{"_id":"59395d774f1c1bb3068b4592","slug":"101496931703-shahjahanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आयुष डॉक्टरों से लिखवाई जा रहीं एलौपैथिक दवाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आयुष डॉक्टरों से लिखवाई जा रहीं एलौपैथिक दवाएं
Updated Thu, 08 Jun 2017 07:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
शाहजहांपुर।
जिला अस्पताल में फिजीशियन के चेंबर 11 बजे के बाद भी खाली रहते हैं। गर्मी में वायरल फीवर से पीड़ित मरीजों की लाइन ओपीडी में बृहस्पतिवार को लगी थी। इसके बाद भी ग्यारह बजे तक कोई भी फिजीशियन मरीज देखने नहीं आया। मजबूरन आयुष विंग के डॉक्टर को बुलाकर फिजीशियन के चेंबर में मरीज देखने के लिए बिठाया गया।
जिला अस्पताल में अब रोज का ढर्रा बन चुका है कि सीनियर फिजीशियन दोपहर बारह बजे तक गायब रहते हैं। किसी मरीज की इतनी हिम्मत नहीं कि दोनों डॉक्टरों को ढूंढकर उनसे अपना इलाज करा सके। स्टाफ से पूछने पर बस इतना बताया जाता है कि साहब राउंड पर हैं, लेकिन राउंड कौन से वार्ड में और कब से कर रहे हैं, यह कोई नहीं बताता।
बृहस्पतिवार को भी ऐसा ही हुआ। मरीजों की भीड़ छह और सात नंबर कक्ष के सामने लगी थी। लखनौर गांव से आया हरिस्वरूप फिजीशियन को दिखाने के लिए खड़ा रहा। स्टाफ से पूछा कि डॉक्टर साहब कब आएंगे तो बताया राउंड पर है।
विज्ञापन
पूरा अस्पताल देखने के बाद भी डॉक्टर कहीं नजर नहीं आए। थक हार कर इमरजेंसी भी खंगाली लेकिन डॉक्टर वहां भी नहीं मिले। मजबूरन उसने आयुष डॉक्टर (आयुर्वेदिक चिकित्सक) को अपनी दिक्कत बता कर दवा ली। अस्पताल में आयुर्वेदिक डॉक्टरों से एलोपैथिक दवाएं लिखवाई जा रही हैं। एलोपैथी के डॉक्टरों के न बैठने के कारण आयुर्वेदिक डॉक्टरों से उनका काम लिया जा रहा है।
डॉक्टर हर समय चेंबर में नहीं मिल सकते। राउंड पर होते हैं तो चेंबर में नहीं होते। मैं जब भी किसी डॉक्टर को बुलाता हूं तो वह आ जाता है, मतलब वह उपस्थित है। रही बात आयुष डॉक्टर से एलोपैथिक दवाएं लिखवाने की तो उनको मैंने ही बिठाया है मरीज देखने के लिए।
- डॉ. केशव स्वामी, सीएमएस, जिला अस्पताल
जिला अस्पताल में फिजीशियन के चेंबर 11 बजे के बाद भी खाली रहते हैं। गर्मी में वायरल फीवर से पीड़ित मरीजों की लाइन ओपीडी में बृहस्पतिवार को लगी थी। इसके बाद भी ग्यारह बजे तक कोई भी फिजीशियन मरीज देखने नहीं आया। मजबूरन आयुष विंग के डॉक्टर को बुलाकर फिजीशियन के चेंबर में मरीज देखने के लिए बिठाया गया।
जिला अस्पताल में अब रोज का ढर्रा बन चुका है कि सीनियर फिजीशियन दोपहर बारह बजे तक गायब रहते हैं। किसी मरीज की इतनी हिम्मत नहीं कि दोनों डॉक्टरों को ढूंढकर उनसे अपना इलाज करा सके। स्टाफ से पूछने पर बस इतना बताया जाता है कि साहब राउंड पर हैं, लेकिन राउंड कौन से वार्ड में और कब से कर रहे हैं, यह कोई नहीं बताता।
विज्ञापन
बृहस्पतिवार को भी ऐसा ही हुआ। मरीजों की भीड़ छह और सात नंबर कक्ष के सामने लगी थी। लखनौर गांव से आया हरिस्वरूप फिजीशियन को दिखाने के लिए खड़ा रहा। स्टाफ से पूछा कि डॉक्टर साहब कब आएंगे तो बताया राउंड पर है।
विज्ञापन
पूरा अस्पताल देखने के बाद भी डॉक्टर कहीं नजर नहीं आए। थक हार कर इमरजेंसी भी खंगाली लेकिन डॉक्टर वहां भी नहीं मिले। मजबूरन उसने आयुष डॉक्टर (आयुर्वेदिक चिकित्सक) को अपनी दिक्कत बता कर दवा ली। अस्पताल में आयुर्वेदिक डॉक्टरों से एलोपैथिक दवाएं लिखवाई जा रही हैं। एलोपैथी के डॉक्टरों के न बैठने के कारण आयुर्वेदिक डॉक्टरों से उनका काम लिया जा रहा है।
डॉक्टर हर समय चेंबर में नहीं मिल सकते। राउंड पर होते हैं तो चेंबर में नहीं होते। मैं जब भी किसी डॉक्टर को बुलाता हूं तो वह आ जाता है, मतलब वह उपस्थित है। रही बात आयुष डॉक्टर से एलोपैथिक दवाएं लिखवाने की तो उनको मैंने ही बिठाया है मरीज देखने के लिए।
- डॉ. केशव स्वामी, सीएमएस, जिला अस्पताल