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‘दलहन उत्पादन में जैविक खाद का प्रयोग करें किसान’
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शाहजहांपुर। कृषि विज्ञान केंद्र में कानपुर स्थित भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान की ओर से बायो विलेज दलहन कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजेश कुमार ने दालों मेें निहित प्रोटीन समेत अन्य पोषक तत्वों और मृदा में बढ़ने वाले नाइट्रोजन तत्व को सुरक्षित रखने के लिए किसानों से दलहन उत्पादन में केवल जैविक खादों का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया।
उन्होंने बताया कि अनुसंधान संस्थान ने जिले में पांच गांवों का चयन जैविक दलहन उत्पादन गांव बनाने के लिए किया है। संस्थान का प्रयास है कि चयनित गांवों में सभी किसान जैविक संसाधनों से दलहन की उपज हासिल करें। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. नरेंद्र प्रसाद ने पौधों के लिए आवश्यक तत्वों का उल्लेख करते हुए कहा कि दलहन उत्पादन मिट्टी में नाइट्रोजन को बढ़ावा देता है और ऐसी मृदा में जैविक खाद मिलाकर दोबारा दालों की खेती करने पर औसत उत्पादन बढ़ जाता है।
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र कुमार ने चना और मसूर की प्रजातियों के बारे में जानकारी दी। डॉ. योगेश प्रसाद ने बीज बोने से पहले उसके शोधन और जैविक कीटनाशकों की उपयोगिता बताई। शस्य वैज्ञानिक ने फसल एवं मृदा की सेहत के लिए सूक्ष्म पोषक तत्वों अथवा हरी खाद के प्रयोग पर बल दिया। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नूतन वर्मा ने आईपीएम तकनीक पर प्रकाश डाला और डॉ. राजेश कुमार कृषि उत्पादों की बाजार में उचित मूल्य पर बिक्री के बारे में टिप्स दिए। डॉ. चंद्रपाल गुप्ता के संचालन में हुए कार्यक्रम की व्यवस्था में प्रशिक्षु राहुल सिंह यादव का सहयोग रहा। अंत में केंद्र प्रभारी नरेंद्र प्रसाद ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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उन्होंने बताया कि अनुसंधान संस्थान ने जिले में पांच गांवों का चयन जैविक दलहन उत्पादन गांव बनाने के लिए किया है। संस्थान का प्रयास है कि चयनित गांवों में सभी किसान जैविक संसाधनों से दलहन की उपज हासिल करें। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. नरेंद्र प्रसाद ने पौधों के लिए आवश्यक तत्वों का उल्लेख करते हुए कहा कि दलहन उत्पादन मिट्टी में नाइट्रोजन को बढ़ावा देता है और ऐसी मृदा में जैविक खाद मिलाकर दोबारा दालों की खेती करने पर औसत उत्पादन बढ़ जाता है।
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प्रधान वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र कुमार ने चना और मसूर की प्रजातियों के बारे में जानकारी दी। डॉ. योगेश प्रसाद ने बीज बोने से पहले उसके शोधन और जैविक कीटनाशकों की उपयोगिता बताई। शस्य वैज्ञानिक ने फसल एवं मृदा की सेहत के लिए सूक्ष्म पोषक तत्वों अथवा हरी खाद के प्रयोग पर बल दिया। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नूतन वर्मा ने आईपीएम तकनीक पर प्रकाश डाला और डॉ. राजेश कुमार कृषि उत्पादों की बाजार में उचित मूल्य पर बिक्री के बारे में टिप्स दिए। डॉ. चंद्रपाल गुप्ता के संचालन में हुए कार्यक्रम की व्यवस्था में प्रशिक्षु राहुल सिंह यादव का सहयोग रहा। अंत में केंद्र प्रभारी नरेंद्र प्रसाद ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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