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ग्राम पंचायतों के रिकार्ड व्यवस्थित कर बनाए जाएं मानचित्र
Updated Mon, 19 Mar 2018 02:00 AM IST
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शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेश ग्राम प्रधान संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष डीपी सिंह ने कहा कि ग्राम पंचायतों का समुचित विकास कराने के लिए उनके सारे रिकार्ड राजस्व अभिलेखागार में सुरक्षित कराने के साथ पंचायतों के मानचित्र नए सिरे से तैयार कराए जाने चाहिए। उन्होंने भावलखेड़ा ब्लॉक मुख्यालय पर ग्राम प्रधानों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि मानचित्र में निर्मित और गैरनिर्मित रास्तों समेत तालाबों, खलिहानों आदि का चिन्हांकन होने से उन पर अवैध कब्जों की शिकायतें थमेंगी और तहसील स्तर पर ग्राम पंचायतों के अभिलेखों में हेराफेरी संभव नहीं हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में अधिकतर विवाद भू संपत्तियों के स्वामित्व को लेकर होते हैं। अक्सर एक ही भूखंड पर दो पक्ष दावेदारी जताते हुए अपने पक्ष में अभिलेखीय साक्ष्य भी उपलब्ध कराते हैं, लेकिन ऐसी स्थिति में निर्णायक भूमिका निभाने वाले राजस्व अधिकारी भी असमंजस में पड़ जाते हैं क्योंकि सही और गलत अभिलेखों में अंतर पहचानने के लिए प्रधानों के पास ग्राम पंचायतों का पुराना रिकार्ड उपलब्ध नहीं होता। इसलिए प्रदेश शासन के मुख्य सचिव को हाल ही में दिए गए मांगपत्र में राजस्व अभिलेखागार की भांति ग्राम पंचायतों के पुराने अभिलेख व्यवस्थित कर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम प्रधानों की भूमिका के बार में पूछे जाने पर प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानों को तरह-तरह के अधिकार दिए जाने का प्रचार बहुत होता है, लेकिन वास्तविकता में इस तरह के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। इस संबंध में एक दर्जन से अधिक शासनादेश जारी हो चुके हैं, लेकिन उनके अनुपालन की शासन स्तर पर समीक्षा नहीं हो रही है। पंचायत राज एक्ट 1947 और उस पर आधारित नियमावली में संशोधन की मांग को अनदेखा करने से साबित होता है कि सरकार प्रधानों की कार्यगत व्यवहारिक कठिनाइयों की उपेक्षा कर रही है।
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इससे पहले, ग्राम प्रधानों को संबोधित कर उन्होंने विभिन्न योजनाओं में स्वीकृत संपूर्ण धनराशि शासन से निर्धारित मानकों के अनुरूप विकास कार्यों पर खर्च करने के निर्देश दिए। इस मौके पर ग्राम प्रधानों ने गांवों के विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए सभी ग्राम पंचायतों को पंचायत सचिव उपलब्ध कराने, उनकी तैनाती का अधिकार जिला पंचायत राज अधिकारी को दिए जाने, ग्राम पंचायतों को सफाई के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था अपने स्तर से करने का अधिकार दिए जाने आदि मांगों पर जोर दिया। प्रारंभ में प्रदेश अध्यक्ष का यहां पहुंचने पर संगठन के जिलाध्यक्ष संदीप कुमार राठौर के नेतृत्व में ग्राम प्रधानों ने फूलमालाओं से स्वागत किया।
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उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में अधिकतर विवाद भू संपत्तियों के स्वामित्व को लेकर होते हैं। अक्सर एक ही भूखंड पर दो पक्ष दावेदारी जताते हुए अपने पक्ष में अभिलेखीय साक्ष्य भी उपलब्ध कराते हैं, लेकिन ऐसी स्थिति में निर्णायक भूमिका निभाने वाले राजस्व अधिकारी भी असमंजस में पड़ जाते हैं क्योंकि सही और गलत अभिलेखों में अंतर पहचानने के लिए प्रधानों के पास ग्राम पंचायतों का पुराना रिकार्ड उपलब्ध नहीं होता। इसलिए प्रदेश शासन के मुख्य सचिव को हाल ही में दिए गए मांगपत्र में राजस्व अभिलेखागार की भांति ग्राम पंचायतों के पुराने अभिलेख व्यवस्थित कर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
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पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम प्रधानों की भूमिका के बार में पूछे जाने पर प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानों को तरह-तरह के अधिकार दिए जाने का प्रचार बहुत होता है, लेकिन वास्तविकता में इस तरह के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। इस संबंध में एक दर्जन से अधिक शासनादेश जारी हो चुके हैं, लेकिन उनके अनुपालन की शासन स्तर पर समीक्षा नहीं हो रही है। पंचायत राज एक्ट 1947 और उस पर आधारित नियमावली में संशोधन की मांग को अनदेखा करने से साबित होता है कि सरकार प्रधानों की कार्यगत व्यवहारिक कठिनाइयों की उपेक्षा कर रही है।
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इससे पहले, ग्राम प्रधानों को संबोधित कर उन्होंने विभिन्न योजनाओं में स्वीकृत संपूर्ण धनराशि शासन से निर्धारित मानकों के अनुरूप विकास कार्यों पर खर्च करने के निर्देश दिए। इस मौके पर ग्राम प्रधानों ने गांवों के विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए सभी ग्राम पंचायतों को पंचायत सचिव उपलब्ध कराने, उनकी तैनाती का अधिकार जिला पंचायत राज अधिकारी को दिए जाने, ग्राम पंचायतों को सफाई के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था अपने स्तर से करने का अधिकार दिए जाने आदि मांगों पर जोर दिया। प्रारंभ में प्रदेश अध्यक्ष का यहां पहुंचने पर संगठन के जिलाध्यक्ष संदीप कुमार राठौर के नेतृत्व में ग्राम प्रधानों ने फूलमालाओं से स्वागत किया।