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तालाब का सौंदर्यीकरण खत्म, कब्जा करने के प्रयास शुरू
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शाहजहांपुर/परौर। परौर स्थित राजमहल के सामने स्थित तालाब के आसपास लोगों ने गंदगी डालकर कब्जा करने का प्रयास शुरू कर दिया है। गंदगी की वजह से गांव में संक्रामक रोग फैलने की संभावना बढ़ गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तालाब को कब्जा मुक्त कराए जाने की मांग की है।
तालाब का निर्माण 32 बीघा क्षेत्र में पूर्व राजपरिवार के राजा बहादुर नरायण सिंह ने राजमहल के सामने सुरक्षा के लिए वर्ष 1805 में निर्मित कराया था। तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए इसमें कमल के फूल थे और बतखें भी इसमें रहती थीं। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि रात में दीपक की रोशनी में शाही परिवार इस तालाब में नौका बिहार करता था। आजादी के बाद शुरू हुई जमींदारी प्रथा उन्मूलन के बाद इस तालाब को ग्राम सभा परौर में दर्ज कर लिया गया। इसलिए तालाब की अनदेखी शुरू हो गई और धीरे-धीरे इस तालाब के आसपास लोगों ने कूड़ा डालना शुरू कर दिया। तालाब का काफी हिस्सा लोगों ने कब्जा भी कर लिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसी तालाब के आसपास शौचालय का निर्माण कर गंदा पानी तालाब में डाला जा रहा है। इससे तालाब में गंदगी बढ़ने से संक्रामक रोग बढ़ने की संभावना बढ़ गई है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष शिकायत करने पर डीएम के आदेश पर एसडीएम, तहसीलदार, लेखपाल ने मौका मुआयना किया लेकिन कब्जा छुड़वाने के कोई प्रयास नहीं किए। यदि इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो रामगंगा की बाढ़ का पानी जो तालाब में समा जाएगा और तालाब के आस-पास बनी इमारतों को काट देगा। डीएम को पत्र भेजने वालों में अजय सिंह, रवि सिंह आदि के हस्ताक्षर हैं।
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तालाब का निर्माण 32 बीघा क्षेत्र में पूर्व राजपरिवार के राजा बहादुर नरायण सिंह ने राजमहल के सामने सुरक्षा के लिए वर्ष 1805 में निर्मित कराया था। तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए इसमें कमल के फूल थे और बतखें भी इसमें रहती थीं। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि रात में दीपक की रोशनी में शाही परिवार इस तालाब में नौका बिहार करता था। आजादी के बाद शुरू हुई जमींदारी प्रथा उन्मूलन के बाद इस तालाब को ग्राम सभा परौर में दर्ज कर लिया गया। इसलिए तालाब की अनदेखी शुरू हो गई और धीरे-धीरे इस तालाब के आसपास लोगों ने कूड़ा डालना शुरू कर दिया। तालाब का काफी हिस्सा लोगों ने कब्जा भी कर लिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसी तालाब के आसपास शौचालय का निर्माण कर गंदा पानी तालाब में डाला जा रहा है। इससे तालाब में गंदगी बढ़ने से संक्रामक रोग बढ़ने की संभावना बढ़ गई है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष शिकायत करने पर डीएम के आदेश पर एसडीएम, तहसीलदार, लेखपाल ने मौका मुआयना किया लेकिन कब्जा छुड़वाने के कोई प्रयास नहीं किए। यदि इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो रामगंगा की बाढ़ का पानी जो तालाब में समा जाएगा और तालाब के आस-पास बनी इमारतों को काट देगा। डीएम को पत्र भेजने वालों में अजय सिंह, रवि सिंह आदि के हस्ताक्षर हैं।
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