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सरचार्ज में छूट प्रस्ताव को भाव नहीं दे रहे बकाएदार बिजली उपभोक्ता
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सरचार्ज में छूट प्रस्ताव को भाव नहीं दे रहे बिजली बकायादार
शाहजहांपुर। गत 31 दिसंबर 2018 तक की अवधि के बकाया बिजली बिलों पर देय सरचार्ज में छूट का लाभ देने के लिए पॉवर कारपोरेशन द्वारा दो वर्ष के अंतराल पर शुरू की गई एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) को बकायेदार उपभोक्ता कोई भाव नहीं दे रहे हैं। जिले में लगभग में 50 फीसदी बिजली उपभोक्ता नियमित बिलों का भुगतान नहीं करते। चालू वित्त वर्ष में करीब दस हजार ऐसे उपभोक्ता चिह्नित किए गए, जिन पर दस हजार रुपये और इससे अधिक रकम बकाया है। बकाएदारों की संख्या एक लाख से ऊपर होने का अनुमान है, लेकिन अभी तक महज 6400 उपभोक्ताओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। उनसे अभी तक बमुश्किल आठ करोड़ रुपये राजस्व जमा कराया जा सका, जबकि कुल देनदारी लगभग 30 करोड़ रुपये है और योजना की अवधि 31 जनवरी को समाप्त हो रही है।
जिले में 2.28 लाख उपभोक्ताओं को बिजली सप्लाई देने के लिए पांच वितरण खंडों से जोड़ा गया है। बिजली सप्लाई में सुधार के साथ खपत बढ़कर प्रति माह 900 मेगा यूनिट से अधिक हो गई है। इसलिए 16-17 करोड़ रुपये तक सीमित रहने वाली औसत मासिक बिलिंग बढ़कर लगभग 22 करोड़ रुपये हो चुकी है। इनमें शहरी क्षेत्र के वितरण खंड द्वितीय की बात करें तो इस डिवीजन के 72 हजार उपभोक्ताओं से हर माह करीब 11 से 12 करोड़ रुपये राजस्व मिलना चाहिए, लेकिन जारी बिलों के सापेक्ष बमुश्किल 40 से 50 फीसदी रकम नियमित रूप से जमा हो रही है। वसूली लक्ष्य मेें 30 करोड़ रुपये में गत वर्ष का बकाया राजस्व भी शामिल है।
विभाग और उपभोक्ताओं के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए एकमुश्त समाधान योजना केवल 31 जनवरी तक के लिए लागू की गई है और इसकी अवधि बढ़ाए जाने की कोई संभावना नहीं है। जिन उपभोक्ताओं के बिल बकाया हैं, वे दो दिन के अंदर ओटीएस के रजिस्ट्रेशन कराकर ब्याज पर देय छूट का लाभ उठा लें क्योंकि भविष्य में उन्हें कोई राहत मिलने के बजाय कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
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-अजीत कुमार श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता, पॉवर कारपोरेशन
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शाहजहांपुर। गत 31 दिसंबर 2018 तक की अवधि के बकाया बिजली बिलों पर देय सरचार्ज में छूट का लाभ देने के लिए पॉवर कारपोरेशन द्वारा दो वर्ष के अंतराल पर शुरू की गई एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) को बकायेदार उपभोक्ता कोई भाव नहीं दे रहे हैं। जिले में लगभग में 50 फीसदी बिजली उपभोक्ता नियमित बिलों का भुगतान नहीं करते। चालू वित्त वर्ष में करीब दस हजार ऐसे उपभोक्ता चिह्नित किए गए, जिन पर दस हजार रुपये और इससे अधिक रकम बकाया है। बकाएदारों की संख्या एक लाख से ऊपर होने का अनुमान है, लेकिन अभी तक महज 6400 उपभोक्ताओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। उनसे अभी तक बमुश्किल आठ करोड़ रुपये राजस्व जमा कराया जा सका, जबकि कुल देनदारी लगभग 30 करोड़ रुपये है और योजना की अवधि 31 जनवरी को समाप्त हो रही है।
जिले में 2.28 लाख उपभोक्ताओं को बिजली सप्लाई देने के लिए पांच वितरण खंडों से जोड़ा गया है। बिजली सप्लाई में सुधार के साथ खपत बढ़कर प्रति माह 900 मेगा यूनिट से अधिक हो गई है। इसलिए 16-17 करोड़ रुपये तक सीमित रहने वाली औसत मासिक बिलिंग बढ़कर लगभग 22 करोड़ रुपये हो चुकी है। इनमें शहरी क्षेत्र के वितरण खंड द्वितीय की बात करें तो इस डिवीजन के 72 हजार उपभोक्ताओं से हर माह करीब 11 से 12 करोड़ रुपये राजस्व मिलना चाहिए, लेकिन जारी बिलों के सापेक्ष बमुश्किल 40 से 50 फीसदी रकम नियमित रूप से जमा हो रही है। वसूली लक्ष्य मेें 30 करोड़ रुपये में गत वर्ष का बकाया राजस्व भी शामिल है।
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विभाग और उपभोक्ताओं के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए एकमुश्त समाधान योजना केवल 31 जनवरी तक के लिए लागू की गई है और इसकी अवधि बढ़ाए जाने की कोई संभावना नहीं है। जिन उपभोक्ताओं के बिल बकाया हैं, वे दो दिन के अंदर ओटीएस के रजिस्ट्रेशन कराकर ब्याज पर देय छूट का लाभ उठा लें क्योंकि भविष्य में उन्हें कोई राहत मिलने के बजाय कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
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-अजीत कुमार श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता, पॉवर कारपोरेशन