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Sant Kabir Nagar News: गुजरा साल दर साल, बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिला आशियाना

Mon, 01 Jul 2024 01:48 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Mon, 01 Jul 2024 01:48 AM IST
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Year after year passed, flood victims did not get shelter
फोटो सहित
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-वर्ष 2022-23 में घाघरा नदी में समा गए थे 47 लोगों का मकान



धनघटा। वर्ष 2022 और 2023 में घाघरा नदी के कटान से बेघर हुए 47 परिवार के लोग खानाबदोश की जिंदगी जीने को विवश है। कुछ बाढ़ पीड़ित एमबीडी बांध पर प्लास्टिक के पन्नी के नीचे जीवन गुजार रहे हैं तो कुछ किराए के मकान में रह रहे हैं। प्रशासन ने बसने के लिए जिगिना गांव के पास जमीन तो उपलब्ध करा दिया है, लेकिन वह जमीन निवास करने के लायक नहीं है, कह कर यह लोग वहां नहीं जा रहे हैं। इसके अलावा प्रशासन के तरफ से कोई पहल नहीं किया जा रहा है।

लगातार पांच वर्षों से कटान करती चली आ रही घाघरा नदी गायघाट दक्षिणी, रामपुर दक्षिणी, दौलतपुर, सियर कला, औराडाड , कंचनपुर आदि गांव के किसानों की खेती योग्य भूमि पहले अपने में समाहित कर ली। कटान के कारण गायघाट दक्षिणी समेत कई गांव के किसान भूमिहीन हो गए। उसके बाद नदी गायघाट दक्षिणी गांव को काटना शुरू की तो ईशदत, बालेंद्र, किशोरी, बुधिराम, सुरेंद्र, दिलीप, रविंद्र, मिठाई, धर्मेंद्र, नंदू, ताराचंद, सुरेश, सुंदर, रामप्रीत, प्रदीप, नागेंद्र, मुन्नर, उषा देवी, जगदीश, मोरनी, नंदू, मिठाई, धर्मेंद्र, राजू, श्याम पति, दूधनाथ, पार्वती, इंदल समेत 47 लोगों का मकान घाघरा नदी की धारा में समाहित हो गया। जिसमें से अधिकतर लोग एमबीडी बांध पर प्लास्टिक की पन्नी डालकर उसके भीतर दो वर्षों से निवास कर रहे हैं।
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कई लोग कूरी बाजार में किराए के मकान में रह रहे, तो कुछ गांव के पंचायत भवन में अपना आशियाना बनाए हुए हैं। पीड़ित बालेंद्र, किशोरी, बुधिराम, सुरेंद्र ने बताया कि खेत और मकान दोनों घाघरा नदी की धारा में समाहित हो चुका है। बसने के लिए तहसील प्रशासन जिगिना गांव के समीप जमीन तो जरूर आवंटित किया लेकिन उस उखड़-खाबड़ जमीन पर आशियाना बनाना आसान नहीं है। इसी कारण कोई भी उस जमीन पर जाने को तैयार नहीं है।
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गायघाट दक्षिणी गांव के बाढ़ पीड़ितों के लिए जिगिना गांव के आवासीय पट्टा के रूप में जमीन आवंटित कर दी गई है। वहां पर जाकर पैमाइश भी कर दी गई है। कुछ लोग निवास भी कर रहे हैं। कुछ ऐसे लोग हैं जो वहां नही जा रहे हैं। इसके साथ ही इन्हें सुविधा देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
- योगेंद्र पांडेय, तहसीलदार धनघटा
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