रईस मियां के समर्थकों से मिलेगी चुनौती
नगर पंचायत कांट से अध्यक्ष पद के लिए निवर्तमान चेयरमैन रईस मियां टिकट के प्रमुख दावेदार थे, लेकिन हाईकमान ने पूर्व चेयरमैन इदरीस खां की पत्नी सुरैया बेगम को टिकट दे दिया। इससे नाराज होकर रईस मियां तमाम कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए। अब रईस की पत्नी को वहां कांग्रेस उम्मीदवार बना दिए जाने से पार्टी नेतृत्व को उनसे कोई उम्मीद नहीं बची, लेकिन उनका समर्थन कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं को मनाने के लिए प्रदेश के पूर्व राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा और पूर्व मंत्री कोविद कुमार सिंह को चुनाव संचालन प्रभारी बनाया गया है।
रोजा में रुक्मिणी देवी की चौतरफा घेराबंदी
सपा से जुड़े रहे रोजा के चेयरमैन अजय गुप्ता उर्फ पोता महिला के लिए आरक्षित हुए अध्यक्ष पद का टिकट नीतू सिंह पत्नी अनूप कुमार को दिलाना चाहते थे। जिलाध्यक्ष के सिपहसालार राकेश विश्वकर्मा नीलम देवी के लिए प्रयासरत थे, लेकिन ओम गुप्ता गुट ने रुक्मिणी देवी को टिकट दिलाने में कामयाबी हासिल कर ली। इस पर नीलम बसपा प्रत्याशी के तौर पर मुकाबले में आ गईं और निवर्तमान चेयरमैन ने नीतू का नामांकन निर्दलीय के तौर पर करा दिया। नतीजे में सपा प्रत्याशी अपनी ही पार्टी के असंतुष्टों से घिरी दिख रही हैं।
अल्हागंज में राजू की राह में तमाम मुश्किलें
अल्हागंज से सगीर अहमद ने टिकट मांगा, लेकिन सपा नेतृत्व ने दिल्ली में रहकर व्यवसाय कर रहे राजू शाह को उम्मीदवार बनाया तो सगीर पाला बदलकर पुराने कांग्रेसी घर लौट गए। कांग्रेस ने भी उन्हें अपना प्रत्याशी बनाने में देर नहीं लगाई। राजू शाह की मुश्किल यह है कि सगीर के साथ घूम रहे तथाकथित सपाइयों को किसतरह अपने पाले में लाएं।