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आसमान पर छाई धुंध और धूप से बढ़ गई असहनीय उमस
Updated Thu, 14 Jun 2018 12:32 AM IST
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आसमान पर छाई धुंध और धूप से बढ़ गई असहनीय उमस
भीषण गर्मी का जारी रहा कहर, पारा 42.2 डिग्री पर स्थिर
फोटो 02, 03, 04 और 05 में।
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर।
भीषण गर्मी के प्रकोप में बुधवार सुबह कमी आने के बजाय उसमें और इजाफा हो गया। रात में हवा नहीं चलने से लोग चैन की नींद भी नहीं ले पाए। आसमान पर सुबह से छाई धूल कणों की धुंध को जन सामान्य ने बादल समझकर बारिश होने की उम्मीद लगाई, लेकिन बाद में धूप निकलने से माहौल में पैदा हुई असहनीय उमस ने जन सामान्य में अजीब तरह की बेचैनी पैदा कर दी। इस दौरान हवा का वेग शांत रहने से गर्मी अपने चरम पर पहुंच गई। सुबह से शाम तक तापमान 42.2 डिग्री पर स्थिर रहने से लोगों को न तो घरों के अंदर राहत मिली और न ही बाहर निकलने पर।
गत कई दिन से बारिश नहीं होनेे और कड़ाके की धूप निकलने से तापमान बढने के साथ वातावरण में आद्र्र्रता का प्रतिशत लगातार घट रहा है। इस वजह से हवा से नमी का लोप होने लगा है। मंगलवार को दिन भर चल लू के गर्म थपेड़ों से हवा शुष्क हो गई और उसमें नमी का स्तर 47 से घटकर 32 फीसदी रह गया। रात में हवा का वेग पूरी तरह थम जाने और आसमान पर बादलों केे साथ छाई धुंध से इतनी उमस पैदा हो गई कि रात मेें भी पारा दो डिग्री उछलकर 31.2 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया।
इस कारण गर्मी से बेहाल लोगों ने चैन की नींद के लिए छतों पर बिस्तर लगाए, लेकिन वहां भी पूरे तौर पर सुकून नहीं मिल पाया। तमाम लोग आधी रात तक करवटें बदलते रहे और बाद में कमरों में पंखों के आगे पसरकर पसीना सुखाया। सुबह होने पर आसमान पर छाई धुंध ने घुटन जैसा माहौल बना दिया। भीषण गर्मी के दौरान बिजली के बगैर समय बिताने के लिए लोगों ने हाथ से झलने वाले पारंपरिक पंखों का सहारा लिया। खास यह है कि प्रशासन ने सार्वजनिक स्थानों पर अभी तक प्याऊ का प्रबंध नहीं किया है। कलक्टे्रट कैंपस में प्यास बुझाने के लिए रखे गए पानी के दोनों घड़े सूख चुके हैं। गन्ना शोध परिषद के मौसम विश्लेषक सुरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि वातावरण की निचली सतह का वायु दाब कम होने और निर्वात की स्थिति बनने के कारण वायुमंडल की ऊपरी सतह पर तैरने वाले अत्यंत महीन धूल कण निचली सतह पर धुंध बनकर दिखाई दे रहे हैं।
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भीषण गर्मी का जारी रहा कहर, पारा 42.2 डिग्री पर स्थिर
फोटो 02, 03, 04 और 05 में।
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर।
भीषण गर्मी के प्रकोप में बुधवार सुबह कमी आने के बजाय उसमें और इजाफा हो गया। रात में हवा नहीं चलने से लोग चैन की नींद भी नहीं ले पाए। आसमान पर सुबह से छाई धूल कणों की धुंध को जन सामान्य ने बादल समझकर बारिश होने की उम्मीद लगाई, लेकिन बाद में धूप निकलने से माहौल में पैदा हुई असहनीय उमस ने जन सामान्य में अजीब तरह की बेचैनी पैदा कर दी। इस दौरान हवा का वेग शांत रहने से गर्मी अपने चरम पर पहुंच गई। सुबह से शाम तक तापमान 42.2 डिग्री पर स्थिर रहने से लोगों को न तो घरों के अंदर राहत मिली और न ही बाहर निकलने पर।
गत कई दिन से बारिश नहीं होनेे और कड़ाके की धूप निकलने से तापमान बढने के साथ वातावरण में आद्र्र्रता का प्रतिशत लगातार घट रहा है। इस वजह से हवा से नमी का लोप होने लगा है। मंगलवार को दिन भर चल लू के गर्म थपेड़ों से हवा शुष्क हो गई और उसमें नमी का स्तर 47 से घटकर 32 फीसदी रह गया। रात में हवा का वेग पूरी तरह थम जाने और आसमान पर बादलों केे साथ छाई धुंध से इतनी उमस पैदा हो गई कि रात मेें भी पारा दो डिग्री उछलकर 31.2 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया।
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इस कारण गर्मी से बेहाल लोगों ने चैन की नींद के लिए छतों पर बिस्तर लगाए, लेकिन वहां भी पूरे तौर पर सुकून नहीं मिल पाया। तमाम लोग आधी रात तक करवटें बदलते रहे और बाद में कमरों में पंखों के आगे पसरकर पसीना सुखाया। सुबह होने पर आसमान पर छाई धुंध ने घुटन जैसा माहौल बना दिया। भीषण गर्मी के दौरान बिजली के बगैर समय बिताने के लिए लोगों ने हाथ से झलने वाले पारंपरिक पंखों का सहारा लिया। खास यह है कि प्रशासन ने सार्वजनिक स्थानों पर अभी तक प्याऊ का प्रबंध नहीं किया है। कलक्टे्रट कैंपस में प्यास बुझाने के लिए रखे गए पानी के दोनों घड़े सूख चुके हैं। गन्ना शोध परिषद के मौसम विश्लेषक सुरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि वातावरण की निचली सतह का वायु दाब कम होने और निर्वात की स्थिति बनने के कारण वायुमंडल की ऊपरी सतह पर तैरने वाले अत्यंत महीन धूल कण निचली सतह पर धुंध बनकर दिखाई दे रहे हैं।
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